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गंध

पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई

पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई

By फ़ुरसतिया on September 25, 2009

पुष्प की गंध से कुछ खटक सी गई, नैंन-सैन चुंबन की ले-दे फ़टाफ़ट हुई। हवायें बेचारी सब गुमसुमा सी गईं शाम मारे शरम के हो गई सुरमई भौंरें भागे सभी सर पे धरे अपने पंख तितलियां फ़ूल में बस दुबक सी गयीं। कली जो सकुचाई खिल रही थी उधर वो बेचारी सहमकर झटक सी गयी। [...]

Posted in कविता | Tagged कली, गंध, चुंबन, तितलियां, पुष्प, भौंरों | 29 Responses

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