फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

27 responses to “सुनि प्राब्लम चेलाराज की , गुरुवर भये फ़ौरन ही हलकान”

  1. दिनेशराय द्विवेदी

    गुरूजनों को सुंदर उपहार है!

  2. संजय बेंगाणी

    अंत में ई तो लिखे ही नहीं. अथ श्री गुरूदेव की जै…..

  3. कुश

    हम तो सोच रहे है.. कि आप ही को अपना गुरु बना ले.. क्योंकि जो ज्ञान आपने दिया है वो कोई और तो क्या देगा..

  4. nirmla.kapila

    वाह जी बहुत बडिया दोहे हैं और शिक्षकों के बारे मे भी अच्छी कही जब अनपढ ठेकेदार शिक्षकों की भरती करने लगे तो गुणवत्ता की आशा क्यों आभार्

  5. Shiv Kumar Mishra

    मेरा तो मानना है कि बड़ी धाँसू पोस्ट लिक्खे हैं. (लिक्खे?) कोई बात नहीं आजकल इस्पेलिंग मिस्टिक का नम्बर नहीं कटता. दोहा-वोहा, चौपाई वगैरह सब धाँसू.

  6. विवेक सिंह

    अब तक मेरे जितने गुरु हुए वे सब जहाँ भी हों मेरा उन्हें प्रणाम पहुँचे!

  7. Anonymous

    खालीपन-सा छा गया, पढ़के ब्लॉग तुम्हार
    हिन्दुस्तानी मास्टरी की लीला अपरम्पार

  8. dr anurag

    लो जी …..अब दिन चढा नहीं .नर्सरी के बच्चे गुलाब के फूल लेकर स्कूल पहुचे नहीं ….की आपने अपनी पोस्ट ब्रॉड कास्ट भी कर दी…..इधर आप भी बहुत सेंटी मेंटल हो रहे है शुकल जी….जानते है कितना अवैज्ञानिक है सेंटी मेंटल होना …..कितना इलोजिकल .दोपहर तक इंतजार करते तो दोहो से अलग कुछ एडिशनल डाइलोग का क्रेडिट ले लेते …स्क्रिप्ट की पेचीदा सादगी .कसम से मटुकनाथ को कंफ्युस कर देती है .हम तो जी न तो स्कूल की दरजी से सेटिंग का कुछ बोलेगे ना किताबो कोपियो के एकमात्र मिलने के स्थान पर ….यूँ हफ्ते भर झुर्रिया हटवाने कई गुरुवाइन हमारे यहाँ आती है पर बोटोक्स के चार्ज सुनकर वापस नहीं आती .फेयर एंड लवली से काम चला लेती है .कोई भूल चुक हो तो तनिक मुआफ कीजिये वैसे भी
    अब स्कूलों में इस्पेलिंग पर नम्बर नहीं कटते

  9. dhiru singh

    jay ho sab guruo ki jay ho
    चेले बहुत पढ़ा लिये अब चेली भी लाओ साथ,
    मटुकनाथ सुनि चहक गये, थामा शिष्या(जूली) का हाथ

  10. neeraj1950

    हे कलयुग के तुलसीदास…हे गुरु घंटाल…आपको शत शत नमन….क्या पोस्ट लिखी है…झकास…
    नीरज

  11. वन्दना अवस्थी दुबे

    गज़ब दोहे, अजब गुरु दास्तान. सच है शिक्षा भी तो अब केवल व्यवसाय ही हो गयी है.
    लेकिन सच्ची और मनोरन्जक पोस्ट. नीरज जी ने तो आपको तुलसीदास की उपमा दे ही दी है, तो क्यों न एक आधुनिक रामायण भी छपवा ही लें? शानदार पोस्ट. सभी गुरुओं को पढाने लायक.

  12. रंजना

    आपके आलेख पर टिपण्णी करना बड़ा ही मुश्किल हुआ करता है…पढने के बाद मन में जो विचारों की जो रेलम पेल मचती है,उसमे से सटीक शब्दों को खोजना बड़ा ही दुष्कर कार्य हो जाया करती है….

    सो टोटल एक ही शब्द अभी कह सकती हूँ……शानदार !!!

  13. Abhishek

    ये दो साल पहले वाले दोहे तो छा गए. मजा आ गया जी सही में. आपको तो टीचर होना चाहिए.

  14. Arkjesh

    हम तो केवल सुनी सुनाई बात कहते हैं |
    गुरूजी कि जय हो !:)

  15. shefali pande

    आप भी ?

  16. समीर लाल

    वाअह!! जे भई गुरुवाणी..

    सुनि प्राब्लम चेलाराज की , गुरुवर भये फ़ौरन ही हलकान।
    दूध मंगाया पाव भर, पिया बिद चम्मच भर कम्प्लान॥

    -कम्पलान बड़ा जोर दिखा गया कि बस पूछो मति, कितना आनन्द आ गया. जय हो!!

    टूसन फीस क्या धरे हैं?? हमे ज्वाइन करना है. :)

  17. venus kesari

    guruvar pranaam mauj lene ke maamle me to aap hamaare guru hain

    chele ko bhee kuch zyaan deejiye guru ji

    venus kesari

  18. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    गुरु गृह गये पढ़न रघुराई। पाछे लछिमन गुड़ गठियाई।
    बिन असिस्टेण्ट और बिना सीधा-पिसान के क्या पढाई?

  19. hempandey

    अनेक ब्लोगर बन्धु पेशे से गुरु हैं. उनकी भावनाओं का तो ध्यान रखा होता.

  20. mahendr mshra

    अब तो मटुक नाथ जैसे गुरुओ का बोलबाला है . ……. बहुत ही रोचक आलेख प्रस्तुति . आभार

  21. c4Blog


    हम अईसेहि आपको गुरु थोड़े ही बनाये हैं !
    गुरु-दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
    ( देर से सही )

  22. दरभंगिया

    मुझे भी शर्म आती है जब मैं अपने बच्चों के लिये सब्से सस्ता स्कूल ढूंढता हूँ. अब हम तो देते नहीं वे जुगारने लगे तो गड़ियावल जायें.

    गुरुजी तो फटेली धोती में ही फबते हैं.

  23. Arvind Chaturvedi अरविन्द चतुर्वेदी

    सुना हो पंडित जी, पूरा का पूरा गुरु पुराण वांच लिये हैं. ऐकै सांस मां.
    कहे क पड़ी ,’ गुरु जी वही ,जो पंडित जी दिलवांय” .

    ई जौन कलियुगी ‘गुरु पचासा’ है , ओके लिये आप तो ‘नो बल’ पुरुस्कार के पात्र हैं.

    झाड़ै रहो….

  24. bhootnath

    age baap ge…..kyaa khoob likha hai….ham kahen bhi to kyaa kahen…..acchha…badhiyaa…. sundar…..aur kyaa….!!

  25. dil ek purana sa museum hai

    वाह शानदार दोहे
    मजा आ गया पढ़ कर

  26. Rashmi Swaroop

    हम तो T’chers day को सुबह सुबह बढिया से तैयार होकर कोलेज गये थे… लगे हाथ कुछ गुलाब भी ले गये थे और गुरुजनो का आशिर्वाद भी ले आये थे… “खुश रहो… बढ़ती रहो… पढ़ती रहो… ” बस निहाल हो गये।
    “हो चुकी एमएससी, अब क्यों ये सब ?” मुझसे मेरी एक जूनियर ने पूछा।
    “अभी पीएचडी तो यहीं से करनी है… ” मैने कह दिया… उस छोटी सोच वाली प्राणी को भला कैसे समझाती कि जब मै टीचर्स के पैरो में झुकी और उन्होंने मेरे सर पे हाथ रख के जो अमुल्य शब्द कहे वो मेरे लिये सफ़लता के रहस्यमयी फ़ोर्मुले के महत्वपूर्ण तत्व हैं।

    आपका ये लाजवाब गुरुपुराण हमने भी एक ही सांस में पढ़ डाला… मज़ा आ गया… सच में!
    Thank you. :)

  27. anitakumar

    गुरुवर इन दोहों पे तो आप के पांव छू लेने का मन करता है। जय हो फ़ुरसतिया महाराज की। टीचर हो कर भी जय कर रही हूँ……:)

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