फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

47 Comments

  1. दिनेशराय द्विवेदी

    अरे वाह!
    फुरसतिया का नया जन्म?
    कंचन बहुत साहसी हैं,
    मगर उन की माता जी की कविता पूरी पढ़ना हमारे साहस की परिधि के बाहर था।
    साहस जुटा कर पढ़ेंगे।
    यह साहस की कमी हो गई है, हमें हम किसी को अस्पताल में मिलने जाने से घबराते हैं। जब तक कि वहाँ हमारी सकारात्मक भूमिका न हो।
    पोस्ट अच्छी है, मगर अवसाद दे गई।

  2. सही है जी

    क्या बात है सही है जी

  3. Rajesh Roshan

    ऐसे खुराफ़ाती जज्बे वाले लोग क्या पीछे लौटते हैं? बड़ा ही वाजिब सा सवाल है. जिसको लोग ये कह रहे हैं की थोड़ा मुश्किल है और कोई वही करने को तैयार है तो वह या तो दूरदर्शी है बेवकूफ…. कंचन में इतना माद्दा तो है की वह लड़ने को तैयार है… मेरे लिए तुम अभी से लीजेंडरी हो गई. इसको पढ़वाने के लिए फुरसतिया को भी बधाई.

  4. anitakumar

    कंचन जी कइयों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। उनसे अंतरंग मुलाकात कराने का शुक्रिया। हर घर को कंचन जैसी एक शख्सियत की जरुरत है।

  5. प्रत्यक्षा

    नया कलेवर बढ़िया .. एकदम हाईटेक ..और कंचन के बारे में पढ़कर अच्छा लगा

  6. Gyan Dutt Pandey

    पोस्ट के बारे में क्या कहें। ब्लॉग ही दीदा फाड़ कर देख रहे हैं हम – यह फुरसतिया का ब्लॉग है या “हाईटेकिया” का!
    हमारी भी कोचिंग क्लास ले लो जी ऐसा ब्लॉग बनवाने को।
    क्या बम्पर मारा है!

  7. डा० अमर कुमार

    ग़ज़्ज़ब !

    गिरा अनयन, नयन बिनु बानी ।

    कहीं तुलसी बाबा को पकड़ पाऊँ,
    तो लाकर यहाँ खड़ा कर दूँ, कि चल बता ‘ इस सादगी पर क्यों न मरें हम ? ‘

    बधाई जी बधाई,
    बधावा भेजो जी चेले को !

  8. डा० अमर कुमार

    फिर लौट आया हूँ,
    गुरु यह तो खरी बकैती है,
    फोटू चुनने का च्वायस तो दो, यहाँ !

    नहीं तो, टिप्पणी बक्से में कमेंट ठोक ठोक कर प्रिव्यू में फोटू देखते रह जाया करेंगे, भाई लोग !

  9. डा० अमर कुमार

    नहीं कुछ ख़ास नहीं,

    अभी फ़ुरसत में था, सोचा देखता चलूँ कि अब कौन सा फोटू लगेगा,

    गुरु, दूसरे चक्कर में पंडिताइन से शर्त हार चुका हूँ, इस बार गुरुवर हलचल ज्ञानू वाला फोटू लगवा देयो ।
    गुरु लगवा देयो ।

  10. RC Mishra

    पहले ये थीम टेस्ट कर लें अपनी साइट पर बाकी पढ़ना लिखना बाद मे :)

  11. bhuvnesh

    क्‍या बात है जी. बहुत अच्‍छा लगा ये नया कलेवर
    कंचनजी के बारे में पढ़कर बहुत अच्‍छा लगा….और तस्‍वीरें भी

  12. समीर लाल

    मैं क्यूँ इतनी देर से आया यहाँ. कैसे मिस कर गया यह पोस्ट.

    आँखें नम हैं मगर कंचन की बात सुन बस यही कहूँगा–हौसलों मे दम हैं…खूब जिओ कंचन..जीत तुम्हारी मुट्ठी में है और हम तुम्हारे साथ हैं. यही जज्बा बनाये रखना. तुम तो वो प्रेरणा हो..जिससे खुद प्रेरणा अपने होने की प्रेरणा लेती है….कभी हिम्मत न हारना. फुरसतिया का आभार जो ऐसा मार्मिक आलेख ्को यहाँ लाये..किन शब्दों में आभार कहूँ.

  13. अनूप भार्गव

    कंचन जी के बारे में पढ कर यह आस्था प्रबल हुई कि ’ज़िन्दगी ने जो दिया है उसी को मान कर चलना ज़रूरी नहीं है” ।
    एक अच्छे लेख और सुन्दर कविताओं के लिये साधुवाद ।

  14. अभय तिवारी

    और सब तो ठीक है.. पर ई स्वामी जी ने फूलों से काहे बैर ले लिया.. बैनर में ऊपर कित्ते अच्छे लगते थे.. और बाकी सब लोग भी लड़ियाए चले जा रहे हैं कि बड़ा अच्छा है .. बड़ा अच्छा है.. चलो माना बुरा नहीं है .. ठीक है.. पर जब तक फूल नहीं आएंगे हम अच्छा नहीं कहेंगे..

  15. abha

    ये पोस्ट पढ़ कर आखें नम होना वाजिब सी बात है , कंचन लिजेडरी बनेगी ही और पहले से है भी ,मै भी उसके साथ फ़ोटो खिचवाऊंगी जरूर…. कंचन को हमारा स्नेह सहित आशीष ……..।

  16. kanchan

    अन्य होंगे चरण हारे,
    और हैं जो लौटते
    दे शूल को संकल्प सारे।
    तू न अपनी छांह को
    अपने लिये कारा बनाना
    जाग तुझको दूर जाना।

    मेरे लिये कही जा रही हैं ये पंक्तियाँ… विश्वास नही हो रहा।
    दो मम्मी मुझे एक रस्सी
    मैं भर लूंगी ऊंची कुदान
    दीदी, भैया से आगे बढ़
    मैं भर लूंगी ऐसी छलांग।
    इस तरह मांगती उत्तर वह
    मां देती आंखों का पानी
    पैरों में जान फ़ूकने को
    करती किस्मत आना-कानी।
    हाँ ये स्थितियाँ आज भी जहाँ की तहाँ हैं… मैं आज भी जब माँ से कहती हूँ कि आप बस देखती जाओ, आपकी बेटी आपका हर सपना सच करेगी तो वो अब भी आँख का पानी ही देती हैं
    (ठीक से याद नहीं कि क्या जबाब दिया सौम्या ने )
    मैं याद दिला दूँ कि उसने कहा था कि ” जब गलती होती है तो डाँटती हैं..जो कि totally manipulation था :)
    साथ ही यह भी बताती चलूँ कि मसिजीवी जी ने पोस्ट पर कमेंट भले न दिया हो मगर मेरे पास उनका मेल आ गया है कि वे मेरी हर प्रकार से सहायता करने को तैयार है… आप सभी का धन्यवाद
    राजेश जी, अनीता जी, प्रत्यक्षा जी, अमर जी, भुवनेश जी, समीर जी एवं अनूप जी को उनकी शुभकामनाओं के लिये धन्यवाद और दिनेश जी से क्षमा..मैने अपने ब्लॉग पर शुरुआत में अपनी फोटो सिर्फ इसलिये नही लगाई थी, क्योंकि मैं उनमें अवसाद नही भरना चाहती थी, तथापि कोई मेरे कारण अवसाद में जाये मेरे लिये इससे बड़ा कष्ट कोई नही है।

  17. eswami

    @अभयजी, आप क्या बस ताज़ा पोस्ट पढ कर ही लौट जाते हैं? .. तनिक Home वाली कडी पर क्लिक करके देखिये मुख्य पन्ने पर हमेंशा की तरह फूल हैं.. हां वे अब पोस्ट वाले पन्नों पर भी साईड बार में दिखेंगे – उपर नया नेविगेटर जोड दिया है ना, इसलिये!

  18. सही है जी

    सही है जी :)

  19. G Vishwanath

    कंचन के बारे में पढ़कर दिल भर आया।
    पी एच डी का विषय रोचक है।
    उनसे कहिए कि, कानपूर से मीलों दूर दक्षिण भारत में कोई है जो उसकी सफ़लता और सुख के लिए कामना करता रहेगा।
    कंचन को इस अजनबी का आशीर्वाद।
    गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु

  20. दिनेशराय द्विवेदी

    @ कंचन
    अवसाद पैदा किया था कविता ने। आप का चित्र तो अवसाद नहीं साहस और हर हाल में उल्लास का सृजन करता है। उस में क्षमा की कोई बात ही नहीं थी।

  21. संजय बेंगाणी

    नया आवरण चकाचक है. हमरी फोटू भी दिखाता है, टिप्पणी के साथ :)

  22. parul

    mai kanchan se miltey miltey rah gayi..magar jab bhi ph par baat hoti hai..bahut puurani sakhi si lagti hai..aur iski himmat ko mai sadaa se naman karti huun..post mun bhaayii

  23. Shiv Kumar Mishra

    पढ़कर आँख नम नहीं हुई. गर्व हो रहा है कि हम कंचन जी को जानते हैं. बहुत शानदार पोस्ट है.
    कभी लखनऊ गए तो उनसे जरूर मिलेंगे. …
    एक बात और..सन १९८७ से मेरी भी बहुत इच्छा है कि कभी के पी सक्सेना जी से मिलूँ. जब भी लखनऊ गया तो कोशिश जरूर करूंगा.

  24. अजित वडनेरकर

    कंचन जी की हिम्मत को सलाम। ईश्वर उनकी झोली में अब बस, सिर्फ खुशियां ही डाले।
    बाकी अभयजी की बातों से सहमत हैं । हमें तो पहले वाला ही हाईटेक लगता था।

  25. मीनाक्षी

    आपने तो रुला ही दिया…पहले चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई..फिर आँखों में आँसू… कभी कभी यही मुस्कान और आँसू प्रेमभाव में डूबे होते है जो कंचन को खूब प्यार और आशीर्वाद दे रहे हैं..

  26. Manish Kumar

    अनूप जी कल रात तक आपकी पोस्ट एग्रगेटर पर नज़र नहीं आ रही थी इसलिए नहीं पहुँच पाया। कंचन से आपकी इस मुलाकात के बारे में पढ़कर अच्छा लगा। आपने सही कहा कि उनका व्यक्तित्व ऍसा है कि आप उनकी जीवटता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। आपने कंचन के लिए जो महादेवी वर्मा की कविता उद्धृत की है वो बेहद पसंद आई।
    आपके चिट्ठे का नया कलेवर भी प्यारा लगा।

  27. लावण्या

    अनूप भाई,
    बढिया कविताएँ पढने का आनँद और साथ मेँ हमारी कँचन बिटिया के बारे मेँ स विस्तार बातेँ -
    बडा अच्छा अपना सा लगा और
    कँचन,
    याद रखना ” आग मेँ तपने से ही सोना, शुध्ध हो जाता है ”
    यही तुम्हारी पहचान बनेगा -
    ” क़ँचन नाम ” सार्थक होगा ~~
    लिखती रहो, खूब तरक्की करो ~~
    स्नेहाशिष
    -लावण्या

  28. निधि

    प्रेरक पोस्ट. कंचन जी के साहस और लगन को मेरा नमन. उनके उज्जवल भविष्य के लिये ढेरों शुभकामनायें.

  29. सागर नाहर

    कंचनजी,
    जिन्दगी में सफ़लतायें आपके हमेशा कदम चूमे, यही दुआ करता हूँ।
    फुरसतिया जी
    कंचनजी के बारे में आपने जो जानकारी दी उसके लिये आपको भी धन्यवाद।

  30. MEET

    क्या बात है अनूप जी. पढ़ कर क्या कहूँ कैसा लगा. बहुत बहुत शुक्रिया ….. बहुत अच्छा लगा कंचन जी. हम सब को, या कमस्कम मुझे तो बहुत सीख मिलती है आप से. जैसा कि अनूप जी ने कहा है, आप जैसे लोग, सिर्फ़ “अपने पहलू के ज़र्रे-ज़र्रे को” नहीं चमकाते, बहुतों को चमकना सिखाते हैं. हमेशा हँसती रहें यूँ ही ….

  31. awadhesh

    बहुत दिनों के बाद एक मौका मिला एक कमेंट देने का। अनूपजी, अपनी बहन की हिम्मत और संघर्ष को बचपन से ही देखता रहा हूं लेकिन आज सभी लोगों के द्वारा उसे हिम्मत देने और प्रोत्साहन प्रदान करने पर अंतरात्मा बहुत ही प्रसन्नचित्त है।

  32. awadhesh

    मैटर सीरियस था भाई अपुन मुंह खोलने का नहीं। अपुन का नाम आया अपुन एतने में ही खुश हैं।

  33. Sanjeet Tripathi

    वाकई प्रेरक!
    सलाम कंचन जी को!
    और शुक्रिया आपको कि उनका इस तरह से परिचय करवाया आपने!
    मुआफी चाहूंगा इन दिनों ब्लॉग्स पर आ-जा नही पा रहा हूं, जल्द ही पुरानी रूटीन मे आ जाऊंगा।
    कलेवर पसंद आया!

  34. Rachana

    लेख अच्छा है..लेकिन जिनके लिये लिखा है वे और ज्यादा अच्छी हैं. :)
    फूलों की जगह बनाये रखने के लिये खास धन्यवाद.

  35. हिंदी ब्लॉगर

    इस प्रेरणादायक विवरण के लिए धन्यवाद! हमारी शुभकामनाएँ कंचन जी के साथ हैं.
    (आपके ब्लॉग का नया रूप पहले से बहुत बेहतर है.)

  36. Tarun

    कंचन के बारे में ये सब कुछ पता नही था, ये भी क्या इत्तेफाक है आज दो पोस्ट पढ़ी उनमे एक ये थी दूसरी चांद बीबी की। साहस, लगन, हौसला हो तो ऐसा। प्रिंसीपल वाली बात पढ़कर आंखें नम हो आयी।

  37. Dr .Anurag

    तीन दिन पहले अपने ब्लॉग पर अपने दोस्त की स्टोरी लिखी थी तब मालूम नही था की एक ओर हीरो हमारे बीच मौजूद है….इस लड़की के लिखने में जाने क्या था जो मुझे शुरू से अच्छा लगा ओर हम दोनों के बीच एक सम्मान का रिश्ता बना….एस एक दो पोस्ट पढ़कर मैंने बहुत कुछ लिखा….दो बार काफी लम्बी लम्बी पोस्ट…लेकिन आज ये कविता पढ़कर मेरा मन किया उसे फोन घुमा दूँ…जिंदगी के इस जज्बे को मेरा सलाम….
    मेरी निगाह में अब उसका कद कही ओर ऊँचा है……

  38. mamta

    कंचन के बारे मे जिनता जानते थे उससे और आपकी पोस्ट पढ़कर यही कह सकते है कि कंचन बहुत लोगों को प्रेरणा देती है। जितनी सुंदर कविता लिखती है उतनी ही सुंदर मन की भी है।

    एक बहुत ही बढ़िया पोस्ट के लिए शुक्रिया ।

  39. kanchan

    जी निवासन जी आपका संदेश बड़ा स्नेहपूर्ण था..! मेरी पहली पोस्टिंग दक्षिण भारत मे ही हुई थी..उस सुदूर प्रदेश से यूँ बी बहुत लगाव है मुझे…! आपका पता न जान सकी, परंतु इस स्नेह की कृतज्ञ हूँ …!

    पारुल मुझे तो ऐसा लगता ही नही कि मैं तुम से मिली नही हूँ..!

    शिव जी, लखनऊ में आपका स्वागत है..!

    अजीत जी, निधि जी, सागर जी, संजीत जी, हिंदी ब्लॉगर, ममता जी एवं तरुण जी शुभाकांक्षा हेतु धन्यवाद

    मीनाक्षी दी और लावण्या दी आप लोग तो हमेशा ही इतना स्नेह देती हैं कि बड़ी बहन की सीमा पार कर वो मातृत्व में बदल जाता है…लावण्या दी आपकी बात याद रखूँगी वैसे यही बात मीनाक्षी दी ने मेरे मेल में भी लिखी है…अपना स्नेह यूँ ही बनाये रखियेगा

    मनीष जी आप के लिये कुछ नही….बस देर से आने की उलाहना

    मीत जी आप तो हमेशा से आदरणीय रहे हैं, ये आप और जी अचानक कहाँ से आ गया …?

    भईया के कमेंट के लिये तो अनूप जी आपको ही धन्यवाद बोलना पड़ेगा, क्योंकि मैने तो इनके मुँह से अपने लिये जो विशेषण सुना है वो है..सैलक्खी और पगलिया..:)

    रचना दीदी आप का स्नेह है तो आप ऐसा कह रही हैं।

    अनुराग जी इतने कम दिनो में एक लंबी फेहरिश्त है आपके चाहने वालों की और उनमें एक मैं हूँ आप की प्रशंसा बहुत मायने रखती है मेरे लिये..!

    और अंत में धन्यवाद अनूप जी को जिन्होने इतने सारे लोगो का स्नेह मेरे लिये एकत्रित किया

  40. Ravi Sharma

    Kanchan DIDI se main hamesha ashirwad mangta hun. Ab pata nahi ki woh bari hai yan main?

  41. Rakesh Jain

    Di ke liye, kuchh bhi kahna,aasan nahi hai, aapne kafi sanyojit tareeke se unke jeevan ke bare me kaha hai, main bhi do shabda kahta hun apki baat me jod kar, maine ek aamul-chul badlav apne jeevan main paya is vyaktitva ke sampark me aane ke bad. apki lekhni ka koi kusur nahi hai, unki dastan hee esi hai, ki aansuon ko bhi rona aa jaye. Meri Pyari di ko kotishah naman.

  42. गौतम राजरिशी

    कंचन को अब जाना…और इतने विलंब से आया इस पोस्ट पर। कुछ लोगों से मिलने-जानने के बाद जो एक विचित्र सा अहसास होता है कि क्यों इतनी देर से जाना…कुछ ऐसा ही अहसास कंचन को जानने के बाद…
    जिस अधिकार से वो मेरी जिंदगी में चली आयी वो जरा भी अचरज भरा नहीं लगा, उल्टा एक अपरिभाषित-सा अपनापन लिये…
    कंचन तुम, कंचन रहो हमेशा अनवरत सदैव-सदैव !

  43. ARSH

    अब इनके बारे में मैं क्या कहूँ.. कुछ भी तो नहीं कह सकता ऐसी असाधारण शक्सियत के बारे में कुछ कहना अपने बस की बात तो नहीं है ,…मगर इस बात से जरुर इतफाक रखता हूँ के ये बहोत हड़कायू हैं ये तो मैं भली भाँती जानता हूँ… हा हा हा हा… अब मेरी खरियत की दुआएं करो आप सभी इस कड़वी सच्चाई के लिए…

    मगर सलाम इनको यही कहूँगा और अल्लाह मियाँ से यही गुजारिश करूँगा के हमेशा ही इन्हें कंचन बनाए रखे…

    अर्श

  44. venus kesari

    कंचन जी से आपकी मुलाक़ात को बयान करती इस पोस्ट को पढ़ा, और पढने के बाद सबसे पहले तारीख देखी की ये पोस्ट मुझसे छूट कैसे गई फिर सन देखा तो पताचला पिछले साल की पोस्ट है

    कंचन जी से मेरा परिचय गुरु जी के ब्लॉग पर हुआ अब तो कंचन जी ka ब्लॉग नियमित पढता हूँ

    किसी के जीवन संघर्ष को हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते ख़ास कर उसका जिसका जीवन दुःख की छ्या में बीता हो

    venus kesari

  45. Prashant (PD)

    ek saal bad bhi utna hi sarthaka.. :)
    sochta hun salana ise padha karun, shayad mere sare depression door ho jaye ise padhkar.. :)

  46. Saagar

    पता नहीं कैसे-कैसे यहाँ तक आया… आया तो काफी उबा और थका हुआ था… माउस टिक करते करते जब बेमन से इसे पढना शुरू किया तो दिमाग के दोनों हिस्से जागने शुरू हुए… और अंत तक… आँखों में आंसू आये… लगा की फिर से जिस्म से जान आ गयी है… और जीवन चल रहा है… जिंदगी से दो-चार होता रहूँ… और क्या चाहिए… मैंने कंचन जी का कमेन्ट बहुत कम ही देखा है वो भी डॉ. अनुराग के ब्लॉग पर कभी कभार पढ़ा है… मगर एक ही चीज़ निकलकर सामने आये थी की वो बहुत भावुक हैं… मगर ऐसी जिजीविषा, औ जीवटता काबिल-ए-तारीफ है…

    मैं आपका भी शुक्रगुजार हूँ जो आपने इनसे हमारा तार्रुफ़ करवाया…

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  1. मुझको बड़ा आदमी बनना है

    [...] बताया जाता है। कंचन के बारे में लिखी पोस्ट दिखायी जाती है। वह कमेंट लिखती है: kanchan di [...]

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