By फ़ुरसतिया on March 5, 2012
कल इतवार को छुट्टी थी सो अपन उठाये मोटरसाइकिल चले गये भेड़ाघाट। दोस्तों ने कुल दूरी बताई गयी 25 किमी। जहां-जहां पूछते गये वहां तक तो मामला सीधा रहा। एक जगह पूछा नहीं- मारे कान्फ़ीडेंस के मारे । बस वहीं आगे निकल गये। जहां मुड़ना था वहां से दस किलोमीटर आगे निकल गये। आत्मविश्वास की [...]
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By फ़ुरसतिया on February 25, 2012
दो दिन पहले वेगड़जी से मिलना हुआ। वेगड़जी की किताब ’तीरे-तीरे नर्मदा’ पढी तो मन किया उनकी बाकी दो किताबें भी पढ़ी जायें। पता चला कि किताबें या यूनिवर्सल में मिल सकती हैं या फ़िर वेगड़जी के यहां। सोचा जब लेनी ही हैं तो वेगड़जी से ही क्यों न ली जायें। उनसे मिलना भी हो [...]
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By फ़ुरसतिया on January 12, 2012
आजकल जाड़े का मौसम है। सब कुछ सिकु्ड़ा-सिकु्ड़ा सा हो रखा है। सर्दी के पहले अन्ना जी का आन्दोलन और क्रिकेट टीम की जीत की भूख बहुत फ़ैली थी। जाड़े के आते ही दोनों सिकुड़ गये। और तो और जाड़े के चलते मंहगाई के आंकड़े तक थोड़ा सिकुड़ गये। तेल के दाम ऊपर जाने वाले [...]
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By फ़ुरसतिया on November 18, 2011
घर से बाहर निकलते ही आदमी ’स्टेटस जागरूक’ हो जाता है। क्षण-क्षण अपना ’स्टेटस’ अपडेट करता है। खुद अपना प्रवक्ता बन जाता है। घुमा-फ़िरा के दुनिया भर को बताता है कि हम यहां हैं, वहां हैं, ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। उसको लगता है कि अगर उसने दुनिया भर को अपनी स्थिति [...]
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By फ़ुरसतिया on November 8, 2011
[कल जागरण समूह की संस्था लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी में स्व. श्रीलाल शुक्ल की स्मृति का आयोजन किया गया। लोगों ने उनके बारे में अपनी राय रखी। मैंने भी अपने संस्मरण सुनाये। वहीं पर प्रसिद्ध आलोचक स्व. देवी शंकर अवस्थी की पत्नी आदरणीया कमलेश अवस्थी जी भी आईं थीं। श्रीलाल शुक्ल जी बेटी रेखा [...]
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