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By फ़ुरसतिया on May 14, 2011
कल डा.अनुराग ने प्रेम गली अति सांकरी पर टिपियाते हुये लिखा- आपकी इस गली में एंट्री का कोई जिक्र नहीं है….बड़ी सफाई से आपने यहाँ भी अपने ज़ज्बातो को कंट्रोल कर लिया है ….कसम उस पहले प्यार की शुक्ल जी…..आज बह जाने दीजिये ..बस कह डालिए ! बाद में और साथियों ने भी डा.साहब की [...]
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By फ़ुरसतिया on April 15, 2011
पिछली पोस्ट जबरियन छपाई के हसीन साइड इफ़ेक्ट पर ई-स्वामी की टिप्पणी थी- गुरुदेव, सारा दोष साली आपकी स्टाईल का है! बंदे की स्टाईल से लिखने की ट्राई मारो आप, फ़िर किसी का बाप भी किसी अखबार के लिये नही चुरा सकता! अब अगर किसी को ई-स्वामी की स्टाइल देखनी हो तो उनके ब्लाग पर [...]
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By फ़ुरसतिया on March 11, 2011
आज ज्ञानजी की पोस्ट पढ़ी- डिसऑनेस्टतम समय। इसमें तमाम साथियों की टिप्पणियां हैं। इससे लगा कि हम अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। मैंने सोचा हम भी उदास हो जायें लेकिन इसी समय मुझे अपनी एक पुरानी पोस्ट याद आयी- आशा ही जीवन है। यह लेख उस समय हमने अनुगूंज के नवें लिये [...]
Posted in अनुगूंज, पुराने लेख |
By फ़ुरसतिया on October 2, 2010
[आज कुछ नया लिखने की सोच रहे थे। फ़िर यह लेख याद आ गया। सोचा आज इसे ही फ़िर से पोस्ट किया जाये। दुबारा। आदतन शुरू में ब्लॉगिंग की बातें हर पोस्ट में लिखते थे। सो इसमें भी बाद में आ गयी हैं। अब वे गैर जरूरी लगती हैं। एक तिहाई हिस्सा गैरजरूरी हो गया। [...]
Posted in पुराने लेख, बस यूं ही |
By फ़ुरसतिया on September 12, 2008
[करीब चार साल पहले जब मैंने रविरतलामी का अभिव्यक्ति पत्रिका में ब्लाग के बारे में लेख पढ़ा तो अनायास अपना ब्लाग शुरू करने के लिये कसमसा उठा। जैसे तैसे अपना ब्लाग रजिस्टर करा और लिखने के लिये छटपटाने लगा। की-बोर्ड कहीं मिल के नहीं दे रहा था। खोजते-खोजते फ़िर देबू के पुराने ब्लाग पर छहरी [...]
Posted in इंक-ब्लागिंग, इनसे मिलिये, साक्षात्कार | Tagged देबाशीष, निरंतर, नुक्ताचीनी, पाडभारती, features |
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