- …मगर अब साजन कैसी होली
- लिखौं हाल मैं ब्लागरगण का, माउस देवता होऊ सहाय
- …जहां भी खायी है ठोकर निशान छोड आये
- जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
- मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता
- टुकुर-टुकुर देउरा निहारै बेईमनवा
- बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
- …अथ कोलकता मिलन कथा
- बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में
- नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें
प्रियंकर
…अथ कोलकता मिलन कथा
पिछ्ले दिनों कोलकता जाना हुआ। हल्का सा अचानक। हल्का सा अचानक इसलिये जाने के एक हफ़्ते पहले ही दो दिन की एक ट्रेनिंग के लिये हमें सिटी ऑफ़ जॉय जाने को कहा गया। हम तुरंत तैयार हो गये। दुर्योधन के बायोग्राफ़र और चौपटस्वामी प्रियंकरजी को इत्तला दे दिये कि आ रहे हैं कलकत्ता। फ़ूट सको [...]






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