….भेजे क्यों मीठे सपने

मीठे सपने

रात सो गये थोड़ा जल्दी, हालांकि थके नहीं थे ज्यादा,
तीन हीरोइनें ले गयीं, हमसे सपन-मिलन का वादा।
हमने उनको बहुत बताया, हैं बहुत बिजी हम भईया,
बात न मानी वे सुंदरियां, बोली मत करो निराश फ़ुरसतिया॥

बात बताई श्रीमती को, फ़िर तो उनकी खिलखिल गूंजी,
चले खरीदने चांदमहल हो, है घर में भांग न भूंजी।
मिलना जब उन सुंदरियों से, तो जरा कायदे से रहना
बाढ़ काढ़कर, मूंछ डाईकर, बनकर स्मार्ट सा मिलना॥

नखरें दिखलायें बालायें तो, मत उनके झांसे में आना,
इठला-इतरा, मुस्का-शर्मा कर, पास आने का करेंगी बहाना।
कैसे सजती, कैसे धजतीं , साबुन हैं कौन लगाती,
पूछ के आना कौन क्रीम से, वे चेहरे अपने चमकातीं।।

मीठे सपने

सोते ही मच्छर की सेना, बस लगी बमकने -भुन्नाने,
हीरोइन के चमचे हैं हम सोचा, आये हैं मिलने-मिलाने।
तभी अचानक मोबाइल मेरा, ससुरा बड़ी तेज भन्नाया,
उधर से मेरे दोस्त ने मुझको था, बड़ी तेज हड़काया॥

तुमतो मेरे जिगरी दोस्त हो, भेजे क्यों मीठे सपने,
मिला तुम्हारा SMS जैसे ही, हम तुरतै लगे कलपने।
तुम्हें पता क्या हम हो बैठे हैं, अब डाइबिटीज के रोगी,
वे दिन मती दिलवाओ जब, हमनें चांपी बहुत जलेबी॥

अगर चाहते भला हमारा, कुछ दिन जिये तुम्हारा यार,
सपन-करेला, ड्रीम-चिरायता, बस यही भेजवाओ यार।
मीठे-सपने,किसमिस-बातें, किसी सुमुखि-सुंदरी को भेजो,
जीना अभी चाहता हूं, मीठे सपने मुझको मत बिल्कुल भेजो।

हमने उसको फ़िर समझाया, बे समझो थोड़ी अंगरेजी,
स्वीट-ड्रीम्स से डर गये लल्ला, बातें करन लगे चंगेजी।
मतलब समझो बात का बबुआ,और मौज करो झन्नाटे से,
ज्यादा बहकोगे रातों को, तो करना होगा इलाज फ़िर चांटे से॥

मीठे सपने

रख दो फ़ौरन फ़ोन और अब बस झट से तुम सो जाओ,
यदि अनिद्रा के भी रोगी हो, तो ब्लाग पढ़ो और टिपियाओ।
और समस्या यदि कोई हो, तो सुबह मुझे बतलाना,
मस्त रहो, तुम जियो धांस के, मत काहू से घबराना॥

रात बीत गई पूरी-पूरी , आई न कोई सुंदरी बाला,
आया फोन कनाडा से, सबको बुलवाइन लाला।
अपनी किताब के विमोचन पर, उनको जिद करके बुलवाया,
फ़ुरसतिया से फ़िर मिलवा देंगे, कह सुंदरियों को भरमाया।

खैर मजे से कटी रात , और सुबह हुई खिलती सी,
याद दोस्त की घुली हुयी है, हवा महकती सी है।
बालायें अब फोन कर रही हैं, अब कब मिलिहौ फ़ुरसतिया,
हम उनको टरकाय रहे हैं, हैं बिजी बहुत हम भईया॥

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

24 responses to “….भेजे क्यों मीठे सपने”

  1. वन्दना अवस्थी दुबे

    तुमतो मेरे जिगरी दोस्त हो, भेजे क्यों मीठे सपने,
    मिला तुम्हारा SMS जैसे ही, हम तुरतै लगे कलपने।
    तुम्हें पता क्या हम हो बैठे हैं, अब डाइबिटीज के रोगी,
    वे दिन मती दिलवाओ जब, हमनें चांपी बहुत जलेबी॥

    मज़ा आ गया अनूप जी. वैसे कई बार हम भी मित्रों को स्वीट ड्रीम्स भेज देते हैं अब आगे से याद रखेंगे….क्या पता डायबिटिक बना देने की ज़िम्मेदारी हमारे ही सर…..,तस्वीर बडी बढिया लगाई है, किसी का घर है या होटल? जो भी है कविता के अनुकूल है.

  2. Shiv Kumar Mishra

    गजब. अद्भुत.

    किताब के विमोचन ने सारा मामला बिगाड़ दिया. कविता की किताब के विमोचन पर भड़ास कविता लिख कर पूरी….:-)

    वैसे बहार…सॉरी बहर में न होने की शिकायत तो करूंगा ही.

  3. विवेक सिंह

    आपको किसी ने यह नहीं सिखाया कि बालाओं को ‘भईया’ नहीं कहते ?

    संबंध ही स्थापित करना था तो ‘बहना’ कह देते !

    इसके अलावा आपकी कविता अच्छी लगी, घर में काफी लिबर्टी मिली हुई है लगता है :)

  4. arvind mishra

    ईश्वर करें ऐसी श्रीमतियाँ हर किसी को नसीब हों
    और लिपस्टिक वाली बात भी दर्ज कर लेते तो
    वृत्तांत वास्तविकता के और करीब जा पहुँचने का
    अहसास दे देता !

  5. ताऊ रामपुरिया

    जय हो फ़ुरसतियाजी की.

    रामराम.

  6. Khushdeep Sehgal

    सुरमई अंखियों में नन्हा-मुन्ना सपना दे जा रे…
    निंदिया के उड़ते पाखी रे, सपनों में आना साथी रे…
    रा री रू, रा री रुम…
    जय हिंद…

  7. P.C.Godiyal

    ऐसी बाते अगर बीबी को बतावो तो अक्सर जबाब मिलता है , रहने दो, एक को तो संभाल नहीं पाते और ख्वाब देखते हो चार के !

  8. कार्तिकेय

    @ मिलना जब उन सुंदरियों से, तो जरा कायदे से रहना
    बाढ़ काढ़कर, मूंछ डाईकर, बनकर स्मार्ट सा मिलना॥

    कौन कहता है कि सबसे संकटग्रस्त प्रजाति पुरुषों की है…! दुआ है कि ऐसी मलिकाइन सबको नसीब हों। लेकिन अपनई इज्जत का फालूदा कर लिये आप ई बता के कि उस फोन वार्ता के बाद शबे-हिज्र अकेले ही कटी….

  9. dr anurag

    लोग खामखां तारीफ़ कर रहे है शुक्ल जी….इसे सीरियसली न लीजियेगा …

  10. दिनेशराय द्विवेदी

    बहुत मौजी है।

  11. shreesh

    शैली पर आपके तो पूरा ब्लॉगजगत फ़िदा है,,,वही अपनी ट्रेडमार्क स्टाईल में क्या खूब लिखा आपने,,,,बच्ची की तस्वीर भी बड़ी प्यारी है..

  12. गौतम राजरिशी

    आज रात यकीनन पेन-किलर के दरकार नहीं पड़ेगी मुझे….

    हा! हा!!

  13. venus kesari

    जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो

  14. shefalipande

    बहुत बढ़िया ….पढ़कर मज़ा आया ….

  15. रंजना

    हा हा हा हा हा हा…..बहुतै बढ़िया….लाजवाब…धाँसू…..हंस हंस कर अंखियों से निकला आंसू…

  16. चंद्र मौलेश्वर

    कुछ सेंट-विंट भी लगा लेते तो शायद बात बन जाती। या हो सकता है कनाडा जाने के चक्कर में उडन खटोले में बैठिस गई हों:)

  17. डा. अमर कुमार


    जय हो !

  18. seema gupta

    मीठे-सपने,किसमिस-बातें, किसी सुमुखि-सुंदरी को भेजो,
    जीना अभी चाहता हूं, मीठे सपने मुझको मत बिल्कुल भेजो।

    हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा इत्ते मीठे सपने ……कोनो ज्यादा मीठे नहीं हो गये इ कमबख्त सपने हा हा हा हा हा हा हा हा

    regards

  19. अर्कजेश

    मौज करो झन्नाटे से
    मस्त रहो, तुम जियो धांस के (वाह वाह)
    सुन्दरियों को रखो फ़ांस के
    सपने की डायबिटीज से मत घबराना

    जिन्दगी में क्यों ऐसा मकाम आया
    मीठे सपनों से भी बुखार आया

  20. Anonymous

    शुरू में लगा गद्य है पर नहीं…मैं कविता पढ़ रहा था.

  21. काजल कुमार

    शुरू में लगा कि गद्य है पर फिर पता कि नहीं कविता पढ़ रहा था

  22. rajni bhargava

    बस मीठे सपने ही…..

  23. Anonymous

    सर जी बहुत तीखी धार है आपके व्यंग्य की,,कि बस हाँथ ही कट जाये….हाँ मीठे ख्वाबों से भी डायबिटीज हो सकती है..अब समझ मे आया..शायद तभी मच्छर इन्सुलीन इन्जेक्शन देते रहते हैं रात भर…और सजने-धजने-साबुन के सीक्रेट जब मिल जायें तो अपने पास ही मत रख लीजियेगा..सुरक्षित!! ;-)

  24. madhav

    चर्चा मंच से आया हूँ , रोचक लगा ब्लॉग

    congrats

    http://madhavrai.blogspot.com/
    http://qsba.blogspot.com/

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