- …मगर अब साजन कैसी होली
- लिखौं हाल मैं ब्लागरगण का, माउस देवता होऊ सहाय
- …जहां भी खायी है ठोकर निशान छोड आये
- जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
- मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता
- टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
- बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
- …अथ कोलकता मिलन कथा
- बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
- नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
साक्षात्कार
क्या देह ही है सब कुछ?
वे हिन्दी ब्लागिंग के शुरुआती दिन थे। साथी ब्लागरों को लिखने के लिये उकसाने के लिये देबाशीष ने अनुगूंज का विचार सामने रखा। इसमें एक दिये विषय पर लोगों को लिखना था। लिखने के बाद अक्षरग्राम पर लेखों की समीक्षा होती। पहली अनुगूंज का विषय था- क्या देह ही है सब कुछ? 25 अक्टूबर [...]
जबलपुर , कानपुर , शादी की सालगिरह और जन्मदिन
जबलपुर और परसाईजी
हरिशंकर परसाई
जबलपुर मैं पहली बार सन १९९२ में आया था। उन दिनों आर्डनेन्स फ़ैक्ट्री बोलनगीर, उड़ीसा में तैनात था। फ़ैक्ट्री नयी बन रही थी। जबलपुर की आर्डनेन्स फ़ैक्ट्री खमरिया किसी काम से आया था। उन दिनों परसाई जी को नया-नया पढ़ना शुरू किया था। उनसे मिलने का मन था। [...]
…सही बात पर स्टैंड भी लेना चाहिये-प्रत्यक्षा
आज प्रत्यक्षा का जन्मदिन है। इसके पिछले साल जब इसी मौके पर उनके बारे में लिखा गया था तबसे उनकी एक किताब- जंगल का जादू तिल-तिल आ चुकी है। कहानियां लिखना तो जारी ही था अब छपने भी लगीं हैं। ब्लाग लेखन उसी अनुपात में कम हो गया है।
उनके बारे में पहले भी लिखा [...]
ब्लागिंग मस्ती की पाठशाला है -आलोक पुराणिक
आलोक पुराणिक
[आलोक पुराणिक हिंदी व्यंग्य के जाने माने युवा लेखक थे। थे इसलिये क्योंकि पिछले दो साल से ब्लागर भी हो लिये हैं। गत दस-बारह वर्षों से व्यंग्य लेखन में सक्रिय आलोक पुराणिक से जब व्यंग्य लेखन के पहले के कामकाज के बारे में पूछा गया तो जवाब मिला-‘इससे पहले जो करते थे,उसे बताने [...]
देबाशीष -जन्मदिन के बहाने बातचीत
[करीब चार साल पहले जब मैंने रविरतलामी का अभिव्यक्ति पत्रिका में ब्लाग के बारे में लेख पढ़ा तो अनायास अपना ब्लाग शुरू करने के लिये कसमसा उठा। जैसे तैसे अपना ब्लाग रजिस्टर करा और लिखने के लिये छटपटाने लगा। की-बोर्ड कहीं मिल के नहीं दे रहा था। खोजते-खोजते फ़िर देबू के पुराने [...]






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