मस्तिष्क और शराब

मस्तिष्क के लिये शराब थोड़ी मात्रा में आवश्यक हो सकती है ऐसा एक शोध में बताया गया है। इसके अनुसार अल्ज़ाइमर जैसी गंभीर बीमारियों पर अच्छा असर हो सकता है, पर लेना थोड़ी मात्रा में ही होगा वरना मामला उल्टा हो सकता है, क्योंकि अत सर्वत्र वर्जयेत। ये अध्ययन चूहों पर किया गया था। थोड़ी मात्रा मेन लेने पर इसका लीवर पर भी कोई अन्यथा प्रभाव नहीं पड़ता है।

4 responses to “मस्तिष्क और शराब”

  1. saurabh

    yeh bilkul sahi baat hai ki thodi matra main agar alcohol liya jaye to bahut achha hota hai sharir ke liye,

  2. आशीष

    ये सब बातें कभी भी उलट हो सकती हैं ।
    ये सारे शोध पानी पर खींची हुई लकीरें है ।

    फिर हर आदमी के लिए कितना थोड़ा है ये कैसे निश्चित करेंगे।
    और निश्चित है हर व्यक्ति के लिए ये मात्रा अलग होगी।

    और शराब जैसी चीज को दवा की तरह बताना विरोधाभासी है क्योंकि, ओशो उवाच, शराब का मजा ही बिना मात्रा के लेने में है।

  3. kali

    aur liye ja, aur piye ja
    kahan naap ker rukta hai,
    sehat sudhre, sehat bigede
    madirayla aakhar hi dum tutha hai
    maad ke aise matwalon ki
    raah dekhti madhushala

  4. श्रीश । ई-पंडित

    बकवास है, ये शोध कंपनियों द्वारा प्रायोजित होते हैं। शराब से इन्सान का कुछ भला नहीं हो सकता।

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