2006

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बेल्दा से बालासोर

बेल्दा में हम एक मंदिर में रुके थे। सबेरे वहां से नाश्ता करके हम आगे के लिये चल दिये। थोड़ी ही देर में हम उड़ीसा राज्य की सीमा पर मौजूद थे। “उड़ीसा आपका स्वागत करता है” के पत्थर के दोनों तरफ खड़े दिलीप गोलानी और विनय अवस्थी के फोटो हमने खींचे थे। २३ साल पहले [...]

उभरते हुये चिट्ठाकार

हमने राग दरबारी का अगला भाग पोस्ट करके आराम की सांस लेना शुरू ही किया था कि तरकश के इस तीर ने हमारे आराम का ‘हे राम!’ कर दिया। हम ‘सर्वश्रेष्ठ उभरता हुआ चिट्ठाकार – 2006′ के चुनाव के जज बना दिये गये। बनाये तो हम मुख्य जज गये थे लेकिन जब हमने बताया कि [...]

देश का पहला भारतीय तकनीकी संस्थान

काफ़ी दिनों के बाद आज मन किया फिर से अपने साइकिल यात्रा के किस्से सुनाने का। जिन साथियों को इससे पहले के किस्से पढ़ने का मन करे वे जिज्ञासु यायावर श्रेणी की पोस्टें देख सकते हैं। कलकत्ता से हम सबेरे ही सबेरे नाश्ता करके निकल लिये थे। हमारी अगली मंजिल थी खड़गपुर। खड़गपुर कलकत्ता से [...]

हंसी तो भयंकर छूत की बीमारी है

पिछली पोस्ट में मैंने अपनी बहुत पहले की लिखी एक कविता कम तुकबंदी ज्यादा का जिक्र किया था। इसे हमने सालों पहले होली के मौके पर लिखा था। कुछ लोगों को यह कुछ पसंद आयी। अपने इस भ्रम की आड़ में मैं यह कविता यहां पूरी की पूरी पेश कर रहा हूं। जो लोग इसे [...]

इतना हंसो कि आंख से आंसू छलक पड़े

लोग कहते हैं कि ‘असंभव’ शब्द मूर्खों के शब्दकोश में पाया जाता है। एक स्वयंभू ज्ञानी को अपने शब्दकोश में ‘असंभव’ दिख गया तो महीनों परेशान रहा। उसको समझ में नहीं आ रहा था कि इतने ज्ञानी होने के बावजूद उसके शब्दकोश में मूर्खता कैसे आ गयी! किसी ने उसे समझाया भी कि ये उसी [...]