पुराने लेख

ये पीला वासन्तिया चांद

ये पीला वासन्तिया चांद

कल डा.अनुराग ने प्रेम गली अति सांकरी पर टिपियाते हुये लिखा- आपकी इस गली में एंट्री का कोई जिक्र नहीं है….बड़ी सफाई से आपने यहाँ भी अपने ज़ज्बातो को कंट्रोल कर लिया है ….कसम उस पहले प्यार की शुक्ल जी…..आज बह जाने दीजिये ..बस कह डालिए ! बाद में और साथियों ने भी डा.साहब की [...]

ब्लाग पोस्ट की चोरी बचाने के कुछ सुगम उपाय

ब्लाग पोस्ट की चोरी बचाने के कुछ सुगम उपाय

पिछली पोस्ट जबरियन छपाई के हसीन साइड इफ़ेक्ट पर ई-स्वामी की टिप्पणी थी- गुरुदेव, सारा दोष साली आपकी स्टाईल का है! बंदे की स्टाईल से लिखने की ट्राई मारो आप, फ़िर किसी का बाप भी किसी अखबार के लिये नही चुरा सकता! अब अगर किसी को ई-स्वामी की स्टाइल देखनी हो तो उनके ब्लाग पर [...]

आशा ही जीवन है

आशा ही जीवन है

आज ज्ञानजी की पोस्ट पढ़ी- डिसऑनेस्टतम समय। इसमें तमाम साथियों की टिप्पणियां हैं। इससे लगा कि हम अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। मैंने सोचा हम भी उदास हो जायें लेकिन इसी समय मुझे अपनी एक पुरानी पोस्ट याद आयी- आशा ही जीवन है। यह लेख उस समय हमने अनुगूंज के नवें लिये [...]

…लीजिये साहब गांधीजी के यहां घंटी जा रही है

[आज कुछ नया लिखने की सोच रहे थे। फ़िर यह लेख याद आ गया। सोचा आज इसे ही फ़िर से पोस्ट किया जाये। दुबारा। आदतन शुरू में ब्लॉगिंग की बातें हर पोस्ट में लिखते थे। सो इसमें भी बाद में आ गयी हैं। अब वे गैर जरूरी लगती हैं। एक तिहाई हिस्सा गैरजरूरी हो गया। [...]