फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

29 responses to “ज्ञानजी हिंदी ब्लागजगत के मार्निंग ब्लागर हैं”

  1. दिनेशराय द्विवेदी

    सुबह सुबह इत्ती लम्बी। पर मजे में झेल गए हैं। क्या चिठेरा-चिठेरी तबादले पर गए थे और अब लौट आए हैं?

  2. समीर लाल

    एक मुये मोबाइल की हिंदी तो तय नहीं हो पायी है।–हा हा!!! क्या सही पकड़ा. वैसे ज्ञानजी चालिसा पढ़कर मन आनन्दित हुआ. हालांकि, आपके शब्दों में और यथार्थ में भी, आजकल पस्त हूँ मगर जरुरी बात जान ही लेता हूँ. चिठेरा चिठेरी संवाद सही रहा. ऐसा ही दर्शा करवाते रहिये. :)

  3. डा०अ्मर कुमार

    चलो चुप्पी तो टूटी..शुकुल की
    सुकुल चुपाय बइठे रहें, अउर लोग गावत रहें

    ….. ऒऎ हॊयॆ माँजैं तोपिया टुपुर टुपुर, ..अइयईय्या सुकुल सुकुल .. अइयईय्या सुकुल सुकुल

  4. डा०अ्मर कुमार

    माःफ़ कीजियेगा..अइयईय्या सुकुल सुकुल
    हम फिन्से लउट आये, सिरिफ़ ई बताने को…कि हमसे अभिन एक बड़ा अविष्कार हुई गवा है
    चिट्ठाकार समूः वालन को सूचना दै दीन जाये कि गेट वेल सून की सुध्ध हिंदी अविष्कार कई लिया गवा है

    गेट वेल सून = लाओ कुँआ शीघ्र ही = शीघ्र ही कुँआ लाओ…ठिक्कै बोले न, बिल्कुलै स्वीट एंड सिम्पल……

  5. प्रभात

    बहुत खूब ! ग्यान द्त्त जी से सुबह -२ इतना लम्बा दर्शन करा दिया :)

  6. अभय तिवारी

    एक तो बेचारे आप को ब्रिले.. जाने का कहे.. इत्ते बोल्ड में.. तबहूँ आप मौज लिए चले जा रहे हैं.. ई अच्छी बात नहीं है.

  7. Shiv Kumar Mishra

    बहुत फुरसत में कायदे से मौज लिए हैं भइया. बहुत गजब पोस्ट है. और डॉक्टर साहब द्बारा “गेट वेल सून” का हिन्दी अनुवाद तो गजबे है. इसका एक अनुवाद हम भी किए जाते हैं…..और ये अनुवाद खिचडी वाला अनुवाद है.

    गेट वेल सून….मतलब फाटक और कुँआ दुन्नो सूना हैं.

  8. alok puranik

    भईया हम तो भौत पहले ही कह दिये थे कि कनपुरिये काम लगा देते हैं। और महीन लगाते हैं, लो जी सुकुलजी ने लगा दिया ना काम।

  9. संजय बेंगाणी

    एक साथ इत्ता…. थोड़ा थोड़ा ठेला करो….

    भोत टेम लगता है पढ़ने में. बाकि चकाचका.

  10. Sanjeet Tripathi

    मोबाईल की हिंदी वाला मसला एकदम सही लपका आपने। ;)

    काफी दिनों बाद पढ़ा आपको इसलिए लंबा भी झेल गए कोई वान्दा नई।
    बाकी रही बात ज्ञान जी के मॉर्निंग ब्लॉगर होने की तो एकदम सहमत है भले कभी मॉर्निंग में पढ़ नही सका उनका ब्लॉग, हे हे हे!

  11. Prashant Priyadarshi

    लंबा मगर अति रोचक..

  12. anitakumar

    देख रहे हैं ज्ञान जी चारों खाने चित्त है आप के चिठेरे चिठेरी से। आप की ये पोस्ट एकदम छ्क्का है(क्रिकेट का), ज्ञान जी की अगली गुगली का इंतजार हैं , बैट ठीक से संभालिए। आप का स्कोर हुआ है चार बॉल पर सात रन्।

  13. anitakumar

    डा अमर कुमार और शिव जी का गेट वैल सून का हिन्दी अनुवाद भी मजेदार रहा, आप तो सच्ची कनपुरिए हैं जी सच में ज्ञान जी को क्या औरों को भी साथ में ही काम पर लगा दिए।

  14. सही है जी

    ये हुई फ़ुरस्तिया मिसाईल , हम पहले ही कहे थे ना कि पुरानी तोप से ही मिसाईल फ़ायर करेगे :)

  15. अरूण

    ये हुई फ़ुरस्तिया मिसाईल , हम पहले ही कहे थे ना कि पुरानी तोप से ही मिसाईल फ़ायर करेगे

  16. प्रियंकर

    “हमें आज तक समझ में नहीं आता कि कविता अगर सुन्दर है तो बन के पढ़ी काहे रहती है। ठिकाने काहे नहीं लगती)”

    “ज्ञानजी बड़े अधिकारी हैं। ऐसे लोगों को जब कुछ समझ नहीं आता तो किसी की तारीफ़ करने लगते हैं। कुछ उसी तरह से कि मिश्रा जी शुक्लाजी की इज्जत करते हैं, शुक्लाजी पाण्डेयजी की इज्जत करते हैं, पाण्डेयजी तिवारीजी की इज्जत करते हैं। सब एक दूसरे की इज्जत करते हैं कोई ससुरा काम की बात नहीं करता।”

    “फ़ुरसतिया को पता है कि ज्ञानजी की तबियत अभी ठीक नहीं हैं। लोग बीमारी की हालत में जाने क्या-क्या कह जाते हैं। उसकी बुरा नहीं मानना चाहिये। तबियत ठीक होते ही सब नार्मल हो जाता है।”

    जय हो ! बलिहारी !

    चिठेरा-चिठेरी बहुत दिन बाद आए . पर क्या खूब आए .

    ज्ञान जी तो हिंदी ब्लॉग-संगम के औघड़ हैं . जिसकी तारीफ़ की वह तो तरा ही,जिसको गरिया दिया (हालांकि इस कला में अभी थोड़ा कच्चापन है) उसका भी बेड़ा पार .

    हां! इसका फ़ैसला भी आज ही कर दीजिए कि यदि’ज्ञानजी हिंदी ब्लागजगत के मार्निंग ब्लागर हैं’ तो ईवनिंग ब्लॉगर कौन है ?

    झाड़े रहिए कलट्टरगंज .

  17. Gyandutt Pandey

    (ऑफ रिकार्ड) अच्छा; हमें कानपुरिया भाखा में कुंआं और दरवाजा दोनो दिखाया जा रहा है! :-)
    इसे कहते हैं मीठी छुरी से हलाली! :-)

    (ऑन रिकार्ड) वाह बहुत बढ़िया लिखा जी।
    फुरसतिया बहुत स्वीट हैं। बोले तो हिन्दी ब्लॉगरी की रसमलाई!

  18. neeraj

    भोत बढ़िया भाई..घना आनंद आया…आप की पोस्ट पढने को ज्ञान जी भी ठीक हो गए होंगे…एक बात बता दूँ वो कित्ते ही बीमार हो जायें लेकिन पोस्ट लिखना ना छोड़ सकते…भाई चोर चोरी से भले ही चला जाए…हेराफेरी से थोडी ना जावेगा…शिव का अनुवाद get well soon ka बिसके जैसा ही लगा…धाँसू…
    नीरज

  19. बोधिसत्व

    रात में ही लिखना था पर मैं कोई सूरज तो हूँ नहीं…सो गया तो अभी जागा हूँ…ग्यान भाई तो सच में ब्लॉग जगत के विरले लेखक हैं…और आप भी

  20. Ghost Buster

    आपके यहाँ तो कुछ भी कहते हुए डर लगता है. क्या पता चिठेरी की तरह कब झिड़क दें, “चल भाग मुये अनाम ब्लागर कहीं के.” लगता है ये अनामियत का चोगा उतारना ही पड़ेगा.

  21. अविनाश वाचस्पति

    मार्निंग नहीं
    गुड मार्निंग ब्‍लॉगर.

    ज्ञान नहीं
    विज्ञान ब्‍लॉगर.

    सोते हैं देर तक
    पर पोस्‍ट जग जाती है
    लग जाती है.

    माना है उन्‍होंने
    जाना है सबने
    सच है बिल्‍कुल.

  22. अविनाश वाचस्पति

    संजय बेंगाणी के अलावा
    सबके कार्टून बना दिए
    अब कीर्तिश जी क्‍या करेंगे
    नैनो बना दिए हैं
    अब चैनो बनायेंगे.

  23. सागर नाहर

    चिठेरा- चिठेरी संवाद ने तो हंसाया ही पर गेट वेल सून के अनुवादों ने बहुत खुश कर दिया। पर भाई साहब इस तरह के अनुवादों पर तो हमारा कॉपीराइट है अभी तक..

  24. Dr .Anurag

    हमने रात के ब्लोगार्स तो बहुतेरे देखे है पर इत्ती सुबह वाले कम ही…….शयद अकेले ही….

  25. abha

    सच्ची जब तक मैं पहुचती हूँ कि देखूं कौन कौन है ब्लांग पर तब तक ज्ञान जी के यहाँ टिप्पणी बरस चुकी होती है कई बार तो मै हार कर लौट लो रही थी इधर बीच , बाकी लम्बा मौज …..

  26. बाल दिवस पर ज्ञान दिवस

    [...] ज्ञानजी हिंदी ब्लागजगत के मार्निंग ब… [...]

  27. anupam agrawal

    ये चिठेरी चिठेरा कहीं घूमने गए हैं आजकल ?

  28. seema gupta

    चिठेरा: सही है। चलो अब ज्ञानजी को डिस्टर्ब न करो। सोने दो। वैसे भी उनको नींद कम आती है। यहां तुम चोंचें लडाओगी तो वे और सो न पायेंगे।
    चिठेरी: अरे मुये मुझे कहता है चोंचे लड़ा रही हूं। फ़ुरसतिया बना बैठा बातें तू छांट रहा है। जा मैं तेरे से अपना समर्थन वापस लेती हूं।

    ” ha ha ha ha ha ha ha hahahahaha ha ha ha ha ha ha mind blowing, fatastic, ha ha ha ”

    Regards

  29. pankaj upadhyay

    हाहा… आपको जानने के बाद ये पोस्ट्स एकदम लाईव लगती है… एक खिलखिलाती, गुदगुदाती पोस्ट… सुबह का कोटा आपने पूरा कर दिया ;)

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