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	<title>Comments on: जींस-टाप, फ़ादर्स-डे और टिप्पणी-चिंतन</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: Nishant</title>
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		<dc:creator>Nishant</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2009 19:00:44 +0000</pubDate>
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		<description>मैं फोटो को बड़ा करके देखना चाहता था. उसपर क्लिक किया तो उस कमसिन फूल की जगह पर पादप जगत का फूल दिखा. मुझे आपने फूल क्यों बनाया जी!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं फोटो को बड़ा करके देखना चाहता था. उसपर क्लिक किया तो उस कमसिन फूल की जगह पर पादप जगत का फूल दिखा. मुझे आपने फूल क्यों बनाया जी!</p>
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		<title>By: berojgar</title>
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		<dc:creator>berojgar</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Aug 2009 08:56:20 +0000</pubDate>
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		<description>&quot;इस तरह के पहनावे में लड़कियों के उभार ज्यादा साफ़ दिखते हैं इसलिये विद्यालयों में जींस-टाप पर प्रतिबंध उचित हैं।&quot; इस लाइन को आप ने काफी बोल्ड अक्षरों में लिखा है लोगों को पढ़ कर ही आनंद की अनुभूति हो रही है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;इस तरह के पहनावे में लड़कियों के उभार ज्यादा साफ़ दिखते हैं इसलिये विद्यालयों में जींस-टाप पर प्रतिबंध उचित हैं।&#8221; इस लाइन को आप ने काफी बोल्ड अक्षरों में लिखा है लोगों को पढ़ कर ही आनंद की अनुभूति हो रही है.</p>
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		<title>By: सागर नाहर</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40848</link>
		<dc:creator>सागर नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2009 14:53:47 +0000</pubDate>
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		<description>मजेदार पोस्ट..
कन्या का फोटो को देखकर सिंघल साब भी मन ही मन पछताते होंगे कि क्यों ड्रेस कोड की वकालात की। 
:)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मजेदार पोस्ट..<br />
कन्या का फोटो को देखकर सिंघल साब भी मन ही मन पछताते होंगे कि क्यों ड्रेस कोड की वकालात की।<br />
 <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: RAJ SINH</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40808</link>
		<dc:creator>RAJ SINH</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2009 23:53:05 +0000</pubDate>
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		<description>आनंद ही आनंद ज्ञान ही ज्ञान .लेख और टिप्पणियां सभी में चेतना झलकती है .
अब क्या पहने क्या नहीं , पहनने वाले / वाली पे छोडा जाये .उसे भी &#039;अभिव्यक्ति &#039; की आजादी क्यों न मान लें .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आनंद ही आनंद ज्ञान ही ज्ञान .लेख और टिप्पणियां सभी में चेतना झलकती है .<br />
अब क्या पहने क्या नहीं , पहनने वाले / वाली पे छोडा जाये .उसे भी &#8216;अभिव्यक्ति &#8216; की आजादी क्यों न मान लें .</p>
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		<title>By: venus kesari</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40805</link>
		<dc:creator>venus kesari</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2009 19:42:02 +0000</pubDate>
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		<description>लिखने को मौजे बाहारा है 
हम ये देख के हैरां हैं :)

वीनस केसरी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लिखने को मौजे बाहारा है<br />
हम ये देख के हैरां हैं <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>वीनस केसरी</p>
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	<item>
		<title>By: Abhishek</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40788</link>
		<dc:creator>Abhishek</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2009 06:17:47 +0000</pubDate>
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		<description>आपका ब्लॉग और आपकी बातें दोनों अच्छी लगी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपका ब्लॉग और आपकी बातें दोनों अच्छी लगी.</p>
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		<title>By: K M Mishra</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40699</link>
		<dc:creator>K M Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2009 11:05:47 +0000</pubDate>
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		<description>अनुप जी राग दरबारी  भाग-2 लिखने का प्रयास किया है । जरा पढ कर बतायें कि नमक मिर्च, मसाला ठीक मिक्स किया है कि नहीं आपके अनुज ने । 


वैसे फोटो लगता है उसी कन्या की लगाई है जिनका दुपट्टा चोरी चला गया था और शिव कुमार मिश्र जी ने बड़े विस्तार से उस कन्या के दुख का वर्णन किया है अपनी पोस्ट में ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनुप जी राग दरबारी  भाग-2 लिखने का प्रयास किया है । जरा पढ कर बतायें कि नमक मिर्च, मसाला ठीक मिक्स किया है कि नहीं आपके अनुज ने । </p>
<p>वैसे फोटो लगता है उसी कन्या की लगाई है जिनका दुपट्टा चोरी चला गया था और शिव कुमार मिश्र जी ने बड़े विस्तार से उस कन्या के दुख का वर्णन किया है अपनी पोस्ट में ।</p>
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		<title>By: amit</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40675</link>
		<dc:creator>amit</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2009 14:03:49 +0000</pubDate>
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		<description>ड्रेस कोड बेकार की ही चीज़ है, स्कूल तक ठीक है कि बच्चे छोटे और नादान होते हैं। और ड्रेस कोड की वकालत करने वालों का यह तर्क, कि गरीब में अमीर के कपड़े देख हीन भावना आएगी, बिलकुल बकवास ही है, कम से कम कॉलेज के छात्रों पर नहीं लागू होना चाहिए। सिर्फ़ कपड़े एक से होने के कारण क्या गरीब अमीर का अंतर छुप जाएगा, गरीब छात्र को दूसरे के बारे में पता न होगा कि वह अमीर है कि नहीं! हीन भावना आनी है तो वैसे भी आ जाएगी, कपड़े सांतवना न देंगे हीन भावना से ग्रसित छात्र को। रही बात रूढ़ी वादी लोगों की जो वाहियात तर्क देते हैं कि लड़कियों के उभार दिखते हैं तो वे क्या चाहते हैं? क्या सलवार-कमीज़ में उभार नहीं दिखते? या साड़ी ब्लाउज़ में नहीं दिखते? ऐसे लोगों से अक्ल की बात करना ही अपना सिर दीवार में मारना है जी!

बाकी क्या कहें, विचारों और उनकी फ्लाईट के बारे में तो आप लिख ही दिए हैं अच्छा खासा, अपने पास कहने को फिलहाल कुछ बाकी नहीं! ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ड्रेस कोड बेकार की ही चीज़ है, स्कूल तक ठीक है कि बच्चे छोटे और नादान होते हैं। और ड्रेस कोड की वकालत करने वालों का यह तर्क, कि गरीब में अमीर के कपड़े देख हीन भावना आएगी, बिलकुल बकवास ही है, कम से कम कॉलेज के छात्रों पर नहीं लागू होना चाहिए। सिर्फ़ कपड़े एक से होने के कारण क्या गरीब अमीर का अंतर छुप जाएगा, गरीब छात्र को दूसरे के बारे में पता न होगा कि वह अमीर है कि नहीं! हीन भावना आनी है तो वैसे भी आ जाएगी, कपड़े सांतवना न देंगे हीन भावना से ग्रसित छात्र को। रही बात रूढ़ी वादी लोगों की जो वाहियात तर्क देते हैं कि लड़कियों के उभार दिखते हैं तो वे क्या चाहते हैं? क्या सलवार-कमीज़ में उभार नहीं दिखते? या साड़ी ब्लाउज़ में नहीं दिखते? ऐसे लोगों से अक्ल की बात करना ही अपना सिर दीवार में मारना है जी!</p>
<p>बाकी क्या कहें, विचारों और उनकी फ्लाईट के बारे में तो आप लिख ही दिए हैं अच्छा खासा, अपने पास कहने को फिलहाल कुछ बाकी नहीं! <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: काशिफ आरिफ</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40656</link>
		<dc:creator>काशिफ आरिफ</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2009 15:54:25 +0000</pubDate>
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		<description>मैं आपकी बात से सहमत हुं ड्रेस कोड दोनो के लिये होना चाहिये। आगरा के सेण्ट जौंस कालेज मे जब हम पढते थे तो ड्रेस कोड नही थ लेकिन हमारा आखिरी साल पुरा होते ही वहां ड्रेस कोड लागु हो गया जो दोनो के लिये था।

एक बात मैं कहना चाहुंगा की अगर ड्रेस कोड ना हो तो अश्लिलता की ज़द मे आने वाले कपडे लडकियां ही पहनती हैं पता नही अपना ज़िस्म दिखाने मे उन्हे क्या मज़ा आता है?

लेकिन जब दिखते ज़िस्म को गौर से देखो तो छोटे कपडें को खिचं कर बडा करने की कोशिश करती है ऐसा क्यौं? जब शर्म आती है तो ऐसा कपडा पहनते ही क्यौं हो?

मेरे इस सवाल का जवाब आज तक नही मिला. जितने प्राईवेट बिज़नेस कालेज है उनमें से ज़्यादातर मे ड्रेस कोड है क्यौंकी इससे सब एक समान दिखते है। आपको नही लगता की जब लडकी को जीन्स पहनने की इजाज़त दी जाती तो उसकी जीन्स कमर से काफ़ी नीचे कुल्हे के काफ़ी करीब आ जाती है और काफ़ी चुस्त हो जाती है इस हालत मे लडकी ने जीन्स के अन्दर क्या पहना है, उसका शेप क्या है? उसका बान्र्ड क्या है? रंग क्या है? और वो कहां से शुरु हो कर कहां खत्म हो रही है?

टाप ऐसा होता है जिसमे से पुरी कमर दिखती है, और अकसर इतना महीन होता है अन्दर पहने हुऎ वस्त्र का रंग भी दिखता है और ये भी दिखता है की कौन से हुक मे ये लगा हुआ है।

अब आप बताये इस लिबास को आप शालीन कहेंगे</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं आपकी बात से सहमत हुं ड्रेस कोड दोनो के लिये होना चाहिये। आगरा के सेण्ट जौंस कालेज मे जब हम पढते थे तो ड्रेस कोड नही थ लेकिन हमारा आखिरी साल पुरा होते ही वहां ड्रेस कोड लागु हो गया जो दोनो के लिये था।</p>
<p>एक बात मैं कहना चाहुंगा की अगर ड्रेस कोड ना हो तो अश्लिलता की ज़द मे आने वाले कपडे लडकियां ही पहनती हैं पता नही अपना ज़िस्म दिखाने मे उन्हे क्या मज़ा आता है?</p>
<p>लेकिन जब दिखते ज़िस्म को गौर से देखो तो छोटे कपडें को खिचं कर बडा करने की कोशिश करती है ऐसा क्यौं? जब शर्म आती है तो ऐसा कपडा पहनते ही क्यौं हो?</p>
<p>मेरे इस सवाल का जवाब आज तक नही मिला. जितने प्राईवेट बिज़नेस कालेज है उनमें से ज़्यादातर मे ड्रेस कोड है क्यौंकी इससे सब एक समान दिखते है। आपको नही लगता की जब लडकी को जीन्स पहनने की इजाज़त दी जाती तो उसकी जीन्स कमर से काफ़ी नीचे कुल्हे के काफ़ी करीब आ जाती है और काफ़ी चुस्त हो जाती है इस हालत मे लडकी ने जीन्स के अन्दर क्या पहना है, उसका शेप क्या है? उसका बान्र्ड क्या है? रंग क्या है? और वो कहां से शुरु हो कर कहां खत्म हो रही है?</p>
<p>टाप ऐसा होता है जिसमे से पुरी कमर दिखती है, और अकसर इतना महीन होता है अन्दर पहने हुऎ वस्त्र का रंग भी दिखता है और ये भी दिखता है की कौन से हुक मे ये लगा हुआ है।</p>
<p>अब आप बताये इस लिबास को आप शालीन कहेंगे</p>
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	<item>
		<title>By: क</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/653/comment-page-1#comment-40655</link>
		<dc:creator>क</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2009 15:43:16 +0000</pubDate>
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		<description>मैं आपकी बात से सहमत हुं ड्रेस कोड दोनो के लिये होना चाहिये। आगरा के सेण्ट जौंस कालेज मे जब हम पढते थे तो ड्रेस कोड नही थ लेकिन हमारा आखिरी साल पुरा होते ही वहां ड्रेस कोड लागु हो गया जो दोनो के लिये था।

एक बात मैं कहना चाहुंगा की अगर ड्रेस कोड ना हो तो अश्लिलता की ज़द मे आने वाले कपडे लडकियां ही पहनती हैं पता नही अपना ज़िस्म दिखाने मे उन्हे क्या मज़ा आता है?

लेकिन जब दिखते ज़िस्म को गौर से देखो तो छोटे कपडें को खिचं कर बडा करने की कोशिश करती है ऐसा क्यौं? जब शर्म आती है तो ऐसा कपडा पहनते ही क्यौं हो?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं आपकी बात से सहमत हुं ड्रेस कोड दोनो के लिये होना चाहिये। आगरा के सेण्ट जौंस कालेज मे जब हम पढते थे तो ड्रेस कोड नही थ लेकिन हमारा आखिरी साल पुरा होते ही वहां ड्रेस कोड लागु हो गया जो दोनो के लिये था।</p>
<p>एक बात मैं कहना चाहुंगा की अगर ड्रेस कोड ना हो तो अश्लिलता की ज़द मे आने वाले कपडे लडकियां ही पहनती हैं पता नही अपना ज़िस्म दिखाने मे उन्हे क्या मज़ा आता है?</p>
<p>लेकिन जब दिखते ज़िस्म को गौर से देखो तो छोटे कपडें को खिचं कर बडा करने की कोशिश करती है ऐसा क्यौं? जब शर्म आती है तो ऐसा कपडा पहनते ही क्यौं हो?</p>
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