By फ़ुरसतिया on September 12, 2008
[करीब चार साल पहले जब मैंने रविरतलामी का अभिव्यक्ति पत्रिका में ब्लाग के बारे में लेख पढ़ा तो अनायास अपना ब्लाग शुरू करने के लिये कसमसा उठा। जैसे तैसे अपना ब्लाग रजिस्टर करा और लिखने के लिये छटपटाने लगा। की-बोर्ड कहीं मिल के नहीं दे रहा था। खोजते-खोजते फ़िर देबू के पुराने ब्लाग पर छहरी [...]
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By फ़ुरसतिया on August 22, 2008
प्रिय भैया शिव जी, आपकी चिट्ठी मिली। हम उसको कई बार पढ़े। कागजी चिट्ठी की तरह उलट-पुलट के , सहला-उहला के पढ़ने का मन किया तो हम लैपटाप उलट दिये। देखा पीछे सब ’करिया’ था। अचकचा के सामने आ गये। आपकी मुस्कराती छवि दिखी। मन खुश हो गया। आपने लिखा कि हमने आपके नाम, ’शिव’ [...]
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By फ़ुरसतिया on January 27, 2008
आजकल ब्लाग-जगत में बेटियों की के बारे में कई अच्छी-अच्छी पोस्टें आयी हैं। विमल वर्मा जी अपनी बिटिया प्यारी पंचमी के जन्मदिन पर पोस्ट लिखी। वहीं से मैं बेटियों के ब्लाग पर पहुंचा। इसकी एक बेहतरीन पोस्ट में रवीशकुमार जी ने अपनी बिटिया के बारे में लिखते हुये उसके कारण अपने जीवन में आये बदलाव [...]
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By फ़ुरसतिया on July 26, 2007
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By फ़ुरसतिया on July 17, 2007
इंक-ब्लागिंग क्या होती है, कैसे करते हैं, क्यों करते हैं इसके बारे में पर्याप्त लिखा जा चुका है। इसके बावजूद मसिचिट्ठाकारी न तो मसिजीवी कर रहे हैं न फ़सादजीवी। इसका एक कारण तो मुझे यही नजर आता है कि लोगों को इंक-ब्लागिंग के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिये जनहित में मैं मसिचिट्ठाकारी के कुछ [...]
Posted in इंक-ब्लागिंग |
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