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सटकर बैठा चांद एक दिन मम्मी से यह बोला

चिठेरा-चिठेरी काफ़ी दिन बाद मिले थे। आपस में बातचीत करने के पहले उन्होंने एक-दूसरे की असलियत पहचानने के लिये पहले से तय पासवर्ड वाक्यों का आदान-प्रदान किया।
चिठेरी:उधार प्रेम की कैंची है!
चिठेरा:यह प्रेम के रिश्तों को काटती ही नहीं संवारती भी है।
 
चिठेरी:आज नकद कल उधार!
चिठेरा:इसी लिये हम पहले ही ले गये यार।
 
चिठेरी:धर्म वह है जो धारण [...]

सीजर हम अब भी तेरे साथ!

विवेक सिंह ने कालजयी कविता ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ? लिख डाली आज। आज हमारे दफ़्तर में ब्रूटस आया और ये कविता देकर निकल लिया। हमसे कहा कि अपने ब्लाग पर काहे नहीं पोस्ट करते! बोला आप कर दो अपने ब्लाग पर। जब अपना ब्लाग बनायेंगे तो पोस्ट करेंगे। [...]

….भेजे क्यों मीठे सपने

रात सो गये थोड़ा जल्दी, हालांकि थके नहीं थे ज्यादा,
तीन हीरोइनें ले गयीं, हमसे सपन-मिलन का वादा।
हमने उनको बहुत बताया, हैं बहुत बिजी हम भईया,
बात न मानी वे सुंदरियां, बोली मत करो निराश फ़ुरसतिया॥
बात बताई श्रीमती को, फ़िर तो उनकी खिलखिल गूंजी,
चले खरीदने चांदमहल हो, है घर में भांग न भूंजी।
मिलना जब उन [...]

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