……भये छियालिस के फ़ुरसतिया, ठेलत अपना ब्लाग जबरिया।

 हैप्पी बड्डे

पिछले हफ़्ते हम छियालिस साल के हो गये। जैसे मेहमानों के आने की खबर सुनकर खाना बनाने वाली बाई बीमार हो जाती है वैसे ही हमारा ब्लाग दो दिन पहले बैठ गया। ब्लाग को पता था कि जन्मदिन के बहाने एकाध पोस्ट ठेली जायेंगी फ़िर बधाईयां आयेंगी। सबसे घबराकर वह बैठ गया। आज जब वापस आया तो हम सोचे कि जिस बात से डर के भागा था वही काम करवाया जाये इससे पहले।

पन्द्रह की रात के बारह बजने के कुछ पहले से ही फ़ोन घनघनाने लगे। हैप्पी बड्डे और थैंक्यू वगैरह हुआ।  शुभकामनाओं का लेन-देन करके सूत गये। अगले दिन सुबह से ही फ़िर टेलीफोन आपरेटर की तरह फ़ोन फ़ान पर हैप्पी बर्थ डे बटोरने लगे। आफ़िस के लिये राजा बेटा बनकर निकले। श्रीमती जी ने नयी ड्रेस इशू की। धारण करके निकलने ही वाले थे कि यादवजी आ गये।

यादवजी हमारी बगल की ही फ़ैक्ट्री से दो-तीन साल पहले रिटायर हुये। हमारे साथ कभी काम नहीं किया। लेकिन नियमित आते हैं। बतियाते हैं। पढ़ने का शौक था कभी बहुत। अब खाली किताबें सहेजने तक सीमित हो गया है। बांगला और हिन्दी के पुराने लेखकों को काफ़ी पढ़ रखा है। बातचीत करते हुये यादवजी रह रह कर अपने अतीत में लौट जाते हैं। जैसे हम ब्लागिंग के पुराने किस्से सुनाने लगते हैं अक्सर इम्प्रेस करने के लिये:

सत्य कभी था आज सत्य ही सपना लगता है

बहुत सताता है सब कुछ पर अपना लगता है!

बहरहाल बात यादवजी की कर रहे थे। तो उस दिन यादवजी सुबह-सुबह सवा आठ बजे जलेबी-दही लेकर हमारे यहां आये। पता चला कि आसपास की दुकाने बन्द थीं तो दूर की दुकान से लाये थे। सुबह-सुबह बेचारे हमारे कारण हलकान हो गये।

यादवजी हमारे घर के हर सदस्य के जन्मदिन नोट किये हैं! हरेक जन्मदिन पर बेनागा आते हैं और उपहार या मिठाई लाते हैं। कई बार मना किया लेकिन यादवजी हैं कि मानते नहीं। आजकल वे अपनी खाने वाली सबसे पसंदीदा चीजें एक-एक कर छोड़ते जा रहे हैं। यह सोचकर कि आगे बन के न मिलेगी तब कष्ट होगा।

दफ़्तर में चौड़े होकर बैठे रहे काफ़ी देर। चाय-साय पी गयी। मोबाइल संदेश का जो आदान हुआ था उनका प्रदान किया गया फ़िर हम अपनी शाप में मौका मुआयना करने निकले। पता चला अगले दिन विश्वकर्मापूजा के लिये सेक्सन साफ़ हो रहा था। हम सब लोगों से मिलमिलाकर चले आये। सबकी शुभकामनायें बटोर के चुप्पे से चले आये। एक दिन पहले जिसका जन्मदिन था उससे पूछे कि जन्मदिन उसने कैसे मनाया। उसका किस्सा भी सुनते चलें।

कुछ दिन पहले से अपने शाप में लोगों से मिलने-जुलने की मंशा से मैंने सबके जन्मदिन नोट किये और उनके जन्मदिन पर उनके पास जाकर बधाई देना शुरू किया। इसी बहाने उसके घर परिवार , रुचि, लगाव, परेशानी और अन्य गुणों की भी जानकारी हो जाती है। मैंने पाया कि लोगों ने इसे बहुत अच्छा कदम माना और हम फ़्री फ़न्ड में एक लोगों का ख्याल रखने वाले आत्मीय अधिकारी के रूप में जाने जाने लगे। कई लोगों को ताज्जुब हुआ कि उनके जन्मदिन के बारे में मुझे कैसे पता! लोगों को पहली बार इस तरह की बात सुखद आश्चर्य ही लगी।

तो एक दिन पहले जिसका जन्मदिन था जब मैंने उसको जन्मदिन की बधाई दी उसने कहा आज तो मेरा जन्मदिन नहीं है! मैंने कहा कब है? उसने बताया 15.09.72 को। हमने आज क्या तारीख है? उसने बताया- 15 सितम्बर! फ़िर उसने हंसते /झेंपते हुये बधाई स्वीकार की। बहरहाल!

दिन ऐसे ही शाम तक बधाई बीनते बटोरते बीता। शाम को केक काटा गया और अम्मा ने जो बनाये थे वो गुगगुले खाये गये। उपहार घर वाले देने पर अड़े थे एक नया मोबाइल! लेकिन हम न लेने पर अड़ गये। मितव्ययिता और समझदारी हमारे ऊपर जमकर सवार थीं। समझदारी इसलिये कि हमें पक्का पता था कि ये मोबाइल आये भले हमारे पैसे से लेकिन इसका इस्तेमाल वही ताकतें करेंगी जो इसे खरीदवाने के लिये बेताब हैं। हमारे भाग्य में अंतत: उन ताकतों का पुराना मोबाइल ही आना है। इसलिये हमने दृढ़ता पूर्वक इस आत्मीय साजिश को फ़ेल कर दिया ! :)

जहां तक ब्लागिंग से सबंधित बाते हैं तो हमने पिछले वर्ष लिखा था

अगर मुझे सही अन्दाजा है तो ब्लाग जगत में मेरी इमेज एक खिलन्दड़े, मौजिया और मेहनती ब्लागर की है। लोगों की खिंचाई भी करते रहने वालों में नाम है। कुछ लोग मुझे स्त्रीविरोधी और मठाधीश ब्लागर भी मानते हैं। इसके अलावा और भी इमेजें होंगी लेकिन उनके मुझे उनके बारे में अच्छी तरह पता नहीं। या पता भी होगा तो उसके बारे में हम बताना नहीं चाहते होंगे। हम भी कम काइयां नहीं हैं जी! :)

इनमें से मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी इमेज से पीछा छुड़ाया हो! मौज लेने की हमारी आदत के चलते तो ब्लाग जगत में जलजला ही आ गया। इसके अलावा पक्षपाती और षड़यंत्रकारी की उपाधि अलहदा मिलीं। कुल मिलाकर उपाधियों में निरन्तर इजाफ़ा ही हुआ है।

पिछले वर्ष हमने कुछ काम करने का मन बनाया था। उनकी प्रगति आख्या निम्नवत है।

क्रम संख्या

सोचा गया काम

कार्य संबंधी प्रगति

१. ब्लाग लिखना बंद करने की घोषणा। हम इस योजना पर अमल नहीं कर पाये। यह रास्ता इत्ता आम हो गया कि हमें वो वाले शेर ने रोक लिया
अपने तआर्र्रुफ़ के लिये इतना काफ़ी है। हम उस रास्ते नहीं जाते जो आम हो जाये। आजकल तो लोग दो-पोस्ट लिखकर लिखना छोड़ देते हैं और कोई रोकता नहीं। हमें लगा कि अब ब्लाग लिखना बंद करने में वो मजा नहीं रहा। उलटे कहो लोग कहें हां हां भाई अच्छा किया। घर,दफ़्तर,सेहत और बच्चों का ख्याल रो रखना ही चाहिये। ब्लागिंग फ़ालतू की चीज है।
२. सबके प्यार और अनुरोध पर वापस आने की घोषणा। जब पहली बात नहीं हुई तो ये वाली होने का सवाल ही नहीं उठता।
३. किसी का दिल दुखाने वाली पोस्ट न लिखना। जानबूझकर मैंने ऐसा नहीं किया। अब अगर मेरे कुछ भी लिखने से किसी का दिल दुखा हो तो नहीं कह सकते।
४. बड़े-बुजुर्गों (ज्ञानजी, समीरलाल,शास्त्रीजी आदि-इत्यादि) से अतिशय मौज लेने से परहेज करना। यथासम्भव मैंने ऐसा नहीं किया। एकाध बार हो गया है तो अब उसमें और कमी लाने के बारे में सोचा जायेगा।
५. नारी ब्लागरों की पोस्टों को खिलन्दड़े अन्दाज से देखने से परहेज करना। इसमें तो पक्का सफ़ल रहे। देखा भी कोई कमेंट न करने के कारण अन्दर की बात अन्दर ही रह गयी।
६. नये ब्लागरों का केवल उत्साह बढ़ाना, उनसे मौज लेने से परहेज करना। उत्साह उत्ता नहीं बढ़ा पाये लेकिन मौज-परहेज बना रहा। एकाध  बार छोड़ कर!
७. किसी आरोप का मुंह तोड़ जबाब देने से बचना। इस दिशा में मैंने यथा सम्भव प्रयास किये। सवालों के जबाब भले दिये लेकिन आरोपों के जबाब ही नहीं दिये, मुंह तोड़ तो दूर की बात। लेकिन अब जब किसी का मुंह पहले से ही टेढ़ा हो और टूटा भी तो उसके लिये हम क्या करें। कई बार तो जबाब उछल कर की बोर्ड के ऊपर आये भी लेकिन हमने उनको बरज कर अन्दर कर दिया।
८. अपने आपको ब्लाग जगत का अनुभवी/तीसमारखां ब्लागर बताने वाली पोस्टें लिखने से परहेज करना। ऐसी पोस्टें अपनी समझ में कम लिखीं। अगर कोई दिखायेगा तो उसके लिये हम मुनव्वर राना का ये वाला शेर याद कर लिये हैं:”मियां मैं शेर हूँ शेरों कि गुर्राहट नहीं जाती,
लहजा नर्म भी कर लूं तो झुंझलाहट नहीं जाती”।

कोई साथी इसका अपने हिसाब से मतलब निकालकर यह समझने का काम अपने रिस्क पर करे कि हम अपने को शेर कह रहे हैं। हमारी समझ में तो शेर विटामिन की गोली की तरह होते हैं। जो भावना कम होती है उसको उसी भावना के शेर से पूरा करते हैं!  जैसे हम चूहा दिल हैं और बात-बात पर सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है तो हम बात-बेबात ये वाला शेर पढ़ते रहेंगे।

९. अपने लेखन से लोगों को चमत्कृत कर देने की मासूम भावना से मुक्ति का प्रयास। इस भावना से अब हम शायद मुक्त होगये। हम खुदी अपने लेखन से चमत्कृत नहीं होते , कूड़ा समझते हैं इसे , तो दूसरे को क्या चमत्कृत करेंगे।
१०. तमाम नई-नई चीजें सीखना और उन पर अमल करना। सीख रहे हैं जी। आज ही देखो विन्डो लाइव राइटर पर ये पोस्ट लिख रहे हैं! और भी सीखना है।
११. जिम्मेदारी के साथ अपने तमाम कर्तव्य निबाहना। यहां मामला डाउटफ़ुल है। कभी लोग कहते हैं निभा रहे हो, कभी कहते हैं इल्लई मतलब नहीं निभा रहे हो!
इसका निर्णय तो सिक्का उछाल कर करना होगा।

अब और आपको क्या बतावैं? पुराने हो नहीं पाये सब काम और एकाध नये ले लिये हैं! क्या लिये हैं यह आपको समय के साथ पता चल ही जायेगा। करेंगे तो गाना गायेंगे ही! :)

फ़िलहाल जन्मदिन के बहाने इतना ही। आप बोर तो नहीं हुये? :) बोर हुये हो तो आप ये पैरोडी गाने लगिये:

भये छियालिस के फ़ुरसतिया

ठेलत अपना ब्लाग जबरिया।

मौज मजे की बाते करते

अकल-फ़कल से दूरी रखते।

लम्बी-लम्बी पोस्ट ठेलते

टोंकों तो भी कभी न सुनते॥

कभी सीरियस ही  न दिखते,

हर दम हाहा ठीठी करते।

पांच साल से पिले पड़े हैं

ब्लाग बना लफ़्फ़ाजी करते॥

मठीधीश हैं नारि विरोधी

बेवकूफ़ी की बातें करते।

हिन्दी की न कोई डिगरी

बड़े सूरमा बनते फ़िरते॥

गुटबाजी भीषण करवाते

विद्वतजन की हंसी उड़ाते।

साधु बेचारे आजिज आकर

सुबह-सुबह क्षमा फ़र्माते॥

चर्चा में भी लफ़ड़ा करते

अपने गुट के ब्लाग देखते।

काबिल जन की करें उपेक्षा

कूड़ा-कचरा आगे करते॥

एक बात हो तो बतलावैं

कितने इनके अवगुन भईया।

कब तक इनको झेलेंगे हम

कब अपनी पार लगेगी नैया॥

भये छियालिस के फ़ुरसतिया

ठेलत अपना ब्लाग जबरिया।

मेरी पसन्द

जरा नम्र हो जा मजा आयेगा
ये ऊंचाई कोई छू न पायेगा।

जो किस्मत में चलना लिखा है तो चल
ये मत देख चलकर कहां जायेगा।

अगर उसके जुल्मों का एहसास है
समझ ले वो तुझको भी तड़पायेगा।

अगर ख्वाब देखा तो तामीर कर
ये जज़्बा बुलंदी पर पहुंचायेगा।

जिसे बदगुमानी पे भी नाज है,
उसे दिल दिखा करके क्या पायेगा।

हैं आंखों में आंसू उसी के लिये
न देखेगा वो, तो तू पछतायेगा।

बड़ा बनना है तो हुनर सीख ले-
कि अपनो से बचकर निकल जायेगा।

कन्हैयालाल नंदन

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

50 Comments

  1. मुहम्‍मद उमर कैरानवी

    फुर्सतिया महाराज आज आपका लेख मिला तो फुर्सत नहीं, जन्‍दी में पढ नहीं सकता कि इतना ज्ञान बिखरा पडा है कि जितना समझूं उतना उलझूं, किधर से समझूं क्‍या समझूं बस इतना पता है कि ब्लागिंग में कुछ इशारों इशारों में हो रहा है और में उस अन्‍धेरे में लठ घुमा रहा हूं, जब तक ना समझूं तब तक तो हम भी उधर ही चल रहे हैं जिधर से लाइन लग रही है

    मुहम्‍मद उमर कैरानवी , शुक्रिया! आप किधर से भी पढ़ना शुरु कर दो। न हो तो आप ऐसा करिये कि अपनी इस टिप्पणी से ही शुरू करके आप ऊपर की तरफ़ पढ़ना शुरू कर दीजिये। :)

  2. vani geet

    फुरसतिया जी की फुरसत की बर्थडे वाली पोस्ट …क्या कहना …अब नारी विरोधी के पक्ष में कुछ लिखें भी तो कैसे ..आपकी ये काबिलियत आपकी पोस्ट पर ही देखी…पहले पता नहीं था ..
    आज तक दूध जलेबी ही खाते देखा था लोगों को …दही जलेबी नयी डिश है ..

    वाणीगीतजी: आपकी टिप्पणी का शुक्रिया। अपनी नारी विरोधी छवि के बारे में हमको भी नहीं पता है लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा बताया था। दही जलेबी खाइये अच्छा लगेगा! :)

  3. संगीता पुरी

    देर से ही सही .. अपने ब्‍लाग पर जन्‍म दिन की बधाई स्‍वीकार करें !!

    संगीताजी: शुक्रिया! बधाई का! :)

  4. dr parveen chopra

    उपहार घर वाले देने पर अड़े थे एक नया मोबाइल! लेकिन हम न लेने पर अड़ गये। मितव्ययिता और समझदारी हमारे ऊपर जमकर सवार थीं। समझदारी इसलिये कि हमें पक्का पता था कि ये मोबाइल आये भले हमारे पैसे से लेकिन इसका इस्तेमाल वही ताकतें करेंगी जो इसे खरीदवाने के लिये बेताब हैं। हमारे भाग्य में अंतत: उन ताकतों का पुराना मोबाइल ही आना है। इसलिये हमने दृढ़ता पूर्वक इस आत्मीय साजिश को फ़ेल कर दिया !

    इस का मतलब यह तो भई घर घर की कहानी है।

    अनूप जी , आप को 47 वें साल में प्रवेश करने के लिये बहुत बहुत हार्दिक बधाईयां। ( belated birthday greetings.)

    पोस्ट हमेशा की तरह बहुत बढ़िया थी।

    डा.प्रवीन चोपणा: शुक्रिया आपकी शुभकामनाओं का:)

  5. समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले

    तो अब जन्म दिन की बधाई एक बार और लो और गुलगुले खिलाओ.

    कंडिका ४ पर विचार कर वक्त जाया न करो. जैसा चल रहा है, चलने दो.

    नन्दन जी बुजुर्ग हैं, अनुभवी हैं…सही कहते हैं. जरा कान दो. :)

    बाकी मौज है तो मौज काटो न!! काहे परेशान हो.

    अच्छा लिखते हो इसलिए अच्छा लिखा है. जिओ!!

    जय हो!!
    समीरलालजी: कंडिका ४ पर वक्त कहां जाया हो रहा है। सोचने की बात है। सोचने में कौन वक्त जाया होता है? नन्दनजी जो कहते हैं वो अब हमें ही करना पड़ेगा। आप तो वैसे ही अपनी विनम्रता, क्यूटकाया और अन्य तमाम उच्चतर गुणों से लदे-फ़दे होने के कारण वैसे ही आप इत्ता दोहरे हैं कि अब आप पर और भार डालना उचित नहीं लगता। मौज से हम कहां परेशान हैं। मौज न लेते हुये भी मौज ही ली जाती है। अच्छा लिखते हैं अच्छा लिखा है कहकर तो आपने मुझे जीते जी मार दिया। :)

  6. Nishant

    ठेलत ठेलत हे सखी, रह्या अनूप ठिलाय,
    पोस्ट समानी ब्लौग में, जब तक ठेला जाय.

    ठेलत ठेलत हे सखी, रह्या अनूप ठिलाय,
    ठेला ठिलकत जात है, सब कुछ ठेला जाय!

    निशांत: ठेल ठाल तो होत है मौज मजे के साथ
    आपौ हाथ लगाइये लीजिये मौज सबके साथ।
    :)

  7. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'

    अनूप जी

    आप कुछ कुछ बातें कितनी फनी लिखते हो, बहुत मजा आता है फिर फिर पढ़्कर.

    आपका कित्ता बढ़िया सेंस ऑफ ह्यूमर है. अच्छा लगता है. :)

    समीरलालजी: आप पर लगता है बबली जी के गुण आ गये हैं वहां टिपियाते-टिपियाते। जैसे बबलीजी बिना बताये गालिब की शायरी ठेल देती हैं वैसे ही आप परसाईजी का वाक्य बिना बताये लंबा करके ठेल दिये। परसाईजी लिखे थे न-एक सज्जन अपने मित्र से मेरा परिचय करा रहे थे-यह परसाईजी हैं। बहुत अच्छे लेखक हैं। ही राइट्स फनी थिंग्स।

  8. सतीश पंचम

    बडी फुरसत भरी पोस्ट है। जन्मदिन की बधाई स्वीकारे।

    आत्मीय साजिश तो हर घरवा में चलतै रहता है :)

    आख्या भी सुंदर है।

    सतीश पंचमजी: बधाई और टिप्पणी के लिये शुक्रिया।
    :)

  9. arvind mishra

    ब्लॉग क्यों ध्वस्त हुआ कारण सगीता जी ने विस्तार से लिखा है !
    हैं तो जरूर आप ऊंची चीज ,मोबाईल से बचे ,अपुन तो फंसे !
    काहें को ब्लागजगत छोड़ने की अशुभ बात ही मुंह से निकालते हैं
    उस चेलहाई का क्या होगा -जो मंत्रमुग्ध प्रवचन सुनती आयी है !
    चलते रहिये ब्रहमज्ञान लेने देने के कई तरीकों में एक यह भी शायद हो !
    कभी कभी सोचता हूँ आपसे छः साल बड़ा कर कुदरत ने बड़ा गुनाह
    कर दिया मुझ पर ,यह मौज लेने में बाधा डालती है !

    अरविन्दजी: मोबाइल या किसी चीज से बचने के लिये ऊंची चीज होने की कोई आवश्यकता नहीं। आप फ़ंसने के बाद भी ऊंची चीज बने रह सकते हैं। हैं भी। ब्लाग छोड़ने की बात हमने कहां की? लगता है आप हमारी बात को संस्कृत में अनुवाद करके पढ़े हैं और अनुवाद उलटा दिये हैं। हमारे कोई चेले नहीं हैं! जो दोस्त हैं वे सब मस्त हैं! रही बह्मज्ञानकी बात तो ज्ञान आपै लोग संभालिये। हमारा उससे कोई तालमेल नहीं है। जहां तक मौज लेने में बाधा की बात है तो अपने आप खड़ी की गयी बाधाओं का दोष कुदरत पर तो मत डालिये। हमारी माताजी हमसे तीस साल करीब उमर में ज्यादा हैं। हम लोग आपस में मजाक कर लेते हैं। आपको मौज मजे में जलजला आ गया दिखता है और बाधा आप कुदरत को बता रहे हैं! बलिहारी है आपकी। अगर सही में मौज मजे में रहना चाहते हैं तो थोड़ा सहज रहिये सब ठीक हो जायेगा। :)

  10. विवेक रस्तोगी

    आत्मीय साजिश तो हर घर में होती है पर इसे फ़ेल करना या न करना सब अपने ऊपर ही होता है। मन पर कन्ट्रोल रखना पड़ता है, नहीं तो कई बार तो ये ताकतें आत्मीय ब्लेकमेलिंग तक पर उतर आती हैं :)

    बहरहाल आपको जन्मदिन की बिलेटेड शुभकामनाएँ।

    विवेक रस्तोगी: आपकी शुभकामनाओं और अनुभव जन्य टिप्पणी का शुक्रिया।
    :)

  11. ताऊ रामपुरिया

    जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं एक बार फ़िर से. फ़ुरसतिया चालीसा बेहद पसंद आया. आनंद आगया इस फ़ुरसतिया पोस्ट पर. आपकी यही स्टाईल तो आपको पढने के लिये हमें आपका मुरीद बना रखी है. लाजवाब….नायाब. बहुत शानदार.

    रामराम.

    ताऊजी: आपकी हौसला आफ़जाई का शुक्रिया।
    रामराम!
    :)

  12. mahendra mishra

    आप निसंदेह ब्लागिंग जगत के लिए प्रेरणाश्रोत है और सभी को आपसे काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है . देर से सही पर अब जन्मदिन की हार्दिक ढेरो शुभकामनाये .

    महेन्द्र मिश्रजी: आपकी शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिये शुक्रिया। :)

  13. दिनेशराय द्विवेदी

    जनम दिन मुबारक हो ही चुका है। आज कल किसी का फोन व्यस्त मिले, ब्लाग कोमा में चला जाए तो पाबला जी के ब्लाग पर मुबारक बाद दर्ज कराई जा सकती है वो हम बवक्त कर चुके हैं।
    अब आप को बताय दें कि आज पाबला जी का जनमदिन है। रात की शिफ्ट कर के आए और नाश्ता कर के सोए हुए हैं। बारह बजे उट्ठेंगे। सही वक्त पर बधाई देदें।

    द्विवेदीजी: शुक्रिया। अब पाबलाजी को भी बधाई दे ही डालते हैं:)

  14. Shiv Kumar Mishra

    जनमदिन का शुभाकमना
    करते हुए अवमानना
    हम यहीं रहेंगे
    और आपसे कहेंगे कि;
    लगाते रहिये
    चेलहाई के जिंदा रखने का तरकीब
    बनते रहेंगे
    दोस्त और रकीब
    दरकती चट्टान
    पानी का उठान
    रतीराम की दूकान का पान
    हम खाते रहेंगे
    यहाँ आते रहेंगे
    चेलहाई चलाते रहेंगे
    आप (बहु) बचन दीजिये कि;
    प्रबचन सुनाते रहेंगे

    शिवकुमार मिश्र: आपकी टिप्पणी पढ़कर हम कुछ और न हो पाने के कारण अविभूत हुये जा रहे हैं! आशा है आप अन्यथा न लेंगे! :)

  15. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी

    सुबह-सुबह आनन्द दे गयी आपकी पोस्ट। सपत्नीक वाचन का एक खतरा यह हुआ कि अब भविष्य में मुझे आत्मीय साजिश का शिकार होना पड़ सकता है। लेकिन साजिश की काट भी आपने बता दी इसलिए नयी साजिश की तैयारी हो सकती है।

    ब्लॉग जगत की दरकती चट्टानों और जलजले की सूचना को धता बताती आपकी यह पोस्ट इस परिवार के माहौल को जोड़े रखने और पहले से अधिक मजबूत बनाने में सफल रहेगी। हम सब एक हैं…। जय हो।

    थोड़ी बहुत हलचल न हो तो मजाइच नहीं आता। आपने यह जिम्मेदारी भी बखूबी निभायी इसके लिए साधुवाद।

    सिदार्थ

    सिदार्थ त्रिपाठी: शुक्रिया। आप साजिश के शिकार होते रहे और होने से बचे रहे अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार। जिम्मेदारी तो गैरजिम्मेदारी की तरह निभाई जाती रहेगी। :)

  16. Khushdeep Sehgal

    अनूपजी, जन्मदिन मनाने का फुरसतिया अंदाज़ बेहद पसंद आया…बस इतना ही कहूंगा…स्वीट 46…

    खुशदीप सहगल: आपकी शुभकामनाओं का शुक्रिया। :)

  17. प्रवीण शाह

    .
    .
    .
    “भये छियालिस के फ़ुरसतिया

    ठेलत अपना ब्लाग जबरिया।”

    इस ठेलने का ही तो मुरीद है बलॉग जगत…
    जन्मदिन की शुभकामनायें…

    प्रवीण शाह: शुक्रिया। ठेलते रहेंगे ऐसेइच!
    :)

  18. गौतम राजरिशी

    “अपने तआर्रूफ़ के लिये इतना काफ़ी है… हम उस रास्ते नहीं जाते जो आम हो जाये”

    इस एक शेर में सब निबटा दिया, देव!

    “काम करने का मन” वाली मिनट-शीट खूब भायी….
    लगे हाथों पैरोडी की भी तारीफ़ कर ही देता हूँ! :-)

    अरे साहबजी, ढेर सारा शुक्रिया आपकी तारीफ़ का! अगली गजल कब आयेगी आपके ब्लाग पर ? :)

  19. Pankaj

    जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

    पंकजजी: शुभकामनाओं का शुक्रिया। :)

  20. Arvind Chaturvedi अरविन्द चतुर्वेदी

    धन्य है आपका की बोर्ड ,जो जबरिया पोस्ट पिलवाता ही रहता है .
    धन्य है ‘फुरसतिया’ ब्लोग जो सबको झेलवाता ही रहता है.

    आपकी पोस्ट लम्बी हो या छोटी,
    चोट करती हैं
    असर होता है ज़रूर.
    धन्य है ब्लोगजगत जो इस चोट पर मल्हम लगाता ही रहता है.

    फालतु की इस ( घटिया) तुकबन्दी को मारिये गोली,
    मौज़ करिये क्यों कि ,
    आपकी छियालिसवीं सालगिरह तो हो ली.
    बधाई

    अरविन्द चतुर्वेदीजी: आपकी शानदार तुकबंदी को हम रख लिये सहेज के अपने लिये। इसको घटिया कहने के लिये आपके खिलाफ़ सोच रहे हैं एक ठो केस ठोंक दे द्विवेदीजी से सलाह करके। बधाई के लिये शुभकामनायें। :)

  21. दरभंगिया

    जिसका इंतजार था वह आ ही गया.

    आप स्वस्थ और सुखी जीवन जियें यही कामना है. खुद की मौज लेते फ़ब रहें हैं :)

    घोषणा तो हो ही रही है कि आप बहुत ही निष्ठ और सक्रिय बेबीसिटर हैं ;) तो और बेबीज एडॉप्ट करने का मन हो तो नोटिस अवश्य जारी करें.

    साईट का नया थीम पहले से ज्यादा इम्प्रेसिव नहीं है. आर्काईव वगैरह कुछ नहीं दिख रहा. आशा है वो चित्रों का स्लाईड्शो और हालिया पोस्ट व टिप्पणियों वाल टैब्ब्ड विजेट भी वापस आयेगा भले ही कोई दूसरा थीम हो.

    दरभंगियाजी: शुक्रिया! मौका मिला और मौज ले लिये! :) जै हो! थीम अभी ठीक हो रही है। बन जाने पर अच्छी लगेगी ऐसा मुझे भरोसा है। यह सब काम हमारे ईस्वामी जी कर रहे हैं!

  22. nirmla.kapila

    मेरा कम्प्यूटर भी बैठ गया था इस लिये देर से आयी आपको जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई!

    निर्मला कपिलाजी: बधाई के लिये शुक्रिया। आपके कम्प्यूटर के ठीक बने रहने के लिये मंगलकामनायें! :)

  23. अजय कुमर झा

    चलो इतने फ़ुर्सत में बिता लिये बरस छियालीस,
    भकभकाने तक रहे सबको छेडिस…….

    अरे ई का बीत गवा एक हफ़्ता पूरा,
    काहे केक नहीं अभी तक काटिस…

    हमें हमारा हिस्सा भिजवाया जाये जी…हम फ़ुर्सत से चिबा चिबा के खायेंगे….

    अजय कुमार झा: शुक्रिया! केक भेजा जा रहा है आपके ईमेल पते पर! :)

  24. कुश

    आप बहुत अच्छा लिखते है..
    लिखते रहे..

    कुश: शायद टाइपिंग की कुछ गड़बड़ हो गयी। शायद लिखना चाह रहे हो- आप बहुत लिखते है, अच्छा भी लिखें! लिखते रहें! :)

  25. जीतू

    बहुत सही। आखिर माने नही, जबरन 46 के हो ही गए। चलो अब हो गए हो तो बधाई स्वीकार करो। और इ बताओ, इत्ता सेंटी काहे हो रहे हो, ये किए, वो नही किए, इसका दिल दुखाए, उसका नही। ऐसा करोगे वो बन्दे नाराज हो जाएंगे, जिनसे मौज नही लिए हो। मस्त रहो, हमको वोही फुरसतिया पसन्द है जो जहाँ है जैसा है (As is Where is basis), टेंशन देने की चीज है लेने की नही। इसलिए झकास मस्त रहो।

    जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ।
    तुम्हारा ब्लॉगोटिया यार

    जीतू: सेंटी काहे को होंगे जी? अदायें लोग मारते हैं उनकी नकल करके हम भी मार दिये। झांसे में मत आओ! मौज है!
    :)

  26. संजय बेंगाणी

    मेहनती ब्लॉगर को बी लेटेड हैप्पी बर्थ-डे….

    मौज लेने के बारे में ज्यादा अपराधभाव न पाले. अगला ही बार बार रिक्युवेस्ट करता है, लिजीये ना लिजीये ना तो कोई कब तक टाले :)

    जितुभाई आप जित्ते दृढ़निश्चयी नहीं है :)

    संजय बेंगाणी: शुक्रिया। मौज लेने में हम कोई भाव नहीं पालते। सिवाय मौज भाव के! आपकी यह बात सही है कि लोग कहते हैं मौज लेने के लिये। न लेने पर ना्राज हो जाते हैं! वहीं जिससे ले लो वो भी नाराज हो जाता है। बड़ी आफ़त है! :)

  27. रंजना

    जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई…

    केक कविता और लेख तीनो….लाजवाब हैं !!!

    आप मेरे ब्लॉग पर नारी विरोध (कमेन्ट) निसंकोच कर सकते हैं…..मैं बिलकुल बुरा न मानूंगी…

    रंजनाजी, आपकी ब्धाई और प्रतिक्रिया शुक्रिया। नारी विरोध हमें करना ही नहीं। लेकिन ये बताइये कि आपकी पोस्ट पर मैंने उन आलोचक का नाम-पता पूछा था जिन्होंने आपकी सहेली के लिखे की अनुचित/अनावश्यक आलोचना की। आपने बताया नहीं। बताइये तो खड़ी करने वाली चीजें खड़ी कर दें और गोल करने वाली गोल! :)

  28. विवेक सिंह

    मौज लेने में संकोच कैसा ?

    मौज ली नहीं जाती, आ जाती है,

    जिस जगह मौज का घनत्व अधिक होगा वहाँ से कम घनत्व के क्षेत्र की ओर मौज का प्रवाह स्वत: ही होता रहता है,

    इसे रोकने की कोशिश करेंगे तो मौका पाते ही अधिक तीव्रता से इसका प्रवाह होगा !

    विवेक सिंह: शुक्रिया! ये तो मौज के वैज्ञानिक सिद्धान्त बता दिये तुमने मजे-मजे में। :)

  29. anitakumar

    जन्मदिन की बधाई तो पहले ही दे चुके हैं। हम भी जीतू जी की तरह यही सोच रहे हैं कि आप इतना सेंटी काहे हो रहे हैं…॥मौज लेना तो होली के रंग डालने के जैसा है, जिस पर नहीं डाला वो पूछता है मुझ पर क्युं नहीं डाला और जिस पर डाला वो झूटमूठ का नाराज होने का नाटक करता है,रिवाज है भई। आप का पैरोडी गाना मस्त है और नंदन जी तो हमेशा ही मनभावन लिखते हैं। मस्त रहिए, खुद भी हंसिए हमें भी हंसाइए…।

    अनीताजी: शुक्रिया। आपकी आज्ञा का पालन हो रहा है! :)

  30. वन्दना अवस्थी दुबे

    “मोबाइल संदेश का जो आदान हुआ था उनका प्रदान किया गया ”
    तो हम भी इसी आदान-प्रदान में शामिल थे….थे न? हमने शुभकामनायें भेजीं थीं न? नया मोबाइल ले लेना था न, ज़रूरी है कि ये साजिश ही हो? वैसे ये लाइनें बहुत मज़े की बन पडी हैं. कितनी देर हंसती रही, अभी भी हंसी रुक नही रही….शानदार पोस्ट. अरे हां आपकी प्रगति-आख्या- बहुत बढिया.और नन्दन जी की कविता का तो कहना ही क्या!

    वन्दनाजी: शुक्रिया। आप भी शामिल हैं इस शुभकामना आदान-प्रदान में! अब हंसी रुकी की हंसती ही जा रहीं हैं अभी तक! :)

  31. Smart Indian - अनुराग शर्मा

    बधाई!

    अनुराग शर्मा: शुक्रिया।
    :)

  32. रौशन

    चिट्ठाचर्चा हो या फुरसतिया आपको पढना अच्छा लगता है
    विवेक जी ने सच ही कहा मौज ली नहीं जाती आ जाती है
    आप जहाँ कहीं भी लिखते हैं आपका मेरी पसंद वाला हिस्सा हम सबसे पहले खोजते हैं!

    रौशन: शुक्रिया। मेरी पसंद कोशिश करेंगे कि अच्छी चुनकर लिखते रहें! :)

  33. sanjay vyas

    आप मूल काम ही इतना बढ़िया करते हैं तो इत्ता सारा ‘पार्श्व चिंतन’ काहे ठेल दिए?
    किन्हीं किन्हीं पंक्तियों में ‘ क्या गम है जिसको छुपा रहे हो’ वाली बात लगी.जन्म दिन की यहाँ पर भी बधाई लें.

    संजय व्यास: शुक्रिया। गम कुछ है नहीं! बस मौजा ही मौजा:)

  34. अजित वडनेरकर

    अजी हम दस सितंबर से याद रखे बैठे थे कि आपको जन्मदिन की बधाई देनी है…और वहीं हुआ कि भूल गए।
    चलिये, छियालीसवें की विलंबित बधाई लीजिए। पिछले साल का एजेंडा दिलचस्प है। आपने तो पुर्जे को संभाल भी रखा है, हम तो अगले ही दिन फाड़ कार फेंक देते हैं:)

    अजित वडनेरकरजी: शुक्रिया आपका। पुर्जा इसलिये बचा रहा काहे से कि ये पिछले साल नेट पर चढ़ा लिया था। :)

  35. kanchan

    janmadin ki badhai to de hi chuki hun…! ham to apne janmadin par bas ye list banate haiN ki hame dusaro se kya kya karvana hai..khud ka tension lete hi nahi..aur saal bhar baad unhi par tohamat laga kar chhutti bhi le lete hai “aap ne ye ye nahi kiya” ::)

    कंचन:शुक्रिया। अब तुम्हारे जलवे हैं। उतने हमारी औकात कहां जो सब पर तोहमत लगा सकें!
    :)

  36. vipin behari goyal

    bahoot rochak hai.badhai

    विपिनजी: शुक्रिया। :)

  37. dr anurag

    आपकी हिम्मत की दाद देते है …की इस मायावी दुनिया में अभी भी इस व्यवसन को पाले हुए है …हमारा तो जी उचट जाता है कभी कभी. इस सो कोल्ड पढ़ी लिखी कम्प्यूटरी दुनिया से ……कल ही किसी ने एक किताब गिफ्ट दी है परसाई जी की” सदाचार का ताबीज ” सच कहूं तो उसमे लिखी रचनाओं से कही ज्यादा दिलचस्प उसकी भूमिका है….
    फिलहाल अभी जी उचाट है …किसी दूसरे रास्ते है ….एक आध दिन में ट्रेक पे अयेगा …

    डा.अनुराग: शुक्रिया। अब ट्रेक पर आ भी जाइये। परसाईजी के क्या कहने! :)

  38. satish saxena

    कई बार आप से प्रेरणा लेता हूँ अनूप भाई , हंसते हंसते अपनी बात कहना और लोगो के फेंके हुए पत्थर सहने की बड़ी शक्ति है आपमें ! मैं जब ब्लाग जगत में आया था तो लगता था कि बहुतों की बात सुनूंगा और अपनी कहने का प्रयत्न करूंगा ! मगर यहाँ हिंदी ब्लाग जगत की हालत बेहद दयनीय है, लोग अपने को बेहतर साबित करने, और दूसरे को गिराने के लिए क्या क्या नहीं करते ?

    यहाँ लोगो ने अपने अपने गैंग तथा ग्रुप बना रखे हैं,और किसी की बेईज्ज़ती करवाने के लिए वाकायदा फ़ोन करके, मेल भेज कर उकसाया जाता है , और लोग इन महान विभूतियों की बात मानकर कुछ भी करने को तैयार रहते हैं !

    उघडे हुए मुखौटों के नीचे छिपे चेहरों की झलक पाकर मैं कई बार अचंभित रह जाता हूँ ! मेरे मन में बसी उनकी पूर्व सौम्य आकृति और यह नया वीभत्स रूप देख कर मेरा खुद का लिखने का दिल नहीं करता ! लेखन चाहे कुछ भी क्यों न हो मगर लोक व्यापक होता है , मगर उस पर अपना मह्त्व बताने के लिए, अपने कमेंट्स देने ये गैंगस्टर अवश्य पंहुचते हैं ! इनका एक ही मकसद है की आप इनको इज्ज़त बख्शें तभी आप ब्लाग जगत में शांति पूर्वक रह पाएंगे !

    सतीश सक्सेनाजी: शुक्रिया आपकी प्रतिक्रिया। मुझे तो ब्लागजगत में सब बहुत प्यारे लगते हैं। पत्थर -सत्थर का क्या जिसके पास जो सबसे अच्छा होगा वही तो देगा। मुखौटा,गैंग, साजिश कुच्छ नहीं चलता लम्बे समय में। आखिर में अच्छा लिखा ही याद करते हैं लोग। एक और बात जो मैं जानता और मानता हूं वह यह है कि बेवकूफ़ से बेवकूफ़ आदमी चालाक से चालाक व्यक्ति के बारे में जानता और अपनी राय रखता है। प्रकट भले न कर पाये। इज्जत का क्या करते रहेंगे। सबकी! लिखते रहिये। लिखना मत छोडिये! :)

  39. Manish Kumar

    Janmdin Mubaraq Anup ji !

    शुक्रिया! मनीशजी। :)

  40. Prakash Pakhi

    shubhkamnaaen!jnmdin mubark!

    प्रकाश पाखी:शुक्रिया
    :)

  41. Gaurav Srivastava

    Sir , aapko janmdin ki bahut bahut badhayee ho .

    गौरव: शुभकामनाओं के लिये शुक्रिया। :)

  42. लावण्या

    जय मातादी …आज ही आपकी ४६ वीं साल गिरह के बारे में पढा है सो आज ही आपको बधाई डे रही हूँ
    एक दसक + ३ साल के फासले से , देख रही हूँ …जीवन इसी तरह मौज लेकर जिया जाए तब
    सब सही रहता है …आपके नियम कभी कभार तोड़ भी दें तो कौनी हर्जा नहीं जी :)
    बहुत स्नेह ke sath Happy Birth Day to you …& ..many many more …
    - लावण्या

    लावण्याजी: आपकी शुभकामनाओं और आशीर्वाद का शुक्रिया। :)

  43. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    तो अब जन्म दिन की बधाई एक बार और लो और गुलगुले खिलाओ.

    कंडिका ४ पर विचार कर वक्त जाया न करो. जैसा चल रहा है, चलने दो.

    नन्दन जी बुजुर्ग हैं, अनुभवी हैं…सही कहते हैं. जरा कान दो. :)

    बाकी मौज है तो मौज काटो न!! काहे परेशान हो.

    अच्छा लिखते हो इसलिए अच्छा लिखा है. जिओ!!

    जय हो!!

    ज्ञानदत्तजी:शुक्रिया। शायद आपका की-बोर्ड खराब था और आपने फ़िर भी समीरलालकी टिप्पणी कापी करके यहां पेस्ट कर दी। किन शब्दों में आपका शुक्रिया अदा करूं! :)

  44. अर्कजेश

    सिर्फ़ छियालिस साल पूरे होने की बधाई । हार्दिक शुभकामनायें ।
    इन्सान की पहचान उसकी स्टाइल से होती है।

    अर्कजेशजी: शुक्रिया। ये बड़ी ऊंची बात कह दी-इन्सान की पहचान उसकी स्टाइल से होती है। :)

  45. Abhishek Ojha

    मैं भी आज परिचय देता हूँ कुछ दोस्तों को:
    यह फुरसतियाजी हैं। बहुत अच्छे ब्लॉगर हैं। ही राइट्स फनी थिंग्स।

    जमाये रहिये ! एकदम धाँसू टाइप!
    ये केक तो बड़ा बढ़िया है जी. इसके बारे में तो आप लिखे ही नहीं. कहीं पिछले साल की फोटू तो नहीं. :)

    अभिषेक: शुक्रिया। मौज लिये रहो। केक के किस्से हम पहले ही लिख चुके हैं। देखो :)

  46. अमर कुमार बकवादी


    टँकी टँकी बजा नगाड़े मों ढ़ूँढ़त रह्यो फ़ुरसतिया
    बैक व्यू मिरर निरखा तौ ठेलत देखा ये पतिया

    तो आप अपने जन्मदिन को मान्यता प्रदान कर ही दिये,
    माने नहीं .. तौ यही बताय देते कि मित्र राष्ट्र में हो कि गुट-निरपेक्ष में
    पब्लिकिया तीन दिनन से खिजियाई हुई है, अउर आप ऊहाँ छैयालिस के भये मौज़ लेन मा पड़े हो ।

    डा.अमर कुमार: शुक्रिया। पब्लिक हमसे खीझी नहीं मौज ले रही है! :)

  47. Shastri JC Philip

    “अपने लेखन से लोगों को चमत्कृत कर देने की मासूम भावना से मुक्ति का प्रयास।”

    यह कोई मासूम भावना नहीं भैये, बल्कि आपका हर आलेख हम सब को चमत्कृत करता रहता है!!!

    सस्नेह — शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

    शास्त्रीजी: आपकी शुभकामनाओं का शुक्रिया।

  48. Rajesh....

    Der se, lekin janmdin ki shubhkaamnaayen, (happy b’day)!

    शुक्रिया, राजेश। किधर हो भाई सिकरी नरेश आजकल? तुम्हारे भी जन्मदिन की शुभकामनायें देर से ही सही:)

  49. amit

    वाह-२, जन्मदिन काफ़ी इवेंटफुल बीता ऐसा जान पड़ता है, हा हा हा! :)

    वैसे एक बात बताईये, ये कनपुरिये लोगों में बड़े बुजुर्गों के जन्मदिन पर मोबाइल ही उपहार में चलता है क्या? या ये मौसमी मार है? या यह सिर्फ़ सितंबरी लालाओं पर ही लागू होती है? काहे पूछ रहे हैं? अब बात यूँ है कि पिछले से पिछले सप्ताह जीतू भाई के जन्मदिन पर उनके घरवालों ने जबरन उनको उन्हीं की जेब ढीली करवा नया मोबाइल थमाया और कहलाया जन्मदिन का तोहफ़ा। इधर अब आप कह रहे हैं कि आपके साथ भी यही साजिश हो रही थी लेकिन आप जीतू भाई से अधिक विल पॉवर वाले निकले और साजिश कामयाब न हो पाई। बस इसी के चलते यह प्रश्न आपसे पूछा। क्या कहें, कन्फ्यूज़न हो गया है, समाधान कीजिए! ;)

    अमित: अब ई सब रूपा बनियाइन की तरह अन्दर का मामला है। ई सब खतरे टल जाते हैं लेकिन फ़िर घूम-फ़िरकर नई शकल में वापस आते हैं। अपने बारे में बताओ कैसे कटा बड्डे? :)

  50. Kavita Vachaknavee

    :) जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ :) स्वीकारें।

    :) “जीवेम शरद:शतम्” :)

    :) खूब लिखें, निरन्तर लिखें, ऐसे ही चोखा लिखें :)

    :) :) :) :) :)

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