
हिंदी ब्लागजगत के शुरुआती दिनों में कुछ ब्लागरों ने लोगों को ब्लाग से संबंधित जानकारी देने का काम बहुत मेहनत से किया। आलोक कुमार , देबाशीष, रविरतलामी, पंकज नरूला पहले से सक्रिय थे। इसके बाद सितम्बर 2004 में मैदान में उतरे जीतेंन्द्र चौधरी। इनहोंने अपने सक्रियता, लेखन और नये-नये आइडिया उछालने में सबको पीछे छोड़ दिया। सबसे केवल एक मेल भर की दूरी पर रहते। न जाने कित्ते लोगों के ब्लाग की सेटिंग इन्होंने की, टेम्पलेट बनाये, तकनीकी सलाहें दीं। नये-नये आइडिया देते हुये ये चिंता नहीं की इन्होंने कि आइडिया सफ़ल होगा या असफ़ल! जीतेंन्द्र के इसी सक्रियता के बारे में कभी लिखते हुये मैंने लिखा था था: जीतेन्द्र चिट्ठाजगत के सबसे सक्रिय ब्लागर हैं।सबसे ज्यादा मेल शायद इन्होंने लिखीं होंगी ब्लाग से संबंधित। सबसे ज्यादा टिप्पणियां शायद जीतेन्द्र ने लिखी होंगी। सबसे ज्यादा (रवि रतलामी को छोड़कर) शब्द इन्होंने लिखे होंगे। सबसे ज्यादा आइडिया जीतेन्द्र ने उछाले होंगे। सबसे ज्यादा आइडिया जीतेन्द्र के परवान चढ़े होंगे। सबसे ज्यादा आइडिया जीतेन्द्र के निरस्त किये गये होंगे। सबसे ज्यादा अपने ब्लाग में परिवर्तन जीतेन्द्र ने किये होंगे। सबसे ज्यादा जीवन्त पात्र जीतेन्द्र के होंगे.सबसे ज्यादा प्यार (हिट्स) जीतेन्द्र को मिला होगा। सबसे ज्यादा संभावनायें आगे भी हैं इनसे.
इसके अलावा सबसे ज्यादा में जो बचता है वह यह है कि शायद जीतेंद्र अकेले ऐसे शक्स होंगे जिनकी मैंने सबसे ज्यादा खिंचाई की होगी और सबसे ज्यादा पलट के जबाब भी जीतू ने दिये होंगे। उनसे मौज लेते हुये हमें कभी सोचना नहीं पड़ा कि वो क्या सोचेगा। बल्कि दूसरों ने एकाध बार कहा- कि कभी तो बख्स दिया करो जीतू को। मौज का एक नमूना इधरिच देखा जाये।
अपनी पोस्ट नींद न आये तो आजमायें में जीतेंन्द्र ने हमसे मौज ली। नींद लाने के उपाय बताते हुये उन्होंने लिखा:
शुकुल से चैट करिए:ये शायद आपको पता ना हो, जब भारत मे रात होती है तो शुकुल छ्द्म नाम से चैट करते है, नही नही मै आपको उनकी चैट आईडी नही दे सकता। शुकुल दर असल अपनी अमरीकी गर्लफ़्रेन्ड से बतिआते है (भाभी जी, यदि आप ये ब्लॉग पढ रही है तो ध्यान दीजिएगा) अमरीकन गर्लफ़्रेंड जिसने शुकुल को अपनी उमर १० साल कम बतायी है वो समझती है कि शुकुल, c.u.cool है जो व्हाइट हाउस मे काम करते है। हाँ शुकुल ने उसको यही झाम दे रखा है। शुकुल से आप दस पन्द्रह मिनट बतिया लें, नींद आने की शर्तिया गारंटी।
उन दिनों जीतेंन्द्र नारद के लिये लगे रहते थे। जहां नारद डाउन हुआ वहां जीतेंन्द्र डबल डाउन हो जाते थे। हमने जबाबी मौज ली:
यह पोस्ट पढ़कर हमारी एक शंका का समाधान भी हो गया। हम मानते हैं कि हम देश-विदेश की तमाम महिलाऒं से काफ़ी दिन बतियाते रहे। और ये व्हाइट हाउस वाली महिला से भी बतियाते रहे। लेकिन अभी पिछले हफ़्ते हुआ कि हम बड़े प्यार से बतिया रहे थे तो अचानक महिला ‘बाय-बाय’ कहकर जाने लगी। हम बोले-कहां जा रही हैं क्या बुश बुलाइन हैं? वो महिला हड़बड़ा के बोली- अरे बुश गया भाड़ में यहां साला नारद डाउन हो गया। देखते हैं नहीं तो गिरिराज फिर से एक पोस्ट ठोंक देगा। उसी दिन मुझे पता लगा कि जीतेन्द्र में व्हाइट हाउस की कन्या की आत्मा भी आती है। बाद में ई-स्वामी से चेक कराया कि व्हाइट हाउस की कन्या हमें जो मेल लिखती थी उनका आई.पी. पता कुवैत का होता था। आज सब सच सामने आ गया। तसल्ली हुयी! अब बढि़या नींद आयेगी![]()
बहुत दिन से जबसे जीतेंन्द्र की सक्रियता कम हुयी है यह मौज-मजा कुछ कम हो गया है। मौज-मजा हरेक के बस का नहीं होता जी। जरा सा किसी को छेड़ो, बुरा मान जाता है। हमको शराफ़त ओढ़नी पड़ती है।
न जाने कित्ते किस्से हैं जीतेंन्द्र के। हम लगभग एक्के साथ ब्लागिंग के मैदान में कूदे। न जाने कित्ते झाम किये साथ-साथ। न जाने कित्ते झगड़े हुये जीतेंन्द्र के। देबाशीष, ई-स्वामी, अतुल और भी तमाम लोगों से। लेकिन जहां सबको झगड़ा खतम करने के लिये उपदेश देने का प्रयास करें तहां पता लगा कि सब मिलके किसी तकनीकी प्रोजेक्ट में सर भिड़ा रहे हैं। हम हमेशा सर पीटते रहे- इनके झगडों में स्थायित्व नहीं है। न जाने कित्ते किस्से हैं। सब लिखने बैठें तो जीतेंन्द्र का अगला हैप्पी बड्डे आ जायेगा।
आज जीतेंन्द्र चालीस साल के हो गये। कहा जाता है कि चालीस साल के बाद नटखट हो जाता है। इस लिहाज से तो ये नाटी बच्चा चालीस साल है।
कुछ सवाल-जबाब जो हमारे और जीतेंन्द्र में हुये वो यहां दिये जा रहे हैं। नीचे जीतेंन्द्र से संबंधित पोस्टें दी जा रही हैं। आप अगर इनको पढ़ेंगे तो देखेंगे कि पिछले चार सालों के ब्लागिंग के न जाने कित्ते किस्से आपको पढ़ने को मिलेंगे इससे आप अंदाजा लगा सकेंगे कि आज हिंदी ब्लागिंग किन-किन गलियों से होकर यहां तक पहुंची है।
चालीस साल की उमर होने पर यूं तो चालीस सवाल पूछने चाहिये। पूछ भी सकते हैं। लेकिन जीतेंन्द्र की सक्रियता हमें इसके लिये मना करती है। उनकी उछल कूद के अंदाज देखते हुये वो अपनी उमर से कम से कम दस साल कम तो लगते ही हैं।
जीतेंन्द्र को उनके जन्मदिन के अवसर पर अपने पूरे मन से शुभकामनायें देते हुये उनसे हुये सवाल-जबाब यहां दिये जा रहे हैं।
यारों के यार, दिलदार व्यक्तित्व के स्वामी। ब्लॉगर के रूप में इनकी सफ़लता का राज़ इनका सरल भाषा में लेखन जिसका स्टाइल ऐसा मज़ेदार होता है कि दुखी से दुखी व्यक्ति भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सकता!अमित गुप्ता
जबाब:गलतियां हर जगह होती है, ऊपर वाले के कम्प्यूटर मे भी वायरस आ गया होगा, तभी तो हमे ला पटका इधर। वैसे कलाकार हम भी कम नही है, लेकिन क्या है पारखी नज़रों की तलाश है बस।
जबाब:अब का करें, कम्पनी ने बाजा बजा रखा है। रोजी रोटी का सवाल है। फिर ब्लॉगिंग ब्लॉगिंग खेल कर भी थक से गए थे, फार ए चेंज, कुछ कम्पनी का काम करने मे कोई हर्जा तो है नही।
जबाब:एल्लो! अब हमको फंसा कर बोलते हो कि कैसे फंस गए। अब अपने ब्लॉग पर इल्लम पिल्लम लिखे थे तुम, हमको जँच गया। वो कहते है ना खरबूजा खरबूजे को देखकर रंग बदलता है, फिर एक कानपुरी को देखकर दूसरा कानपुरी ना बदले, ऐसा कैसे हो सकता है भला। इसलिए हमने भी देखा देखी दुकान खोल ली। जो चल निकली।
जबाब:कोई काम होता तो करते ना। कट्टे बना बना कर, जो टाइम मिलता है दूसरों की खिंचाई मे बिताते है। आजकल विरह रोग से पीड़ित है। वैसे हम आजकल बचे हुए है, वजह, फुरसतिया आजकल रेलवे वाले अफ़सरों (शिव/ज्ञान बाबू) के पीछे पड़े है।
जबाब: अब लोगों से मन की बात जानने के लिए कुछ अलग करना ही पड़ता है। अब इस बारे मे ज्यादा खुलासा करेंगे तो फुरसतिया नाराज हो जाएंगे। इसलिए इसको यहीं पर दफन किया जाए।
जबाब: नारद प्रोजेक्ट अपने आप मे अनूठा था, काम करके काफी अच्छा लगा। सभी ब्लॉगरों मे जागरुकता जगाने वाला प्रोजेक्ट था। नारद के नए संस्करण पर काम करना था, कुछ काम हुआ भी, लेकिन बात अटकी पड़ी है। मसला ये है कि एग्रीगेटर का भविष्य है कि नही। फिर दो एग्रीगेटर अच्छा काम कर रहे है, इसलिए हम कुछ नया करने की सोच रहे है। लेकिन समय मिलने पर ही इस बारे मे कुछ किया जाएगा।
जबाब: हाँ, सही सुना है। ठीक ठाक पैसे मिल जाते है। आगे का भविष्य कारपोरेट ब्लॉगिंग और सेलीब्रिटी ब्लॉगिंग का है, वहीं से पैसे बनेंगे। हर उत्पाद, फिल्म, टीम का हिन्दी मे ब्लॉग होगा। लिखने का काम ठेके पर होगा।
जबाब: अब शास्त्री जी का तो हमे नही पता, लेकिन मेरे पास फैन मेल लगातार आती है। कई लोग टिप्पणी का प्रयोग करते है, कई लोग कान्टेक्ट फार्म का और कई लोग सीधे सीधे इमेल ठेल देते है। अब किसी का हाथ तो पकड़ नही सकते, कि यहाँ लिखो, वहाँ मत लिखो । कोई महिला पाठक हुई तो? वैसे हाथ पकड़ कर पंगा लेने का रिस्क सिर्फ़ फुरसतिया ही ले सकता है, हमारी औकात नही। हमारे पास जिस रस्ते से मेल आती है, उसी रास्ते से जवाब को रवाना कर देते है।
जबाब: इसी को पीपुल मैनेजमेंट कहते है यार! (हीही) वैसे हमारा काम बोलता है, और फुरसतिया को कुछ ना कुछ तो बोलना होता है। ये हियां का कर रहे हैं, संसद मे काहे नही जाते प्रभु।
जबाब: हां अभी पिछले दिनो गए थे, नागरिक सम्मान हुआ था। बकिया किसी भी कम्पयूटर वाले से पूछ लेना।
जबाब:भई हमने तो बाथरुम की बात बतायी थी, बतंगड़ तो तुमने बना दिया था। रही बात बीबीजी की, अमां शादी से पहले पाँच साल की दोस्ती थी, वो हमको सबसे ज्यादा समझती है।
जबाब: ह्म्म! सही सवाल। देखो भैया, जब इत्ते दिमाग वाले एक काम मे लगेंगे तो आपस मे भिड़ेंगे भी। लेकिन ये भिड़ंत विचारों की होती है, व्यक्तियों की नही। देबू, इस्वामी, अतुल या पंगेबाज, सभी से विचारों का द्वंद था, शायद ये द्वंद हमे, एक दूसरे के ज्यादा करीब लाया। आज की तारीख मे सभी गहरे दोस्तों मे शामिल है। ना मानो तो उनसे ही पूछ लो। अब इसे तुम नेतागिरी कहो तो इसका कौनो इलाज थोड़े ही है।
जबाब:ब्लॉगनाद और उसके अगले संस्करण संजय से लोग जुड़ ही नही सके। वैसे भी आडियो ब्लॉगिंग सभी के बस की बात नही। कम से कम हमारे जैसे बिन ड्राफ्टिए ब्लॉगर के बस की तो कतई नही। बाकी देखो शशि/देबू अभी भी पॉडभारती चला चला रहे है।
जबाब: कानपुर से बेहद प्यार है, लेकिन इस बार शहर कुछ डूबा डूबा सा लगा। रही बात काम धाम की, तो अभी भी चेले चपाटी लोग, काम को चला रहे है। हम बस दूर से बैठे उनकी प्रोग्रेस देख रहे है।
जबाब:भैया धूल से एलर्जी है, कानपुर मे धूल बहुत है। भोपाल अच्छी जगह है, बुढापे में देबू और रवि भी उधर मिलेंगे। अब तुमने भी तो लखनऊ मे बसेरा बनाया है, काहे?
जबाब: उसके बारे में जो पूछना हो सब पूछ लो। जबाब एक साथ देंगे।
जबाब: नोट किया और पूछो!
जबाब: पूछते रहो!
जबाब: बस कि और कुछ उसके बारे में पूछने को?
जबाब: अच्छा तो सुनो भैया, उसने कुछ भी बताने के लिए मना किया है, इसलिए नो कमेंट।
जबाब:समय की कमी और पाठको की किल्लत की वजह से। लेकिन अब फिर से चालू किया है, इस बार सिंधी, देवनागिरी और रोमन लिपि मे एक साथ।
जबाब:लिखते रहेंगे, कभी थोड़ा कम, थोड़ा ज्यादा। अलबत्ता अब विषय आधारित लेख ज्यादा होंगे। इस विषय मे आगे अपने ब्लॉग पर खुलासा करेंगे।
जबाब: मौसमी मुद्दे है सब। ब्लॉगर एक ऐसा जीव होता है, जो दूसरों को कुछ भी कह ले, लेकिन उसे कोई कुछ चूं भी कर दे तो बवेला खड़ा कर देता है। ये मुद्दे भी बेवजह खड़े किए गए है।
जबाब: ये उदासीनता ब्लॉगर की निशानी है। कई बार तो विचार नही मिलते, फिर विचार मिल गए तो टाइम नही मिलता, वो मिल जाता है, लोग बाग अपने ब्लॉग पर लिखना ज्यादा पसंद करते है। कुल मिलाकर मसला ये है कि लोग दूसरे के खोमचे पर लिखने की बजाय, अपनी गुमटी लगाना ज्यादा पसन्द करते है।
जबाब:किस्से तो बहुत है, लिखने बैठूंगा तो हजारो पोस्ट निकल आएंगी। लेकिन बस समय का अभाव है। फिर भी समय निकालकर लिखेंगे इस पर।
जबाब: कैसे कह दें, सभी अपने बच्चे है, कौन सा लायक और कौन सा नालायक। लेकिन मै समझता हूँ, मोहल्ला पुराण वाले लेख काफी अच्छे थे, आस पास अर्थचर्चा पर लिखे गए लेखों के लिए होमवर्क भी किया था।
जबाब:कई पोस्ट लिखी गयी थी, बेवजह, बेइरादतन, बस लिखने के लिए लिखी गयी थी। अब तुम खुद ढूंढो, 950+ लेखों मे से।
जबाब: हिन्दी ब्लॉगर के ब्लॉग पर लिखी एक एक पोस्ट सहेजने लायक है, उन्मुक्त के यात्रा वृतांत, अमित/ तरुण के तकनीकी लेख अच्छे होते है। कई साथियों की अतीत की यादें काफी अच्छी थी। मान्या की कुछ कविताएं बेजोड़ थी। तुम्हारे कुछ सदाबहार लेख शानदार है।
जबाब: पिटवाने का इंतजाम करा रहे हो? ना बताएंगे।
जबाब:नए ब्लॉगरों को सहायता करने में और नारद को पुनर्जीवित करने में।
जबाब:जब लोगों ने बिला वजह अंगुलियां उठायी। कई बार तो लगा कि हम किसलिए ये सब कर रहे है? खैर…ये सब तो होता ही रहता है।
जबाब: बस फैमिली को साथ लेकर डिनर पर जाएंगे। अब बुढापे मे जन्मदिन मनाया नही जाता, अपने आप मन जाया करता है।
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जा
तेरे स्वप्न बड़े हों।
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जा,
तेर स्वप्न बड़े हों।
दुष्यन्त कुमार




ताऊ का जनम दिन तो अत्यन्त ऐतिहासिक ढंग से मन गया.
हम तो फुरसतिया चाचा के हाथों ताऊ का बर्डे सेलिब्रेट होते देख छोटे बच्चे की तरह कूद रहे हैं, :0
एक संयोग देखिये कि आज मेरी बहन का भी जन्मदिन है.
सारी बातचीत और ब्लोगीँग का शैशव काल जीवित हो गया !
आपके इत्ते प्यारे Friend alias White House Gal;-)
जीतू भाई की सालगिरह पर
हमारी बधाई भी शामिल कीजिये
अनूप भाई बातेँ बडी रोचक लगी हैँ !
स स्नेह,
- लावण्या
जीतू भाई जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
मैने जो पाया है – जीतेन्द्र हरफनमौला ब्लॉगर ही नहीं; अभूतपूर्व इन्सान भी हैं। और उनकी उपस्थिति सहज लगती है – बौद्धिक आतंकवाद नहीं!
जीतू जी का हिन्दी चिट्ठजगत में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्हें जन्मदिन की शुभकामनायें।
जीतू भाई की तारीफ में इतने कसीदे पहले ही पढ़े जा चुकें हैं कि कुछ भी कहेंगे तो सागर में बूँद के माफिक होगा। फिर भी यही कहेंगे कि किसी जमाने में टिप्पणी किंग जीतू ही हुआ करते थे। यही नही वो काम करवाने में भी उस्ताद हैं, आप काम निपटा भी लोगे फिर भी आपको पता नही चलेगा कि आप से मजदूरी करवा दी गयी है। अब जीतू भाई की क्या तारीफ करें, देखो इन्होंने अपने जन्मदिन के लेख में हमारी भी तारीफ कर दी, कितना बड़प्पन टपक रहा है चालीस की उम्र में। हम कम से कम जन्मदिन के लिये नंबर ९ शेयर करते हैं, आपको जन्मदिन की लख लख बधाई।
जीतू भाई को जन्म दिन की बधाई। हम ब्लागरी में देर से पैदा होने वालों के लिए आज की पोस्ट एक इतिहास का पन्ना है। वह भी मजेदार।
जितु भाई,
जन्मदिन की हार्दिक बधाई !
हैप्पी बर्थडे हैप्पी हैप्पी …
बधाई स्वीकारें.
हिन्दी ब्लॉगिंग के क्षेत्र मे ताऊजी के योगदान को याद रखा जाता है / जाएगा. उनकी मेहनत आगे भी जरूर रंग लाएगी.
इतनी लम्बी और सार्थक पोस्ट लिखने के लिए धन्यवाद.
बहुत बढिया रहा!
जीतू भाई, जन्मदिन पर हार्दिक बधाई!
.
मेरा एक प्रश्न अनुत्तरित है.. जरा पूछ कर बताओ गुरु,
जितेन्दर छाँ खराबी थियों, हेड्डे इंडिया केड़ी… बुधाँय ?
तहाँ खे इंडिया केड़ी तकलीफ़ आहे, यो बुधाँयोजी.. मेहरबाणी ।
साथ में यह शुभकामनायें भी दे देना..
तहाँ खे जनमडिण दियों जी लख लख वाधायूँ ।
” Jitender Sir, many many happy returns of the day, my god cant believ kee taau ke bhumika neebhane wale aap he hain.. mind blowing. Its really very interesting to know about you”
Regards
जीतू भाई को बुज़र्गी मुबारक
अपने को जो कहना था अपन कहे दिए हैं और पोस्टवा में फुरसतिया जी छापे भी दिए हैं, अब और का कहें, बस जन्मदिन की बधाई भर रह गई, तो आफिशियल रिकॉर्ड के लिए यहाँ भी कहे देते हैं, पर्सनली तो दे ही दिए हैं!
अरे कहना तो रह ही गया – “हैप्पी बड्डे भाईसाहब, आप जिएँ हज़ारों साल, हर साल के दिन हों पचास हज़ार”!
अब जीतू भाई सोचें तो बताए देते हैं कि पिछले साल उन्होंने जो गिफ़्ट दिया था उसी ब्रांद का हम खरीद के इनको दिए हैं, कि अपने को लगा जीतू भाई को यहीच्च पसंद है!!
जितेन्द्र भाई ! !जन्म दिन की शुभकामनाएं
बडे भईया.. जन्मदिन की ढेरो शुभकामनायें, और आने वाले ऐसे और हजारो जन्मदिन की शुभकामनायें, भी एडवान्स मे ले लिजीये
तुम जियो हजारो साल, साल के दिन हो पचास हजार वाले तर्ज पर
डिनर पर जायेंगे तो एक अलग से ही एक टेबल मेरे लिये बोक कर लिजीयेगा
खाते खाते हैप्पी बर्थ डे वाला गाना गाऊँगी।
बधाई !
sakshatkaar behatarin…. kavita lajawaab
जीतू जी को ….जन्मदिन की हार्दिक बधाई !ऐसे लोगो को सक्रिय रहना चाहिए….गाहे बगाहे ही सही
जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई जी .बहुत अच्छा लगा इस को पढ़ के ..
हम नए कबूतरों के लिए ये पोस्ट एक मील का पत्थर
है ! जिन चीजों के बारे में सहज ही जान कारी की
इच्छा होती है ? उनका बहुत कुछ जवाब और जानकारी
इस पोस्ट द्वारा सहज और दिलचस्प अंदाज में मिल जाती है !
@ ताऊ जीतेन्द्र जी आपके बारे में आज पता चला ! तो ताऊ जी
थमनै इस ताऊ रामपुरिया की तरफ़ तैं जन्म दिन की घणी
शुभकानाएं ! और भई अनुभव म्ह तो हम थारै बालक ही सै !
सो आशीर्वाद देते रहणा ! इब रामराम !
जीतू भाई को जन्मदिन की हार्दिक बधाई…
ये सवाल-जवाब कार्यक्रम शानदार रहा. ऐसे सवाल आप ही पूछ सकते हैं. और ऐसे जवाब भी जीतू भाई ही दे सकते हैं.
जीतू जी को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं। हम तो जब से यहाँ आये हैं किसी ने इनके बारे में बताया ही नहीं। कम से कम मुझे तो याद नहीं कि किसी ने बताया हो। फुरसतिया जी को इस परिचय के लिए धन्यवाद।
Many Happy Returns of the Day Jitendra ji
happy birthday to Jitu! Jitu ki bahut khinchai karne ka man ho raha hai!
janam din manane ka yeh tarika badhiya raha , mauj ki mauj aur birthday wishes alag se
हीरो को मुबारकां जी मुबारकां !
यह चेहरा ऐसा ही चहकता-दमकता रहे !
हमारी शुरुआती ब्लॉगरी के मार्ग के कांटे बिन्ने’इ साफ किए थे जी . सो बहुतै अहसान है जी हम पर बिनका . होर ऐसा मनई है जी कि कोई कैसी भी मदद की पुकार-गुहार करे , भाई तिनके का सहारा लिए हमेशा हाज़िर रहता है अलादीन के चिराग की माफ़िक .
हज़ारी उमर होवे जी !
इंटरनेट की खराबी के चलते बिलेटेड हैप्पी बर्थ डे विश करना पड़ रहा है, मुआफी के साथ स्वीकार करें।