- …मगर अब साजन कैसी होली
- लिखौं हाल मैं ब्लागरगण का, माउस देवता होऊ सहाय
- …जहां भी खायी है ठोकर निशान छोड आये
- जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
- मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता
- टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
- बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
- …अथ कोलकता मिलन कथा
- बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
- नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
कली
बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
हम इधर काम की कमी के चलते जरा बिजी जैसा कुछ हो गये। इस बीच देखते हैं कि ससुरा बसन्त आकर छा गया है। लोग बिना स्माइली लगाये हंसी-मजाक की बातें करने लगे हैं। चुहलबाजी के भाव चमक गये हैं। जैसे कोई ब्लॉगर ब्लॉगिंग छोड़ने के बाद लोगों के अपनापे के चलते [...]
पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई
पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई,
नैंन-सैन चुंबन की ले-दे फ़टाफ़ट हुई।
हवायें बेचारी सब गुमसुमा सी गईं
शाम मारे शरम के हो गई सुरमई
भौंरें भागे सभी सर पे धरे अपने पंख
तितलियां फ़ूल में बस दुबक सी गयीं।
कली जो सकुचाई खिल रही थी उधर
वो बेचारी सहमकर झटक सी गयी।
फ़िर तितलियां भौंरों से [...]






नई टिप्पणियाँ