By फ़ुरसतिया on November 24, 2007
गोविन्द उपाध्यायजी ने जब अपने बचपन के संस्मरण लिखना शुरू किया था तो स्वामीजी की प्रतिक्रिया थी- हटो-बचो छा गए हम!हिंदी ब्लागलेखन जब अपनी नई उंचाईयाँ छूता है मेरा सीना गर्व से फूल जाता है. देखो बच्चों इसे कहते हैं “लेखन” इस की टक्कर का कुछ लाओ तो जाने!! गोविंद उपाध्यायजी को पहली बार पढ [...]
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By फ़ुरसतिया on February 7, 2007
[ऒ. हेनरी की पिछली कहानी पर हमारे रवि रतलामी भाई की फरमाइस थी-ओ.हेनरी की एक और कहानी - कोई तीस साल पहले पढ़ी थी - जिसमें एक निराश्रित व्यक्ति आश्रय के लिए जेल जाना चाहता है और वह बहुत सा गैर कानूनी काम करता है परंतु जेल जा नहीं पाता , और जैसे ही वह [...]
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By फ़ुरसतिया on February 3, 2007
[ऒ.हेनरी, प्रख्यात अमेरिकी कहानी लेखक 'विलियम सिडनी पोर्टर' का उपनाम है। उनका जन्म ११ सितम्बर, १८६२ के दिन ग्रीन्सबरो एन.सी. में हुआ और मृत्यु ५ जून, १९१० को न्यूयार्क में। पन्द्रह वर्ष की उम्र में हेनरी ने स्कूल छोड़ दिया लेकिन पढ़ने-लिखने की आतुरता नहीं छूटी। ऒ.हेनरी ने मानवीय संवेदनाऒं की अद्भुत कहानियां लिखीं हैं।अपनी [...]
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By फ़ुरसतिया on November 3, 2006
[अभी पिछले ही माह एक हफ्ते पहले प्रत्यक्षा ने अपना जन्मदिन मनाया। उसी दिन उनको एक खास उपहार मिला। नया ज्ञानोदय में उनकी छ्पी कहानी 'हनीमून' मय पत्रिका उसी दिन उनको मिली। हालांकि यह कहानी पहले भी नेट पत्रिका हिंदीनेस्ट में छप चुकी थी लेकिन अपनी छपी कहानी को अपने हाथ से छूने और देश [...]
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By फ़ुरसतिया on August 27, 2006
[हमने बताया था कि हिंदी की प्रख्यात साहित्यिक पत्रिका वागर्थ के अगस्त ,२००६ अंक में हमारे ब्लागजगत की जानी-पहचानी लेखिका तथा निरंतर की संपादक मंडली की सदस्या प्रत्यक्षा की कहानी छपी है। कुछ लोगों ने इसे पढ़ना चाहा है। वैसे कहने को तो वागर्थ कहने को तो आनलाइन पत्रिका है लेकिन महीनों से पुराना अंक [...]
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