पाडकास्टिंग

काहे जिया डोले हो कहा नहीं जाये

मुंबई ब्लागर मिलन में अनिल रघुराज का गीत सुनकर अद्भुत आनंद आया। इस गीत के संदर्भ में अपने मामा डा.कन्हैयालाल नंदन का आत्मपरक लेख याद आ गया। इस लेख में उन्होंने अपने उन दिनों की याद की थी जब उनकी संवेदना को उनके गुरू डा.ब्रजलाल वर्मा संवार रहे थे। उन्होंने लिखा था- मैं हाई स्कूल [...]

सपनो की डोर पड़ी पलकों का पालना

हमारी माताजी तो अक्सर कोई न कोई गीत गुनगुनाया करती हैं। बहुत दिन पहले उनके द्वारा गाई एक लोरी रिकार्ड की थी। आज उसे खोज रहा था लेकिन सोचा कि इसकी वीडिओ रिकार्डिंग क्यों न की जाये। बस फिर क्या, हमारे छोटे सुपुत्र के हाथ में मोबाइल था और धूप में बैठी कुछ काट रही [...]

ब्लाग नौटंकी उर्फ़ चिठेरी-चिठेरा संवाद

हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के इतवार का एक आकर्षण होता है उर्मिल कुमार थपलियाल की लिखी हुयी सप्ताह की नौटंकी। पिछले इतवार के कुछ अंश देखे जायें- नटी:आधा बीत गया नवंबर। नट: मुआ मुकद्दर। मरा सिकन्दर। नटी:सत्ता बन गई मोटा अजगर। नट: क्या कहन। भई क्या कहने। नटी: कपटी पहने संत का चोगा। नट: सारे भोगी [...]

ब्लागिंग के साइड इफ़ेक्ट…

दो दिन पहले अपने जनमदिन का बहाना लेकर ज्ञानजी ने ब्लागरों के खिलाफ़ प्रथम सूचना रपट टाइप कुछ लिखाया और बताया कि ब्लागर लोग उनका वह बदल देने पर तुले हैं जिसको अंग्रेजी में ‘पर्सोना’ कहते हैं। उन्होंने अपने इस रूपानतरण को बयान करते हुये कहा- समझ में नहीं आ रहा कि अपने में सिमटा [...]

फिर उदासी तुम्हें घेर बैठी न हो

कानपुर के गीतकारों में अंसार कंबरी ऐसे गीतकार हैं जिनकी आवाज वर्षों से जस की तस मधुर बनी हुई है। वे कहीं भी कविता पढ़ें उनके चाहने वाले श्रोता उनसे उनके बेहद प्रसिद्ध गीत तुम कुछ कहो तो सही को सुनने के लिये फ़रमाइश अवश्य करते हैं। यह गीत मुझे भी पसंद है परन्तु इसमें [...]