By फ़ुरसतिया on February 18, 2010
Posted in पाडकास्टिंग, मेरी पसंद | Tagged गगन, गीत, पंख, रमानाथ अवस्थी
By फ़ुरसतिया on February 15, 2010
पिछली पोस्ट में हिमांशु और अमरेन्द्र ने गीतकार लवकुश दीक्षित का गीत टुकुरु-टकुरु देउरा निहारै बेईमनवा सुनाने का आग्रह किया था। मैं पहले भी इस गीत को लवकुशजी की आवाज में ही पॉडकास्ट कर चुका हूं। लेकिन उस समय जिस मुफ़्तिया साफ़्टवेयर का प्रयोग किया था वह बाद में कामर्शियल हो लिया और हमारी पोस्ट [...]
Posted in कविता, पाडकास्टिंग, बस यूं ही | Tagged अवधी, गीत, देवर, देवरानी, भौजी, लवकुश, होली
By फ़ुरसतिया on December 16, 2009
सर्दी में चीजें सिकुड़ जाती हैं। यह बात हम तब से जानते हैं जब हमने हाईस्कूल भी नहीं पास किया था। हालांकि यह बात वे भी जानते हैं जिन्होंने कौनौ स्कूल कभी भी नहीं पास किया। सर्दी में लोगों को सिहरते-ठिठुरते भी देखा है। अभी जब यह लिख रहा हूं तो लग रहा है कि [...]
Posted in पाडकास्टिंग, बस यूं ही
By फ़ुरसतिया on January 27, 2008
आजकल ब्लाग-जगत में बेटियों की के बारे में कई अच्छी-अच्छी पोस्टें आयी हैं। विमल वर्मा जी अपनी बिटिया प्यारी पंचमी के जन्मदिन पर पोस्ट लिखी। वहीं से मैं बेटियों के ब्लाग पर पहुंचा। इसकी एक बेहतरीन पोस्ट में रवीशकुमार जी ने अपनी बिटिया के बारे में लिखते हुये उसके कारण अपने जीवन में आये बदलाव [...]
Posted in इंक-ब्लागिंग, पाडकास्टिंग
By फ़ुरसतिया on December 10, 2007
सबेरे की ड्यूटी बजा के आये तो देखा चिठेरी-चिठेरी अपनी बजा रहे थे। चिठेरहाव इतना मचा था कि कुछ सुनायी नहीं दे रहा था। जो समझ पाये वह यहां दिया है। अपना दिमाग लगाकर समझने का प्रयास करियेगा। शायद कुछ समझ आ जाये। चिठेरी: अरे चिठेरे आ कुछ बतिया। तू तो कल दिखा ही नहीं। [...]
Posted in पाडकास्टिंग, मेरी पसंद
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