By फ़ुरसतिया on February 27, 2010
तीन दिन पहले ऑफ़िस में बैठे थे। पता चला सचिन 186 पर खेल रहे हैं। काम भर की शाम हो गयी थी। घर चले आये। टेलीविजन के सामने पसर गये। धोनी अपना बचपना दिखा रहे थे। हां यह बचपना ही है भाई! दूसरे छोर पर आपके साथी द्वारा इतिहास बनने का इंतजार सारा देश कर [...]
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By फ़ुरसतिया on February 19, 2010
दो दिन पहले रमानाथ अवस्थीजी के गीतों का कैसेट मिला तो उसी के साथ एक और दुर्लभ कैसेट मिला। इस कैसेट में हमारे विवाह के अवसर पर गाया गया स्वागत गीत और साथ में कई और मंगलगीत टेप हैं। यह कैसेट कई-कई बार खोया और जितने बार खोया उतने ही बार मिल भी गया। इस [...]
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By फ़ुरसतिया on February 18, 2010
Posted in पाडकास्टिंग, मेरी पसंद | Tagged गगन, गीत, पंख, रमानाथ अवस्थी
By फ़ुरसतिया on February 15, 2010
पिछली पोस्ट में हिमांशु और अमरेन्द्र ने गीतकार लवकुश दीक्षित का गीत टुकुरु-टकुरु देउरा निहारै बेईमनवा सुनाने का आग्रह किया था। मैं पहले भी इस गीत को लवकुशजी की आवाज में ही पॉडकास्ट कर चुका हूं। लेकिन उस समय जिस मुफ़्तिया साफ़्टवेयर का प्रयोग किया था वह बाद में कामर्शियल हो लिया और हमारी पोस्ट [...]
Posted in कविता, पाडकास्टिंग, बस यूं ही | Tagged अवधी, गीत, देवर, देवरानी, भौजी, लवकुश, होली
By फ़ुरसतिया on February 14, 2010
हम इधर काम की कमी के चलते जरा बिजी जैसा कुछ हो गये। इस बीच देखते हैं कि ससुरा बसन्त आकर छा गया है। लोग बिना स्माइली लगाये हंसी-मजाक की बातें करने लगे हैं। चुहलबाजी के भाव चमक गये हैं। जैसे कोई ब्लॉगर ब्लॉगिंग छोड़ने के बाद लोगों के अपनापे के चलते वापस आ जाता [...]
Posted in बस यूं ही | Tagged कली, बसन्त, भौंरा, फ़ूल
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