पाडकास्टिंग

…..जिंदगी धूप तुम घना साया

सर्दी में चीजें सिकुड़ जाती हैं। यह बात हम तब से जानते हैं जब हमने हाईस्कूल भी नहीं पास किया था। हालांकि यह बात वे भी जानते हैं जिन्होंने कौनौ स्कूल कभी भी नहीं पास किया। सर्दी में लोगों को सिहरते-ठिठुरते भी देखा है। अभी जब यह लिख रहा हूं तो लग रहा है कि [...]

बेटे भी संवेदनशील होते हैं

आजकल ब्लाग-जगत में बेटियों की के बारे में कई अच्छी-अच्छी पोस्टें आयी हैं। विमल वर्मा जी अपनी बिटिया प्यारी पंचमी के जन्मदिन पर पोस्ट लिखी। वहीं से मैं बेटियों के ब्लाग पर पहुंचा। इसकी एक बेहतरीन पोस्ट में रवीशकुमार जी ने अपनी बिटिया के बारे में लिखते हुये उसके कारण अपने जीवन में आये बदलाव [...]

आलोक पुराणिक किंड्यूटीविमूढ हो गये

सबेरे की ड्यूटी बजा के आये तो देखा चिठेरी-चिठेरी अपनी बजा रहे थे। चिठेरहाव इतना मचा था कि कुछ सुनायी नहीं दे रहा था। जो समझ पाये वह यहां दिया है। अपना दिमाग लगाकर समझने का प्रयास करियेगा। शायद कुछ समझ आ जाये। चिठेरी: अरे चिठेरे आ कुछ बतिया। तू तो कल दिखा ही नहीं। [...]