फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

39 Comments

  1. manvinder bhimber

    न जाने कब बेचारा बुश उधार मांग बैठे,
    कभी तो दो-चार पैसे बचाना सीखिये।

    लैला-मजनू में पट नहीं रही आजकल,
    उनको लिव-इन के फ़ायदे गिनाना सीखिये।

    bahut achchi lagi aapki ye panktiyan
    bahut sunder

  2. अफ़लातून

    कानपुर कनकौव्वा,ऊपर चले रेल का पहिया,नीचे बहती गंगा मैय्या , चना जोर गरम !

  3. दिनेशराय द्विवेदी

    बहुत मौजूँ है। पर यह तो पाठ सूची लगती है। एक एक पाठ को सीखने में कुछ समय तो लगेगा। हो सकता है, तब तक मंदी निपट ले। हालांकि आसार कम हैं। पर आस पर तो दुनियाँ कायम है।

  4. विवेक सिंह

    आपने नीरज गोस्वामी जी से प्रभावित होकर हमको प्रभावित कर कर दिया . नकल (सॉरी गजल) अच्छी है . आभार !

  5. Shiv Kumar Mishra

    अच्छी तहरीर है.

    मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिए
    टांग फटने से बचाना सीखिए

    सर्दियों की शाम में पानी गरम कर
    टांग को बस गुनगुनाना सीखिए

    फिर भी गर फट जाए तो मुश्किल नहीं
    क्रीम बढ़िया सी लगाना सीखिए

    क्रीम से भी काम गर जो न बने
    मोजों में रुई घुसाना सीखिए

  6. ताऊ रामपुरिया

    अपने पैसे से ऐश किये तो क्या किये,
    गैर के पैसे को हिल्ले से लगाना सीखिये।
    बहुत बढिया है जी ! आपके आदेश का पालन करते हुए हम तो पहले ही लट्ठ छोड़ कर फटे में टांग उलझाने को तैयार रहते हैं !:)

  7. seema gupta

    लैला-मजनू में पट नहीं रही आजकल,
    उनको लिव-इन के फ़ायदे गिनाना सीखिये।

    जलवे हैं आशिकों के आजकल बहुत,
    न मिले कोई तो खुद लटपटाना सीखिये।

    “ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha kya kmaal kee class lee hai aaj aapne, bhut kuch seekha diya….. or han vo apkee janch ka kya hua, koee inquery vgerh beethaee kya…report aa jaye to ek photopocy humko bhee dejega”

    Regards

  8. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    फटे में टांग अड़ाना तो हिन्दी ब्लॉगरी का च्यवनप्राश है! खूब खाया खिलाया जाता है।
    कैसे न अड़ाया जाये फटे में टांग, वह संयम सिखाने का यत्न करें महामहिम ब्लॉगर जी! :-)

    लिखा (ऐज यूजुअल) बहुत बढ़िया है!

  9. anil pusadkar

    वाह भैय्या वाह ।

  10. P.N. Subramanian

    बहुत अच्छे. मज़ा आ गया. सुखी जीवन के कारगर नुस्खे. आभार.

  11. जि‍तेन्‍द्र भगत

    क्‍या खूब लि‍खा है आपने-
    देश के हालत बड़ी खराब है दोस्तों,
    तसल्ली से इस पर बहसियाना सीखिये।

  12. SHUAIB

    वाह वाह वाह वाआह :)
    मज़ा आगया।

  13. Dr .Anurag

    छोडिये ये कागज कलम जनाब
    थामिये कम्पूटर ओर फुरसतियाना सीखिये

    लगता है ….दीवाली के बाद अभी भी छुट्टियों का खुमार है….टांग अडा ही दी !

  14. अजित वडनेरकर

    नसीहतों की ग़ज़ल…वाह !!

  15. Abhishek Ojha

    शायरी गजल तो सब कह लेते हैं,
    फुरसतिया की तरह जमीनी बातें करना सीखिए !

  16. डा.अमर कुमार

    भाई जी, यह करवा के एक बार तो पिटवा चुके हो…
    अब और क्या चाहते हो, इस मासूम से ?

  17. parul

    badhiyaa hai….ekdum kanpuriyaa

  18. Shiv Kumar Mishra

    टांग गर छोटी हो औ फटहा बड़ा
    फिर वहां से भाग जाना सीखिए

    लैला बेचारी है रोये जार-जार
    मंजनू से उसको रुलाना सीखिए

    बुश की हालत देखकर हैं सब खुशी
    कुछ तो उसपे तरस खाना सीखिए

    आपने पिटवा दिया मासूम को
    थोड़ा मरहम भी लगाना सीखिए

  19. सतीश सक्सेना

    क्या गज़ब की रचना है अनूप भाई, आपकी इस रचना और भाई शिव कुमार जी की पूरक रचना को जोड़कर एक विमोचन समारोह का इंतजाम करें ! और हो सके तो चिटठा चर्चा पर लायें …मज़ा आजायेगा हँसते हँसते …

  20. Kuldeep

    क्या कहू अब मै कहने को क्या रह गया,
    बस ….मजा आ गया

  21. डा. अमर कुमार 'मासूम'

    जो डबलरोटी पर ही मरहम लगा तिबल बनाकर खा लेते
    उनको सही जगह मरहम लगाने की जगह दिखाना सीखिए

  22. preeti barthwal

    लैला-मजनू में पट नहीं रही आजकल,
    उनको लिव-इन के फ़ायदे गिनाना सीखिये।

    जलवे हैं आशिकों के आजकल बहुत,
    न मिले कोई तो खुद लटपटाना सीखिये।

    गैर की तारीफ़ तो फ़िजूल है यार,
    अपनी तारीफ़ों के कनकौवे उड़ाना सीखिये।

  23. preeti barthwal

    बहुत बढ‍िया, मजा आ गया

  24. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'

    सीख लिया है तुमने गज़ल का लिखना
    अब इसे तर्रन्नुम में सुनाना सीखिये.

    अपना लिखा तो सभी पढ़वाते हैं, मियाँ
    आप गैरों को पढ़ कर टिपियाना सीखिये. (ये दूसरों के लिए है, आप तो सीखे सिखाये हो. :) )

    -बहुत उम्दा!! वाह वाह!!

  25. दीपक

    अभी सीखते है।

  26. subhash bhadauria

    ग़ज़ल नीरज की चुराना सीखिये.
    गाहे गाहे हिनहिनाना सीखिये.

    नक्ल में भी अक्ल लाज़िम है जनाब,
    यो हीं मत भोंपू बजाना सीखिये.

    दिल भी मिल जायेंगे इक दिन देखना,
    हाथ तो पहले मिलाना सीखिये.

    आप लिखती हो ग़जब की शायरी
    मछलियाँ ऐसे फँसाना सीखिये.

    हम अछूतों से रखे हो दूरियाँ,
    पांव बुलबुल के दबाना सीखिये.

    वज़्न से गिरते हो फुरसतिया चचा,
    ग़ज़ल पहले गुनगुना सीखिये.

  27. बोधिसत्व

    हम तो मुंबई के पचहा हैं…टाँग किसकी है…

  28. gagansharma09

    या वज्जीवेत सुखं जीवेत, ऋण कृत्वा घृतं पीवेत।

    चार्वाक जिंदाबाद।

  29. varsha

    दूसरों के फटे में टांग अड़ाना, हर चलते-फिरते को सलाह देना और मुश्किलों में मुस्कुराना। ऐसी बातें तो अपन लोगों की आदत में शामिल है।

  30. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी

    बहुत कागज कुण्डली में रंग दिया।
    अब ग़जल को आजमाना सीखिए॥

    हैं ग़जलगो ब्लॉग में बिखरे हुए।
    अब इन्हें पहचान जाना सीखिए॥

    काफिया जो तंग हो कम वज्न भी।
    तो बहर को भी भुलाना सीखिए॥

    मौका-ए-फुरसत अगर मिल जाय तो।
    ग़जल की कक्षा में जाना सीखिए॥

  31. रवि

    बेवजन, बेबहर, बिना काफिया और रदीफ रहित
    हमने सीख ली, आप भी फुरसतिया ग़ज़ल कहना सीखिए

    भाई वाह क्या व्यंज़ल है!

  32. राज भाटिया

    दूसरों के फटे में टांग अड़ाना,अरे भाई कही टांग आडते आडते गिर गये तो बत्तीशी के पेसे कोन देगा, ना बाबा ना.
    धन्यवाद इस टांग अडाई की नसीयत के लिये,

  33. anitakumar

    :) excellent as usual
    अपने पैसे से ऐश किये तो क्या किये,
    गैर के पैसे को हिल्ले से लगाना सीखिये।

    गैर की तारीफ़ तो फ़िजूल है यार,
    अपनी तारीफ़ों के कनकौवे उड़ाना सीखिये।

    waah

  34. Rewa Smriti

    अपने पैसे से ऐश किये तो क्या किये,
    गैर के पैसे को हिल्ले से लगाना सीखिये।

    Wah wah…

  35. राहुल सिद्धार्थ्

    बढिया लिखा है जनाब .ऐसे ही लिखते रहे.
    शुभ्कामनाए

  36. Pramendra Pratap Singh

    प्रभावित होकर बहुत कुछ अच्छा लिखा है, अच्छा लगा।

  37. neeraj

    वाह जनाब वाह…आप ने मेरी ग़ज़ल को जो इज्ज़त बक्शी है उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया…मैंने देखा की आप की ग़ज़ल के सामने मेरी वाली तो बेचारी पानी सी भरती दिखाई देती है…इतने सारे लोगों ने इस में शिरकत की है की देख कर मजा आ गया…उम्मीद है आईन्दा भी मेरी ग़ज़लों पर आप नजरे इनायत करते रहेंगे…इतनी रोचक पैरोडी पढ़ कर हमारा तो ग़ज़ल लिखना सार्थक हो गया बंधू….सच कहते हैं.
    नीरज

  38. प्रभात टन्डन

    सब सीख गये , गुरुजी :)

  39. Ashutosh Dixit

    ek dam kanpuriya andaz hai … maza aa gaya.

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