- …मगर अब साजन कैसी होली
- लिखौं हाल मैं ब्लागरगण का, माउस देवता होऊ सहाय
- …जहां भी खायी है ठोकर निशान छोड आये
- जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
- मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता
- टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
- बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
- …अथ कोलकता मिलन कथा
- बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
- नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
कविता
टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
पिछली पोस्ट में हिमांशु और अमरेन्द्र ने गीतकार लवकुश दीक्षित का गीत टुकुरु-टकुरु देउरा निहारै बेईमनवा सुनाने का आग्रह किया था। मैं पहले भी इस गीत को लवकुशजी की आवाज में ही पॉडकास्ट कर चुका हूं। लेकिन उस समय जिस मुफ़्तिया साफ़्टवेयर का प्रयोग किया था वह बाद में कामर्शियल हो लिया और [...]
सटकर बैठा चांद एक दिन मम्मी से यह बोला
चिठेरा-चिठेरी काफ़ी दिन बाद मिले थे। आपस में बातचीत करने के पहले उन्होंने एक-दूसरे की असलियत पहचानने के लिये पहले से तय पासवर्ड वाक्यों का आदान-प्रदान किया।
चिठेरी:उधार प्रेम की कैंची है!
चिठेरा:यह प्रेम के रिश्तों को काटती ही नहीं संवारती भी है।
चिठेरी:आज नकद कल उधार!
चिठेरा:इसी लिये हम पहले ही ले गये यार।
चिठेरी:धर्म वह है जो धारण [...]
सीजर हम अब भी तेरे साथ!
विवेक सिंह ने कालजयी कविता ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ? लिख डाली आज। आज हमारे दफ़्तर में ब्रूटस आया और ये कविता देकर निकल लिया। हमसे कहा कि अपने ब्लाग पर काहे नहीं पोस्ट करते! बोला आप कर दो अपने ब्लाग पर। जब अपना ब्लाग बनायेंगे तो पोस्ट करेंगे। [...]
….भेजे क्यों मीठे सपने
रात सो गये थोड़ा जल्दी, हालांकि थके नहीं थे ज्यादा,
तीन हीरोइनें ले गयीं, हमसे सपन-मिलन का वादा।
हमने उनको बहुत बताया, हैं बहुत बिजी हम भईया,
बात न मानी वे सुंदरियां, बोली मत करो निराश फ़ुरसतिया॥
बात बताई श्रीमती को, फ़िर तो उनकी खिलखिल गूंजी,
चले खरीदने चांदमहल हो, है घर में भांग न भूंजी।
मिलना जब उन [...]
पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई
पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई,
नैंन-सैन चुंबन की ले-दे फ़टाफ़ट हुई।
हवायें बेचारी सब गुमसुमा सी गईं
शाम मारे शरम के हो गई सुरमई
भौंरें भागे सभी सर पे धरे अपने पंख
तितलियां फ़ूल में बस दुबक सी गयीं।
कली जो सकुचाई खिल रही थी उधर
वो बेचारी सहमकर झटक सी गयी।
फ़िर तितलियां भौंरों से [...]






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