कल हम बराक ओबामा के शपथ ग्रहण के बाद के कुछ किस्से देख रहे थे। शरमाते हुये से शपथ के लिये आगे जाते ओबामा। बाइबल पर शपथ लेने के लिये रखे हाथ की अंगूठी। शपथ लेने के बाद ओबामा की बच्ची का विजयी भाव में अंगूठे का विजयी निशान दिखाती उसकी बच्ची। फ़िर पत्नी के साथ डांस करते , चूमते हुये हुये ओबामा।
ओबामा की खूबियां एक-एक करके सामने पेश की जाने लगीं हैं। उनकी पत्नी मिशेल की खूबियां बखान होने लगी हैं। बच्चियां किस पर पड़ी हैं इसकी चर्चा होने लगी हैं। मिशेल की पसंद की बात होने लगी है। उनके पसंद के रंग बताये जाने लगे हैं। मतलब कि अब ओबामा सबसे अधिक बिकाऊ मीडिया आईटम हो गये हैं।
अपने देश में भी लोग कहने लगे हैं यार एक ठो ओबामा इधर भी चाहिये। यहां भी आये तो कुछ काम बनें। ओबामा का मतलब अगर अल्पसंख्यक, अश्वेत, वंचित समुदाय से आने की बात है तो भारत में ऐसे कई ओबामा टुकड़ों-टुकड़ों में आये और कालांतर में अपनी गति को प्राप्त हुये। एक नहीं कई। इसका जिक्र रवीश कुमार ने अपनी पोस्ट में किया है।
ओबामा से अभी अमेरिका के लोगों को तमाम आशाये हैं। महाबली पस्त है। लेकिन उनके हाथ में कोई जादू की छड़ी तो है नहीं। वे जो भी निर्णय लेंगे उनसे पलक झपकाते उनके संकट तो खतम नहीं हो जायेंगे। फ़ुरसतिये-बतकटिये लोग लिये खुर्दबीन ओबामा की हरकतों पर निगाहें जमाये हैं ताकि मौका मिलते है उनकी खिंचाई या जयजयकार शुरू किया जाये।
यह संयोग है कि आज अमेरिका की हालत पतली सी है। सेनायें फ़ंसी हैं। बैंको को डुबा दिया मिलके उनके लालों नें। अमेरिका धिरा है तमाम बवालों में। सो उनको ऐसा आदमी चाहिये जो फ़ालतू की फ़ूं-फ़ां में टाइम वेस्ट की बजाय अपनी हालत ठीक कर दे। कल को संभव है कि अमेरिका की आर्थिक हालत अच्छी हो जाये। उसकी सेनायें अपने घर में आ जायें। फ़िर संभव है कोई देश उससे अकड़े और ओबामा उस पर हमला न करें तो वे शायद वहां अलोकप्रिय हो जायें। लोग कहें -यार, इत्ता मुलायम राष्ट्रपति कौन काम का? इससे अच्छा तो बुश था जो बरबाद कर गया लेकिन उनके यहां घुस के मारा तो।
अब आप देखिये कि भारत और अमेरिका में कित्ते भी अन्तर हों लेकिन एक मामले में हम और अमेरिकाजी एक जैसे हैं। हम भी इंतजार करते हैं कि कोई आये अभिमन्यु आये और समस्याओं के चक्रव्यूह से हमारा उद्धार करके चला जाये, उधर अमेरिकाजी भी इंतजार करते हैं कि कोई ओबामा आये और हमें संकट से उबारे।
अभिमन्यु का इंतजार
अजीब हाल है यार
जिसे देखो कहता है-
इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिये एक ठो अभिमन्यु चाहिये।
चक्रव्यूह में फ़ंसे कि अभिमन्यु याद आये।
चक्रव्यूह भी काहे का?
हरेक को अपना हर झमेला
चक्रव्यूह नजर आता है।
जरा सा फ़ंसा नहीं
अभिमन्यु को बुलाता है।
अब अभिमन्यु भी बेचारा क्या करे?
कहां-कहां जाये?
किसके-किसके चक्रव्यूह में घुस जाये?
उसकी तो हालत है यार
जिसे कहते हैं न,
एक अनार सौ बीमार!
लेकिन अभिमन्यु पैदा करने के भी
एक कायदे का बाप चाहिये।
ऐसा बाप जो कायदे से
उसकी मां को चक्रव्यूह भेदन की
कहानी सलीके से सुनाये।
ऐसे कि मां बोर न हो
जम्हुआकर सो न जाये।
सातों दरवाजे तोड़ने की कथा पूरी सुने फ़िर आराम से सो जाये
ताकि अभिमन्यु आये तो चक्रव्यूह के अंन्दर ही न मारा जाये।
हमें इंतजार है अभिमन्यु का
लेकिन अब अभिमन्यु भी समझदार हो गया है
वो भी अपने लिये अनुकूल माहौल का इंतजार कर रहा है।
वो आयेगा लेकिन आहिस्ते से
देख-दाख के आयेगा।
कोई भी अपनी जान फ़ालतू में
फ़ंसाना नहीं चाहता!
हमारे पास कोई चारा भी नहीं है जी
सिवाय इंतजार के।
हम तो अभिमन्यु बनने से रहे
हमारे अपने ही लफ़ड़े कम हैं क्या यार
जो फ़ालतू में अपनी जान फ़ंसाये यार
अभिमन्यु के लिये तो कर लेंगे जी हम इंतजार!
इंतजार का मजा ही कुछ और है।

हमें नही चाहिए ओबामा। हम अपना कुछ खुद बना लेंगे।
यहाँ देखिये इंडिया घुस के मारने से बच रहा है तो पब्लिक गाली दे रही है और वहाँ देखिये अमेरिका ने घुस के मारा तो भी पब्लिक गाली दे रही है – वैसा ही लड्डू हो गया ये तो जो खाये वो चिल्लाये जो ना खाये वो भी चिल्लाये
अभिमन्यू के भरोसे इस कलियुग में जीत की उम्मीद करना बेमानी है जी। द्वापर में साक्षात् भगवान के साथ रहते बेचारे की वैसी दुर्गति हुई थी। आज जब भगवान के विरुद्ध ही ‘नो-कान्फिडेन्स’ चल रहा है तो क्या कर लेगा एक अभिमन्यू। उसका अपना भाई ही गोली से उड़ा देगा…।
शानदार पोस्ट. लगता है अब पूरा का पूरा भारत अभिमन्यु को ही तलाश रहा है. आभार.
अब हमें तो इंतजार है कि कब ओ बा माँ भारत आयें !
शब्द कम ,अर्थ ज़्यादा
हमें इंतजार है अभिमन्यु का
लेकिन अब अभिमन्यु भी समझदार हो गया है
वो भी अपने लिये अनुकूल माहौल का इंतजार कर रहा है।
वो आयेगा लेकिन आहिस्ते से
देख-दाख के आयेगा।
कोई भी अपनी जान फ़ालतू में
फ़ंसाना नहीं चाहता!
“अभिमन्यु भी लगता है चिट्टा चर्चा पढ़ कर सीख रहा है हा हा हा कब कब क्या क्या करना बोले तो लिखना चाहिए …ओबामा का आँखों देखा हाल मजेदार रहा….”
Regards
यहाँ भी ५० लफड़े फंसे हैं. अभिमन्यू का मोबाईल नम्बर है क्या? बहुत अर्जेन्ट ही समझो.
बेहतरीन आलेख.
हमारे यहां तो बहनों-अम्माओं के घणे विकल्प हैं। जिस रंग का चाहिये, मिलेगा(गी)।
हमारे पास कोई चारा भी नहीं है जी
सिवाय इंतजार के।
हम तो अभिमन्यु बनने से रहे
हमारे अपने ही लफ़ड़े कम हैं क्या यार
जो फ़ालतू में अपनी जान फ़ंसाये यार
अभिमन्यु के लिये तो कर लेंगे जी हम इंतजार!
बहुत लाजवाब. अब तो सही मे ओबा-मामा क्या करेंगे? देखना दिल्चस्प होगा.
रामराम.
“…हम तो अभिमन्यु बनने से रहे
हमारे अपने ही लफ़ड़े कम हैं क्या यार
जो फ़ालतू में अपनी जान फ़ंसाये यार
अभिमन्यु के लिये तो कर लेंगे जी हम इंतजार…” बहुत खूब कही है…
भगतसिंह पैदा तो होना चाहिये, लेकिन पड़ोसी के घर पर… मेरा नौनिहाल तो सॉफ़्टवेयर इंजीनियर बने और अमेरिका जाये तो जीवन तर जाये…
कोई आये और समस्याओं के चक्रव्यूह से हमारा उद्धार करके चला जाये, साठ साल हो गए पता नहीं कहाँ फुरसत में बैठा है. आता ही नहीं.
O MAA!!
One 0–MA was (/ is??) the one who has created certain hopelessness and the other O–MA is the one who came up with Hope for America!!
अल्पसंख्यक का सत्ता में आना अमेरिका के लिए बड़ी बात हो सकती है, यहाँ तो पिछले पचास-साठ वर्षों से ऐसे लोग भी पॉवर में हैं और पिछड़े कहे जाने वाले लोग भी हैं!! जो तीर अमेरिका ने अब मारा है ऊ तो भारतीय बौत टेम से मारते आ रहे हैं, का बड़ी बात है!!
जिस दिन हम किसी अभिमन्यु या कृष्ण का इंतजार करना बंद कर देंगे हम सारे चक्रव्यूह से बहार आ जायंगे . आपक्ली पोस्ट बहुत ही अच्छी लगी .बधाई
जरा को धीर धरो गुरु,
पंडिताइन ने अपुन के थोबड़े पर फ़ेयर एन लवली लगाने से
तत्काल प्रभावी पाबंदी लगा दी है । बड़ी कड़ाई से अपुन की निगरानी चल रैली है ।
कलमुँहीं गोरेपन की इस नामुराद क्रीम का इफ़ेक्ट उतरते ही,
जौन कहोगे तौन बन के हाज़िर होता हूँ ।
तब तक आप इसी तरियों की घणी ढिंचक पोस्ट लिखने में अपना मन लगाते रहो ।
तो फिर मिलता हूँ… आदाब अर्ज़ है !:)
इन्तजार कीजिये ……..कल तक !
‘ओबामा का मतलब अगर अल्पसंख्यक, अश्वेत, वंचित समुदाय से आने की बात है’ क्या कहूं जहाँ देखो यही मतलब निकाले बैठे हैं लोग. पता नहीं… हम अपने यहाँ तो दूर ओबामा को भी बस इसीलिए देख रहे हैं की वो ब्लैक हैं. कोई उस व्यक्ति की प्रतिभा क्यों नहीं देखता. क्या ओबामा इसलिए राष्ट्रपति बने की उन्होंने ब्लैक राजनीती की? रविशजी के जितने उदहारण थे उनमें से किसने ऐसी राजनीती की? सबने बस अपनी जाति के नाम पर वोट माँगा और समाज में विभाजन ही बढाया. हमारे यहाँ वोट मांगने में और डालने दोनों ही में हम बस जाति ही देखते हैं. अमेरिका की तरह हम जिस दिन ‘सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रतिभा’ देखेंगे उस दिन बहुत कुछ अपने आप सही हो जायेगा…. लेकिन हम तो ओबामा से भी उल्टा ही सीख्नेगे !
खैर हमें क्या… जो मन में आया बक गए
पंडित जी कितने ओबामा चाहिए अपुन अमेरिका को मेल कर देते है इम्पोर्ट कर लेंगे जी .
ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा ओबामा
अब आपसे क्या हिसाब किताब करना . अपने ही आदमी हैं . जितने ओबामा चाहिए रख लेना बाकी वापस भेज देना .या और जरूरत हो तो बता देना . शरमाने की क्या बात है !
- आपका विवेक
आदरणीय फ़ुरसतिया साहब, ओबामा के बहाने से जो दर्द आपने आज उलीच दिया है शायद ही उस पर किसी की नज़र पड़ी हो। अब तक आपका सिर्फ़ सम्मान था दिल में, पर आज नतमस्तक हुआ जी। ओ चेहरे चेहरे से हँसने और हँसाने वाले फ़ुरसतिया जी, इतना संजीदा भी कहते हो ? धन्य हो ।
waah ! lajawaab…..
ekdam sadha hua vyangy…sadhuwaad.
बहुत सुंदर लेख लिखा, अरे हमारे यहां भी तो एक ऒबामी है, जिसने थोडे दिन पहले ही एक गरीब …….. की… पर अपना जन्म दिन मनाया, उस के सिवा ओर भी ऒबामा है हमारे यहां तो भरे पढे है.
अब हमे हिटलर चाहिये…..जेसे जर्मन सीधा हो गया, यहां के लोग सीधे हो गये वेसे ही हमे भी कोई सीधा सिरफ़ हिटलर जेसा ही कर सकता है, आम आदमी के हम बस के नही.
धन्यवाद
हमें भी है अभिमन्यु का इंतजार