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असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें?
बात नये या पुराने चिट्ठाकार की नहीं है – अपनी विधा की तरफ़ गंभीर और समर्पित व्यक्ति की है. असली चिट्ठाकार का ध्यान आकर्षित करना और उसे प्रभावित करना आसान नहीं है, चाहे वो नया है या पुराना.
अब आप अगर ये नहीं जानते समझते की आपको सही व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर लाने की जरूरत क्यों है – तो आप इस लेख को कुछ साल बाद पढने के लिये छोड दें. अगर आपको सबका या हर एक का ध्यान अपनी ओर लाना है तो भी आप इस मसौदे से कुछ हासिल कर सकने वाले नहीं – ये “हाऊ टू गेट मोर अट्टेंशन” छाप लेख नहीं है.
अच्छे ब्लागर्स वो चाहे किसी भी भाषा में लिखें – वे लिखने से कहीं अधिक पढते हैं, पढने से अधिक करते हैं. पढना हर चीज़ को दिशा देता है - अत: वे अच्छे कंटेंट के पारखी होते हैं और उसकी मदद से अपना ज्ञान और समझ बढानें में लगे होते हैं.
इसी लिये सक्रीय ब्लागर्स अच्छे लेखन, व्यक्तित्व और अभिरुचियों वाले दूसरे लोगों से आन-लाईन जुडना पसंद करते हैं. पुराना नीयम है की ‘एक रंग के पंछी साथ उडते हैं’.
ये कुछ तरीके हैं जिनसे आपको आनलाईन अन्य गुणीजन ब्लागर्स से मेलजोल बढानें में आसानी होगी -
- सार्थक टिप्पणियाँ करें: आपकी प्रतिक्रिया की गुणवत्ता से पता चलता है की आपने लेखन को किस तरह समझा है. टिप्पणी लेख पढ लिया जी की पावती मात्र नहीं है. अगर आपकी टिप्पणी उसके लेख में दी गई जानकारी में कुछ जोडती है संक्षिप्त रूप में ही सही, तो उसकी मदद करती है – जिसकी वो कद्र करता है.
- Facebook, LinkedIn, FriendFeed, Flickr, Twitter, del.icio.us, Digg - अच्छे ब्लागर्स इन जैसी साईट्स का खुल कर प्रयोग करते हैं और इनके माध्यम से एक दूसरे को आसानी से ये बता पाते हैं की उन्हें खुद ’फ़ूड फ़ार थॉट’ कहां से मिल रहा है -वो स्वयं क्या और क्यों पढ या देख रहे हैं. वो किन समूहों से जुडे हैं. आप किसी अच्छे ब्लागर से उसकी जानकारी का स्त्रोत मांगिये वो अधिक खुश होगा मदद कर के.
- ब्लागरोल्स काफ़ी नहीं : अगर आप सबके मित्र हो तो किसी के भी मित्र नहीं हो! कुछ लोगों के ब्लागरोल्स डायरेक्ट्री अधिक लगते हैं. अगर आपको किसी का लेखन अच्छा लगा और आप जानते हैं कि किसी मित्र या संपर्क को वह जानकारी काम आएगी तो पोस्ट की कडी मित्र को भेजें, उसे डिग्ग करें और दोनो संपर्कों को करीब आने में मदद करें – आप देखेंगे की इस तरह का फ़ोकस्ड काम आपको एक गंभीर सह-ब्लागर सिद्ध करता है.
- लचीला रुख अपनाएं: meebo, pidgin जैसी सुविधाएं आपको अगल अलग चैट क्लाईंट प्रयोग करने वालों से एक साथ जुडने का मौका देती हैं – इस प्रकार आप दूसरों को अपने समूह में लाने के लिये उन्हें ३ प्रकार के साफ़्टवेयर चलाने के लिये मजबूर नहीं करते और संपर्क आसान रहता है.
- कडियों का महत्व समझें: लेख को पूरा पढें और कडियों समेत पढें - अच्छे ब्लागर्स अपने लेखों में कडियों की झडी नहीं लगते - अगर अच्छे ब्लागर नें कोई कडी दी है तो वो उस कडी की सामग्री को दोहराने से बचते हुए आप तक पूरी बात लाना चाहता है. आपकी प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है की आपने लेख को पूरा पढा है और आप सचमुच एक सरसरी में ५० ब्लाग्स पढने वाले पाठक नहीं हैं – चूंकी कोई भी अच्छा ब्लागर बहुत ज्यादा संख्या में पढे जाने से बहुत अच्छी तरह प्रबुद्ध पाठकों द्वारा पढा जाना ज्यादा पसंद करता है .
मैंने ये लेख क्यूं लिखा?
रातों रात जान-पहचान लिये जाने के हडबड में टिप्पणी प्रसाद बांटने से अधिक जरूरी है रचनात्मक और क्रियात्मक सहयोग - मात्र लेखन या मनोरंजन के लिये लिखने वाले ब्लागर्स और अपनी विषयवस्तु, स्किल और एक्सपर्टीज से दूसरों को फ़ायदा पहूंचाने वाले दोनो अलग अलग प्रकार के लोग हैं. अगर ब्लागिंग से अधिक आप अपनी भाषा में कुछ काम का प्रस्तुत करना चाहते हैं तो आपको इस दूसरे प्रकार वालों में से एक होना पडेगा ही.



















ज्ञानवर्धक एवं विचार योग्य आलेख. आभार.
very nicely written article and very appropriate too
कंटेंट कैसे लाया जाये? मैं अपना तरीका आपको बताता हूं। आमतौर पर चलते-बोलते कुछ विचार मन में आते हैं। इन्हीं में से कुछ विचार चिट्ठे में लिखने लायक होते हैं। मैं ऐसा कोई विचार मन में आते ही उसे एक छोटी सी पुस्तिका में लिख लेता हूं। यह पुस्तिका हमेशा मेरी जेब में होती है। हर दिन एक नयी चीज़ पर लिखने को मिलता है इस छोटी सी “तकनीक” से!
accha hai ,satik hai aurhum jaise naye logo ke liye madagaar bhi
बहुत रोचक जानकारी ..ज्ञानवर्धक आलेख ..
umeed hai ise bhi log padenge aor gaur farmaayenge…..
स्वामी की के आश्रम में ज्ञान प्राप्ति हुई.:-)
पूरे लेख को पढ़ने के बाद पता चला कि हम आपको बतायें कि हमने यह लेख पढ़ लिया है और पूरे मनोयोग से पढ़ा है.लेकिन पढ़ने के बाद भी हम दृढ़-संकल्प है कि हमें असली चिट्ठाकार नहीं बनना है.हम नकली चिट्ठाकार बनके ही प्रसन्न हैं.
वैसे प्रवचन चालू आहे.
बहुत गम्भीरता से गम्भीर ब्लॉगर बनने की सोच रहा हूँ.
बहुत अच्छा और साफ लेख है आसानी से पढ लीया।
बहुत अच्छा लगा।
आपका होस्टींग स्पेस कीतना है?
क्यो की मै भी एक साईट लेने वाला हूं पर ये ही नही सोच पा रहा हूं की कीतना सपेस मेरे लीये जरूरी होगा।
मूझे बस 60 से 70 पेज डालने हैं अपनी साईट मे अगर आपको अनूमान पता हो तो मूझे जरूर बताऎं।
ये पीछ्ले टीप्पडी पर मेरा आईकन संकोच मे डूबे हूवे दूखी आतमा की तरह क्यो दीख रहा है
अच्छे टिप्पणीकारों की तारीफ मे लिखी इस पोस्ट के लिये शुक्रिया!
c/स्त्रोत/स्रोत
स्वामी जी, लिखे तो चकाचक हैं, उस पर तो कोई टिप्पणी देते नहीं बन रही है। बाकी इस थीम को देख लें एक बार, कौनो गड़बड़ दिखे है, इतनी सारी टिप्पणियाँ होने के बावजूद यह कह रही है “No Responses to असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें?”, ही ही ही!
यह “No Responses” कमेन्ट्स वाली टेम्प्लेट फाइल में हार्डकोडिड लगता है। इसके स्थान पर comments_number() टेम्प्लेट टैग प्रयोग होना चाहिए, देखें कि वह है कि नहीं। यदि नहीं है तो लगा लीजिए, प्रयोग करने की विधि लिंक पर क्लिक करके देखें।
links lagane ka tareeka bhee batayen ya koi post ho to link de den
ज्ञानवर्धक एवं विचार योग्य आलेख!11111
Sahee kahaa. Agree!
वैसे मैं स्वयं नौसिखिया हूँ.
हाल ही में टाईम्स ऑफ़ इंडिया में पढने को मिला था की अच्छे ब्लॉगर धडाधड नही छापते वस्तुतः वही लिखिए जो आपको स्वयं कुछ समय बाद भी पठनीय लगे. सामग्री जितनी ठोस और रोचक होगी उतनी ही प्रचलित होगी.
आपका यह लेख मेरे लिए ज्ञानवर्धक रहा.
सही तरह से पोस्ट को टैग करना भी एक कला है, कभी अवसर मिले तो दो पंक्तियाँ कृपया उस पर भी लिखें.
धन्यवाद्
मैं तो अभी इस दुनिया में नयी नवेली हूँ, स्वामी जी से ज़रा ब्लॉगिंग के क ख ग सीख लिए हमने भी, शुक्रिया जी शुक्रिया.
लेकिन स्वामी जी मैं इस कार्टून जैसी तो बिलकुल नहीं दिखती हूँ, इसको संपादित करने का कोई तरीका है क्या ?
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