- …मगर अब साजन कैसी होली
- लिखौं हाल मैं ब्लागरगण का, माउस देवता होऊ सहाय
- …जहां भी खायी है ठोकर निशान छोड आये
- जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
- मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता
- टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
- बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
- …अथ कोलकता मिलन कथा
- बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
- नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
संस्मरण
बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
[आज बसंत पंचमी को निरालाजी का जन्मदिन मनाया जाता है। इस मौके पर पहले यह लेख फ़िर से पोस्ट कर रहा हूं- निरालाजी को विनम्रता पूर्वक याद करते हुये। मास्टर साहब की टिप्पणी ( आज बसंत पंचमी पर सामयिक लगा यह लेख सो खिंचे चले आये !
जानकारी मिली ! आभार!) ने इसके बारे [...]
नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
गुलाबी शहर में मिलना कुश से और लविजा के पापा से
बीता साल मजेदार बीता। तमाम अच्छे अनुभव जुड़े। उनके बारे में फ़िर कभी विस्तार से लिखेंगे। फ़िलहाल आप गये साल और नये साल के कुछ फ़ोटो देखिये। गये साल के आखिरी दिनों में राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, अजमेर ,पुष्कर जाना हुआ। जयपुर में कुश [...]
चिट्ठाचर्चा के बहाने कुछ और बातें
नये चर्चाकार साथी
चिट्ठाचर्चा से संबंधित पिछली पोस्ट में मैंने लिखा था–“चिट्ठाचर्चा के बारे में आपकी प्रतिक्रिया, सलाह,सुझाव, आलोचनायें आमंत्रित हैं। अगली पोस्ट में मैं कुछ सवाल जो पहले उठाये गये हैं उनके बारे में चर्चा करूंगा।”
प्रतिक्रिया, सलाह ,सुझाव ,और आलोचनाओं का ओपेन टेंडर करने पर केवल एक सलाह आई। लवली बोली–सुन्दर है यादों का [...]
चिट्ठाचर्चा –यादों का एक सफ़र
चिट्ठाचर्चा के चर्चाकार
ऊपर से नीचे बायें से दायें पहली पंक्ति जीतेन्द्र चौधरी, समीरलाल,आलोक कुमार ,सृजन शिल्पी,रविरतलामी, विपुल जैन, तुषार जोशी, अभय तिवारी, पंकज बेंगाणी, संजय बेंगाणी, देबाशीष, राकेश खण्डेलवाल, अतुल अरोरा, तरुण, मनीष कुमार, रचना बजाज , आशीष [...]
…..इति श्री इलाहाबाद ब्लागर संगोष्ठी कथा
इलाहाबाद ब्लागर संगोष्ठी सम्मेलन की लानत-मलानत अपने आखिरी दौर में है। मामला आखिरी सांसें ले रहा है। आई.सी.यू. में है। कभी भी दम तोड़ सकता है। इससे पहले कि मामला आखिरी सांस ले, सोचते हैं कि हम भी इसके अंतिम दर्शन कर लें। बाद में तो फ़ोटुयें रह जायेंगी। किस्से-कहानियों में फ़ड़फ़ड़ायेगी गोष्ठी।
इस [...]






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