कल समीरलालजी नेट पर मिले। बोले -भाई साहब हम आपसे बात नहीं करेंगे। आपसे नाराज हैं आप आजकल हमसे मौज नहीं लेते। यह कहते हुये वे बहुत देर तक बात करते रहे।
हमने कहा ऐसा क्या हुआ जो आप बात न करते हुये हमारा घंटा खराब कर दिये। वो बोले आजकल आप हमसे मौज नहीं लेते। कित्ता खराब लगता है मुझे।
हमने कहा भाई मौज लेने का टाइम तो होना चाहिये। जिसको देखो वो कहता है हमसे मौज लो, हमसे मौज लो! कहां से लें इत्ती मौज! टाइमिच नहीं!
वो बोले -आप देखिये टालिये मती हमको। हम आपका इत्ता ख्याल रखते हैं। और किसी के ब्लाग पर हम चाहे जिससे कमेंट करवायें लेकिन आपके ब्लाग पर टिप्पणी लिखने/लिखवाने के बाद सेन्ड का बटन हमी दबाते हैं। ये देखिये निशान पड़ गये हैं। सुकोमल तर्जनी में। ये छिगुनिया केवल आपके ब्लाग पर टिपियाती है। और किसी के ब्लाग की तरफ़ नाखून उठा के भी नहीं देखती। पक्की ब्लागव्रता है।
हमने कहा -सो स्वीट। सो क्यूट।
वो बोले-भाई साहब , ऊ सब मत कहिये। ऊ तो जब से अरविन्द मिश्र ने बताया है तबसे हम अपनी हरेक महिला मित्र से पूछ चुके हैं कि क्या आपने ही मेरे लिये क्यूट कहा था। सबने बेरुखी से मना कर दिया और न जाने कैसी-कैसी नजरों से मुझे देखा। मन तो किया लाज से दोहरे हो जायें लेकिन नहीं हुये। हो जाते तो फ़िर उनको देखते कैसे। मन को मना कर दिये। अभी ये लाज कहीं और धर दो गोडाउन में। समय आने पर धारण करेंगे। कोई एक्स्पायर थोड़ी हो जा रही है।
बहरहाल समीरजी के आग्रह पर हमने कहा-कि ले लेंगे मौज भी। मौज कहीं भागी थोड़ी जा रही है हमको छोड़कर। हमको छोड़कर जायेगी भी किधर?
लेकिन समीरजी ने अनुरोध किया कि नहीं भाई साहब आप अब देर मत करिये। पानी सर से ऊपर गुजर चुका है। लोग न जाने कैसी-कैसी बातें करने लगे हैं। सुनने में अच्छा तो लगता है लेकिन शरम भी आती है बताते हुये। संस्कार पीछा नहीं छोड़ते न!
मन तो किया कि कहें कि वाह गुरु! नये कानून के बाद संस्कार भी पीछे लग लिये। बड़ा गड़बड़झाला है!
लेकिन नहीं कहे। फ़िर तय हुआ कि समीरलालजी अपने बारे में एक कोई कविता लिखेंगे जो सबके बारे में होगी। लेकिन ऐसे लिखेंगे कि वो लगे कि उनके बारे में ही लिखी है। वो कविता हमको भेजेंगे फ़िर हम उसमें जरूरी गड़बड़ी करके अपने ब्लाग पर पोस्ट करेंगे। गड़बड़ी इसलिये कि अगर मात्रा /तुक वगैरह की गड़बड़ी न हुई तो लोग मानते नहीं कि हमने ही लिखी है।
तो देखिये ये कविता समीरलालजी ने मुझे भेजी थी। इसे इधर-उधर थोड़ा बहुत गड़बड़ा के हमने यहां पेश कर दिया है!
ब्लाग की लाज बचाना बेटा।
काम भले न कोई करना
ब्लाग को न बिसराना बेटा।
खान-पान तो होते ही हैं
पहले पोस्ट चढ़ाना बेटा।
सुबह उठो तो ब्लाग को ताको
सोते में भी गले लगाना बेटा।
कूड़ा देखो या करकट देखो
अपने ब्लाग पर ले आना बेटा।
ब्लाग जहां कोई सूना देखो
झट से तुम टिपियाना बेटा।
समझ न आये बातें यदि तो
वाह वा,सुन्दर कह आना बेटा।
न पड़ना लफ़ड़े में काहू के
बस अपनी जान बचाना बेटा।
लाला-लड़ाई में बैर पुराना
इसको न बिसराना बेटा।
पढ़ना पोस्ट दौड़ते-भागते
पढ़ लिये कह भग आना बेटा।
एक टिप्पणी यदि कोई देवे
उसको दस दे आना बेटा।
कोई तुम्हे यदि अच्छा बोले
शर्मा के खूब लजाना बेटा।
कोई तुम्हें यदि छेड़े-छाड़े
झट टंकी पर चढ़ जाना बेटा।
गला खराब है तबियत ढीली
कह गाना हचक के गाना बेटा।
पर अपना गाना कभी न सुनना
पहले रूई कान में सटाना बेटा।
क्यूट कहेंगे दुनिया वाले
लेकिन मत घबराना बेटा।
स्वीट कहेंगे मिर्ची लगती जिनको
उससे भी न भरमाना बेटा।
जहां अकड़ना बहुत जरूरी
विनम्रता से झुक जाना बेटा।
जाता है सब तो जाने देना
बस अपना ब्लाग बचाना बेटा।
फ़ुरसतिया मौज अगर लेता है,
बस धीरे से मुस्काना बेटा।
ऊपर की फ़ोटॊ समीरलालजी की सबसे अच्छी फोटुओं में से एक लगती है। इसे मैंने अमित के ब्लाग से लिया। साभार। अमित के ब्लाग पर ब्लाग जगत की सबसे बेहतरीन फोटो हैं! और इस कविता के बारे में भी बाद में पता चला कि समीरलाल ने इसी की नकल मार के कालजयी कविता लिख मारी।
शशि सिंह जन्मदिन मुबारक
आज शशि का जन्मदिन है। आज ही दिन पिछले साल भी था। इस बीच शशि एक बिटिया के पिता भी बने। बाकी तो गुजारे दिन बस। ब्लाग जगत से वे जानवर विशेष के अंग विशेष की तरह गायब रहे। महान आत्माओं की तरह लिखेंगे है नहीं और बयान जारी करेंगे भाईजी- क्वॉलिटी कंटेंट का अभाव है ब्लागिंग में !
शशि के पिछले जन्मदिन के किस्से यहां बांचें!
शशि सिंह को जन्मदिन मुबारक!







सही मौज ली है, लेकिन अभी भी मौजियल कंटेन्ट का अभाव दिख्खे है मने, तुमने समीर लाल की साइज के साथ इंसाफ़ नही किया। समीर लाल फिर बुरा मान जाएंगे।
शशि भाई को जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक, पिछले साल तो ये कुछ ’विशेष’ कार्य करने मे बिजी थे, इसलिए ब्लॉगिंग को समय नही दे सके, अब तो लौट आओ, जनसंख्या वृद्दि छोड़कर ब्लॉगिंग पर ध्यान दो बालक!
बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं,
आदमी हूं, आदमी से (?)प्यार करता हूं…
कानून के बाद तो संस्कारो को पीछे नही पड़ना चाहिये।शशि जी को जन्म दिवस की शुभकामनाएँ ।
बहूत खूब जी आप दोनो तो गजब के मौजी हो
मज़े से दोनों ने मौज ले ही ली फिर पूछते हैं कि मौज कहां। बहुत प्यारी बातें शेयर करने के लिए आभार।
और शशि भाई को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
आ हा हा आनन्द आ गया. क्या छरहरी कविता है…..समीरलालजी को गुदगुदा गई होगी.
आग्रह रख लिया करें..
अब आप मौज नहीं लोगे तो अगला “कुट्टी” ही होगा ना…..
बेटी के बप को जन्मदिन मुबारक!
अब समीर जी की शिकायत ज़रूर दूर हो गई होगी………….
ये तो दबाव डालकर लिवाई गयी मौज है. कभी अपने मन से लीजिये तो और भी रंग जमे.
शशि सिंह जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ. इनकी लिखाई फ़िर से कब शुरु होगी?
कहाँ से आपके दिमाग में इतना बात फुरता है हमको तो यही समझ में नहीं आता है… मज़ाक-मज़ाक में ब्लॉग को जितना आप सीरियसली लेते है उतना शायद ही कोई लेता होगा… वाह!
धीरे से मुस्किया के समान सरिया रहे हैं.. कहां-कहां इतने, पता नहीं कितने कमेंट न छोड़-छोड़ के उंगलियां पिरा गईं, तो उन उंगलियों को दुलरवाने अब ससि सिंग के हियां जा रहे हैं.. हलांकि संगे ये सोच भी रहे हैं कि पता नहीं कैसे-कैसे तो आप लो ब्लॉग की लाज बचा रहे हैं? आंच जला रहे हैं?
अनूप समीर की जुगल-बंदी तो बढ़िया जमी. जुगलबंदियों की जुगत जारी रहे!!!
बहुत ही जोरदार कविता लिखी है । मजा आ गया पढकर । गीत के बोल बदल गये हैं धुन वही है ।
एकदम असल पैरोडी है ।
समीर जी की टिप्पणी और आपकी मौज
कहां तक पुजे
जब दिमान्ड कर रही है पूरी ब्लॉगर फ़ौज ।
ऐसी बवालजयी कविता! वाह!
ब्लॉग-मौज का कॉपीराइट्स रजिस्टर करवा लीजिये.नहीं तो लोग तरही मौज लेने लगेंगे….:-)
शशि जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं.
.सुबह सुबह ….ये एनाल्जेसिक का साइड इफेक्ट है बीडू …या आप फिर सच्ची सुबह सुबह ब्लॉग की ड्यूटी पे है …ये तो कुछ आपसी सेटिंग का मामला नजर आता है …पुराने दोस्तों को याद करना कोई आपसे सीखे …
समझ न आये बातें यदि तो
वाह वा,सुन्दर कह आना बेटा।
लीजिये हमने भी कह दिया…..
वाह वाह, सुंदर…….
मौजा ही मौजा
इ तो सरासर पक्षपात है…..इंस्पिरेशन भी आप ले लिये हो .ओर देखिये दो चार लोग सुन्दर भी कह दिए है ….हम तो सोचे थे कौनो हसीना से इंस्पायर होगे …..खैर ….
‘ब्लागव्रता ‘
yah bhi khoob hai!
-ek blog dictionary bhi banNi chaheeye ab..har roz naye shbdon ka avishkaar ho raha hai…
जाता है सब तो जाने देना
बस अपना ब्लाग बचाना बेटा।
कोई तुम्हें यदि छेड़े-छाड़े
झट टंकी पर चढ़ जाना
ha ha ha!
kavita yah bhi kaaljayee hai.sameer jiko badhaayee.
-Shashi ji ko janamddin ki dheron badhayeeyan aur nav shishu ke janam par vishesh badhaayee au shubhkamnayen.
फ़ुरसतिया मौज अगर लेता है,
बस धीरे से मुस्काना बेटा।
आपकी कविता पढ़कर तो मुस्कराहट अपने आप ही आ गयी | आज तो सही मौज ली है !
हा हा हा, बढ़िया मौज ली आप ने और कविता तो सच में कालजयी है, जीतू जी सही कह रहे है मौज थोड़ी कम हो गयी, थोड़ा और रंग मिलाना था न
मौज की मस्ती में शशी जी को जन्म दिन की शुभकामनाएं देना तो भूल ही गये, उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं
समीर भाई के फोटुवा पर जैसे ही नजर पडी लगा ………हाय राम ई त ईहाँ टाटानगर में ऊ जो जुबली पार्क में जो टाटा जी का मुर्तिया है,ठीक वैसी ही लग रही है…..स्टिल मूर्ती स्टील की…..
बढियां मौज कर लिए आपलोग दुनु लोग मिल कर……
ये ब्लॉगव्रता खूब शब्द गढ़ा है… मजा आ गया। नए कानून के बाद टेक्स्ट के कई गहन पाठ करने पड़ते हैं। मसलन अंगुली को कहा तब तो ठीक पर अगर समीरजी को कहा तो ब्लॉगवान होना था…ब्लॉगव्रता नहीं। दूसरी ओर अंगुली को कहा तब तो फूल के कुप्पा होने की कोई बात नहीं…एक ठो देह में सिर्फ हाथ की गिनें तो दस होती हैं… यानि कम से कम दस ब्लॉग के लिए ब्लॉगव्रता बने रह सकते हैं समीर।
)
बहुत अच्छी रचना. कभी हमारे ब्लॉग पर भी पधारे
आपने सीखाया तो हम फोलो करना चालु कर रहे हैं !
चाहिये।शशि जी को जन्म दिवस की शुभकामनाएँ ।
फुरसतिया की ये टैग लाइन “हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै” को अब बदल देनी चाहिये। नई लाइन कुछ होनी चाहिये “हमसे जबरिया लिखवाय… हम का करीं?”
यादाश्त बड़ी तेज है, मानना पड़ेगा! ब्लॉगिंग के पाषाण युगीन अस्थि-पंजरों को आज भी पहचान लेते हो आप
शुभकामना के लिए सभी मित्रों का धन्यवाद!
हम तो सीरियस टाइप के आदमी हैं। यह सब हंसी ठठ्ठा हमारी प्रवृत्ति का अंग नहीं। ब्लॉग में केवल सीरियस ब्राह्मणवाद चलना चाहिये। भाग्वदपुराण के स्तर का।
यह टिप्पणी तो मात्र टिप्पनिवेश के लिये है!
वाह जी वाह, मज़ा आ गया। वैसे जीतू भाई से सहमति है कि मौज की मात्रा कम लग रही है, कहीं समीर जी बुरा न मान जाएँ, ही ही ही!!
या फिर यह स्नैक की भांति परोसी गई मौज है और अभी मेन कोर्स बाकी है?
शशि भाई को जन्मदिन बहुत मुबारक और आने वाले वर्ष के लिए ढेरों शुभकामनाएँ
Wah Shashi Bhai,
Blog par rachit kavya bahut aachha hai
Dher sari BHADHAI
धाँसू फोटो ! और आगे की बातें तो हा हा हा हा !
mast … mauj hi mauj….
बहुत सही खोज खबर ली जी.:)
रामराम.
ab to pakkam pakka samir sir ki saari kahi unkahi shikayate door ho gayi hongi ?
haha !
बहुत बढ़िया कविता …बिलकुल मर्मस्पर्शी ….शब्द ही नहीं हैं ,वाह वाह ,अति सुन्दर ….
फ़ुरसतिया मौज अगर लेता है,
बस धीरे से मुस्काना बेटा।
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थोड़े को भी बहुत समझना
पूरी मौज मनाना बेटा..
जीतू, संजय भड़काते हैं
उनको तुम हड़काना बेटा.
शशि बाबू के जन्म दिन पर
बड़का केक कटवाना बेटा.
हमरा आना बहुत कठिन है
तुम सारा खा जाना बेटा.
–मस्ती में मजा लिये हो भाई. आज तक चैनल से भी तेज..उधर हमारी कविता आई और इधर उसकी कुटाई. गजबे किये हो भाई…
बहुत आनन्द आ गया.
ये फोटो से ज्यादा सुन्दर वाली और नहीं मिली का कौनो??
*
*~* शशि भाई को जन्मदिन बहुत मुबारक *~*
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इस पोस्ट को पढ़ने से पहले समीर जी की आज की पोस्ट नहीं पढ़ी थी. इसीलिये आपकी कविता का मर्म नहीं समझ सके थे. अब समझ में आया है. हमारी पिछली टिप्पणी का पूर्वाद्ध कैंसिल समझा जाए.
चलो, इस दुनिया में एक नेट तो ऎसा भी है,
जिसमें समीरभाई फँस जाते हैं, और आपकी पकड़ाई आसान हो जाती है ।
मुला, इतनी त्वरित कारवाई की ऊर्ज़ा वाया रामभजन चपरासी, नगर निगम के बाबूओं तक भी पहुँचा दिये होते, भाई जी ?
उत्तम ऎसी तैसी !
“ब्लाग जहां कोई सूना देखो
झट से तुम टिपियाना बेटा।”
लो जी, टिपिया दिये…क्यूट समीरजी की नाज़ुक तर्जनी की खातिर:)
ये हुई न चउचक मौज।
डबल कविता में बड़ा आया। कुछ हम भी जोड़ आये वहाँ।
जमाए रहिए जी…।
शानदार तस्वीर और शानदार कविता .
अमित का कैमरा और आपकी कलम दोनों गज़ब हैं .
पण जनता ठीक बोलै . मौज-मस्ती का कंटेंट/डोज़ थोड़ा कम दीखै . मतबल आपने खाली छिगुनिया से लिखा दीखै . यो ’भाग्वदपुराण के स्तर का’ ना हुया जी. ब्लाग की लाज यानी ब्लागवत्ता जी की इज्जत बची कि लुटी . फ़ाइनल जजमेंट को समचार दीजो .
समीर जी ने आपका घंटा खराब कर दिया, सुनकर( पढ़कर ) बहुत अफसोस हुआ,
गलती इन्सान से ही होती है, कोई जानबूझकर तो खराब किया न होगा,
खैर अब हो गया सो हो गया, आप अपने घंटे की मरम्मत करा लें,
जल्दी ही आपका घंटा फिर से बजेगा ऐसी आशा के साथ मैं विवेक सिंह अपनी बात यहीं रोकता हूँ,
नमस्कार !
लोग न जाने कैसी-कैसी बातें करने लगे हैं। सुनने में अच्छा तो लगता है लेकिन शरम भी आती है बताते हुये।
–हा हा!! ह्म्म!! ह्म्म!!..शरमाते हुए मुस्किया रहे हैं, दोहरे हुए.