- …मगर अब साजन कैसी होली
- लिखौं हाल मैं ब्लागरगण का, माउस देवता होऊ सहाय
- …जहां भी खायी है ठोकर निशान छोड आये
- जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
- मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता
- टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
- बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
- …अथ कोलकता मिलन कथा
- बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
- नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
कानपुर
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
[आज स्वतंत्रता दिवस है। आज ही अभिव्यक्ति अपने सातवें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इस ऐतिहासिक मौके तथा शानदार उपलब्धि पर सबको बधाई! इस अवसर के लिये पूर्णिमाजी ने मुझे झंडा गीत के अमर गीतकार श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' का परिचय लिखने का काम दिया था। मेरा तथा शोभा स्वप्निलजी का संशोधित लेख अभिव्यक्ति में [...]
‘मुन्नू गुरु’ अविस्मरणीय व्यक्तित्व
[अतुल की एक पोस्ट के जवाब में मैंने कानपुर के बारे में लेख लिखा था- झाड़े रहो कलट्टरगंज। उसे बाद में विस्तार देना हो नहीं पाया। इधर काफी दिन से हमें लग रहा था कि अपने शहर में बहुत कुछ है जो नेट पर आना चाहिये।मेरा विचार है कि कानपुर के व्यक्तित्वों का परिचय दिया [...]






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