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पूड़ियां तेल में गदर नहाई  हुई हैं

पूड़ियां तेल में गदर नहाई हुई हैं

कविता सिखाते हुये गुरुजी से अनौपचारिक बाते होंने लगीं। बोले कि पुराने जमाने में लोग लय,ताल,छंद में कविता लिखते थे। इस तरह की कवितायें देखने में ऐसे लगतीं थीं जैसे स्कूल ड्रेस में बच्चे। देखने में खूबसूरत। एक लाइन में खड़े बच्चे जैसे देखने में सुन्दर लगते हैं वैसे ही लय ताल में लिखी कवितायें [...]

घर से बाहर जाता आदमी

घर से बाहर जाता आदमी

घर से बाहर जाता आदमी घर लौटने के बारे में सोचता है। घर से निकलते समय याद आते हैं तमाम अधूरे छूटे काम सोचता है एकाध दिन और मिलता तो पूरा कर लेता ये भी और वो भी। तमाम योजनायें बनाता है मन में सब कुछ एक आदर्श योजना जैसी बातें। घर से बाहर जाता [...]

मेरे व्यंग्य-लेखन का एक ऐतिहासिक क्षण- श्रीलाल शुक्ल

मेरे व्यंग्य-लेखन का एक ऐतिहासिक क्षण- श्रीलाल शुक्ल

[कल जागरण समूह की संस्था लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी में स्व. श्रीलाल शुक्ल की स्मृति का आयोजन किया गया। लोगों ने उनके बारे में अपनी राय रखी। मैंने भी अपने संस्मरण सुनाये। वहीं पर प्रसिद्ध आलोचक स्व. देवी शंकर अवस्थी की पत्नी आदरणीया कमलेश अवस्थी जी भी आईं थीं। श्रीलाल शुक्ल जी बेटी रेखा [...]

साहित्य के लिये मेरी कसौटी-  श्रीलाल शुक्ल

साहित्य के लिये मेरी कसौटी- श्रीलाल शुक्ल

प्रसिद्ध लेखक श्रीलाल शुक्ल जी का पिछ्ले दिनों 86 वर्ष की अवस्था में देहान्त हो गया। उनके साथ की तमाम यादों के साथ उनकी रचनायें देखते हुये मन किया कि उनकी एक रचना पोस्ट की जाये। साहित्य के लिये अपनी कसौटी बताते हुये श्रीलाल शुक्ल जी ने कैसे अच्छी किस्म से घटिया साहित्य से बचने [...]

ऐसे ही एक पहलवानी भरा इतवार…

ऐसे ही एक पहलवानी भरा इतवार…

इतवार का दिन नौकरी पेशा वालों के लिये आराम का दिन माना जाता है। कुछ इसे बचे काम निपटाने का दिन भी मानते हैं। लेकिन यह वैचारिक मतभेद हर इतवार को खतम हो जाता है क्योंकि बचे काम निपटाने वाले भी अपने काम निपटाने का काम अक्सर अगले इतवार तक के लिये स्थगित कर देते [...]