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क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?
ध्येय वाक्य: जो दिख रहा है वही बिक रहा है!
आमतौर पर शुरुआत आनन-फ़ानन में होती है – इन्टरनेट पर दूसरों के ब्लाग्स देख कर आपको अपना ब्लाग बनाने की सूझी और आपने चंद चटके चटकाए, Blogger.com पे अपना खाता खोला.. पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक समय शायद अपने ब्लाग का नाम चुनने में लगा हो!
देखादेखी में दूसरों के ब्लाग्स पर दिखे तामझाम अपने ब्लाग में भी डालने के लिये आप उद्यत हो गए और आपके सादे ब्लाग की शक्ल बदलने लगी. कुछ चिट्ठे लिखे और टिप्पणियां कीं और ब्लागिंग शुरु. तो ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म का चुनाव नहीं किया गया – जो पहला विकल्प मिला वही ले लिया गया.
धीरे-धीरे आपको अपने ब्लाग का जो गुण सबसे अच्छा लगता था – तुरंत छपना-तुरंत पढवाना वही सबसे बुरा भी लगने लगता है – क्योंकि आपको ये पता चलने लगता है की धडाधड छपने के युग में आपका चिट्ठा पुराने लेखों की रद्दी-टोकरी अधिक हो रहा है चाहे वे लेख और उन पर प्राप्त टिप्पणियां आपको कितने ही प्रिय हों.
सब गुजरते हैं इस दौर से, तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों प्रकार के ब्लागर्स - चूंकि आपको अपने पास उपलब्ध विकल्पों की जानकारी नहीं होती और आप ‘सब कुछ रेडीमेड है’ जान कर मैदान में उतर जाते हैं.
धीरे-धीरे आप तय करने लगते हैं की आप अपनी साईट को किस रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं. वेब-लॉग में सब कुछ जल्दी पुराना होने लायक हो जरूरी नहीं है – तो उसे ब्लाग का अगले ही दिन दफ़न हो चुकने वाला हिस्सा बनाएं ही क्यों? और किसी खास लेख की शेल्फ़-लाईफ़ कैसे बढाएं?
इस लेख का ध्येय किसी एक ब्लॉगिंग प्लेटफ़ार्म की पैरवी करना नहीं लेकिन बिल्कुल सादे ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म से मात्र इसलिये नाता जोडे रखना की वो मुफ़्त का जुगाड है आपके अच्छे लेख की शेल्फ़ लाईफ़ को प्रभावित कर सकता है. माना की हर एक कोई कालजयी कृति नहीं लिख रहा लेकिन अगर कुछ अच्छा है तो उसे तवज्जो से परोसा जाना संभव होना चाहिए.
अपने ध्येय को जानिए -
- मेरे ब्लाग का ध्येय क्या है और क्या ब्लाग के अलावा कोई और ज़रिया मुहैय्या है?
- क्या मैं लंबे समय तक ब्लागिंग करने वाला/वाली हूं?
- मैं शौकिया ब्लागिंग करता हूं या इसकी कोई व्यवसायिक वजह भी है?
- क्या मैं अपने ब्लाग पर एड लगाना चाहूंगा?
- मैं तकनीकी रूप से कितना/कितनी सक्षम हूं?
- क्या मेरे लिये ब्लागिंग इतनी जरूरी है की उसके लिये मेरे आर्थिक बजट में स्थान हो?
मान लिया जी की आप धुरंधर लिक्खाडी मोड में हैं और अपने लेखों की शेल्फ़-लाईफ़ को ले कर चिंतित भी और आपने ऐसे लेख लिख लिये हैं जिन्हें खोजा जाना आसान होना चाहिए..तो फ़िर आगे बढें?
आज ब्लागिंग में आपको चाहिए इनकी समझ – मिन्यूज़, केटेगरीज़, सेक्षन्स, टैग्स, टैब-आधारित प्रदर्शन, स्टेटिक पेजेस, रेटिंग्स, लेटेस्ट, पापुलर पोस्ट, सिमिलर पोस्टस, फ़ीचर्ड पोस्ट, स्टिकी पोस्ट, लाईटबाक्स - ये सारी सुविधाएं ताकी ब्लाग पर आ चुका व्यक्ति चंद मिनट और रुके – मात्र केलेंडर दिखाने के दिन लद गए हैं!
अपने विकल्पों को जानिए -
मुफ़्त में मस्ती हो या पैसा खर्च करवाने की या व्यावसायिक सफ़लताएं दिलवाने की बात, ब्लाग्स और ब्लागर्स नें काफ़ी दिन देख लिये हैं ..और हर प्रकार के ब्लागर को उसकी जरूरत के अधिकतर उपाय उपलब्ध हैं. अब हम एक एक कर के उपरोक्त प्रश्नों से निपटते हैं.
- अगर आपका ध्येय लोगों को ऐसी जानकारी देना है जिसने रोज बदलना नहीं है तो आप ब्लाग ना बनाएं. मसलन आपको रामचरित मानस इन्टरनेट पर डाल देना है – इसके लिये ब्लाग की जरूरत नहीं है बल्कि श्रेणीबद्ध तरीके से दिखाई जा सकने वाली विकी की जरूरत है – जिस पर लोग अगर किसी दोहे में कोई सुधार सुझाना हो तो सुझा सकें और कर सकें. फ़ुटनोट और साईडनोट हो सकें. ब्लाग के विकल्पों को जानिये – ब्लाग जानकारी संजोने का एक फ़ार्मेट या खाका भर है.
- अगर आप लंबे समय तक ब्लाग लिखने की सोच रहे हैं और तकनीकी रूप से पिछडा महसूस करते हैं तो ब्लाग लेखन सहायतार्थ चलाए जाने वाले शौकिया समूहों की सदस्यता जरूर लें – जैसे की हिंदी वालों का गूगल चिट्ठाकार समूह है. पुराने प्रश्नों में अपने काम की जानकारी ढूंढिये, शायद ही आपको कोई ऐसी समस्या आए जो औरों को ना आ चुकी हो. दूसरों द्वारा पूछे गए प्रश्नोत्तरों से काफ़ी सीख मिलती है. मसलन केटेगरी/श्रेणी और टैग्स के प्रयोग का साईट-सर्च और del.icio.us जैसे सुविधाओं से क्या लेना देना है? एक सही टैग आपके लेख को ताज़ा बनाए रख सकता है- अगर सही प्रयोग हो.
- अगर आप व्यवसायिक उद्देश्यों से ब्लागिंग करना चाहते हैं तो आपको देय और सशुल्क सुविधाओं के बारे में बेहतर जानना समझना होगा. मसलन होस्टिंग, डामेन नेम रजिस्ट्रेशन, रजिस्ट्रेशन प्रायवसी,मेनेज्ड या अनमेनेज्ड सुविधाओं के बारे में जानना. मेटा-टैग्स, सर्च इन्जिन्स, ब्लागिंग टूल्स और फ़ीचर्स के बारे में जानना. फ़ीड रीडर्स, एग्रीगेटर्स के बारे में जानना ताकी आप तक पहूंच हो आसान.
- अगर आप अपने ब्लाग पर एड लगाना चाहते हैं तो चाहे मुफ़्त के होस्ट पर रहें या सशुल्क वाली, अपने मन-मुताबिक एड लगाने की सुविधा और अधिकार होना चाहिए आपके पास – अपने होस्टिंग प्रदाता के नीयम और शर्तें जानिये.
- अगर आप तकनीकी रूप से तैयार नहीं हैं तो कोई ज्यादा बडी समस्या नहीं है ये.. अपने शौक के बारे में बेहतर जानने की कोशिश कीजिये और एक-दो सेल्फ़-हेल्प किताबों की मदद लीजिये. आप निराश नहीं होंगे – और जल्द ही सही प्रश्न सटीक भाषा में पूछने लगेंगे.
- अगर आपके आर्थिक बजट में ब्लागिंग को स्थान नहीं मिल सकता तो आप कुछ अधिक समय खर्च कर के अपने मुफ़्त विकल्पों की बेहतर जानकारी लें और उनके बारे में उपलब्ध सहायता पढें ताकी आप उनका बेहतर दोहन कर सकें. हां, अगर बजट में ब्लागिंग की ओर कुछ पैसा खर्च करने का स्थान है तो भी मुफ़्त सुविधाओं का उपयोग जरूर करें साथ ही सशुल्क सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी लेने की कोशिश करें.
दूसरे क्या कर रहे हैं?
गूगल ब्लागर से वर्डप्रेस.कॉम ( wordpress.com) तक का सफ़र हो, उस से दोबारा वापसी या अपनी स्वयं की वर्डप्रेस (wordpress.org से wordpress software) आधारित साईट्स तक बनाने की बात, हिंदी ब्लागजगत नें अभी कम ही विकल्पों पर हाथ आज़माए हैं- कामोबेश यही हाल दूसरी भाषाओं में रहा है. इनमें से सबसे अधिक सफ़लता से अपने लेखों की शेल्फ़ लाईफ़ पर बेहतर नियंत्रण कर सकने की सुविधाएं वर्डप्रेस में ही अधिक हैं. वर्डप्रेस के नए वर्जन्स में आपको widgets, plug-ins और themes के माध्यम से प्रदर्शन से जुडी काफ़ी सुविधाएं मिलती हैं. अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के ब्लागर्स का भी वर्डप्रेस ही लोकप्रिय प्लेटफ़ार्म है और सबसे आगे है – टाईप-पैड के दिवाने भी बहुत हैं! ब्लाग्स का स्वरूप बदल रहा है और ब्लागर्स की जरूरतें भी!
आप बिल्कुल नया और अलग क्या कर सकते हैं?
आने वाला समय अंतराफ़लकों का समय होगा..अगर आप सूचना तकनीकी से जुडे हैं तो आप किसी विन्डोज़ आधारित ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म के हिंदीकरण पर हाथ आजमा सकते हैं और हिंदी वर्डप्रेस के समानन्तर एक नया विण्डोज आधारित विकल्प खडा कर सकते हैं. सिल्वरलाईट जैसी प्रदर्शन तकनीक के चलते आने वाले समय में .NET आधारित टूल्स ब्लागिंग की विधा में क्रांति लाएंगे.



















जानकारी तो काफी अच्छी दी है, देखता हूं कि मैं कितना ईससे लाभ उठा सकता हूं।
बिल्कुल सही फरमा रहे हैं. अच्छी जानकारी.
अंतराफलक मने : कुछ कुछ संतरे की फांक जैसा लगा
अंतराफ़लक = Interface!
आप ने सही समय पर सही जानकारी दी है। विकल्पों के बारे में सोचना पड़ेगा। साइट का मालिक खुद ब्लागर को ही होना चाहिए, यह समझ आ चुका है। व्यावसायिक और स्थाई महत्व के बारे में भी सोचना और कुछ करना ही पड़ेगा।
bahut badhiya sir.. achchhi jaankari hai..
अब आदत सी हो रही है आपके ब्लॉग पर आने की …..स्वामित्व वाली बात में दम है…..
आपने सही लिखा है कि वर्ड प्रेस में अनेक ब्लाग लेखकों की अधिक दिलचस्पी है। कारण यह है कि वहां अपनी श्रेणियां और टेग लिखने की अधिक सुविधा है जबकि ब्लाग स्पाट पर केवल दो सौ वर्ण का लेबल लगाया जा सकता है और हिंदी में होने पर तो कम ही संख्या में शब्द आ पाते हैं। जहां तक मेरा अनुभव यह है कि ब्लाग पोस्ट पर पोस्ट रखने का मतलब है कि एक बहुत बड़ी संख्या में अपने पाठकों से दूर करना। आपका लेख वाकई पढ़ने लायक था। धन्यवाद
दीपक भारतदीप
बिल्कुल सही फरमा रहे हैं.
…..स्वामित्व वाली बात में दम तो है, पर उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है ।
दावे तो सबके सही लगते हैं, किंतु कौन सा सेवाप्रदाता सही निकलेगा, इस पर भरोसाइच नहीं होता ।
अनूप जी , बहुत उपयोगी जानकारियां हैं। आपके ब्लागिंग के गहन अनुभवों का निचोड़ यूं हमें मुफ्त में मिलेगा, नहीं सोचा था। आमतौर पर मैं इस किस्म के तकनीकी लेखों के ऊपर से गुज़र जाता हूं (या वो मेरे ऊपर से) मगर इसे पूरा पढ़ा और इसकी सामयिकता समझ में भी आई। हालांकि जो विकल्प आपने सुझाए हैं उन्हें पूरी तरह नहीं समझ पाया और करने में भी अक्षम हूं क्योंकि तकनीकी निरक्षर हूं, इसके बावजूद मुद्दे की गंभीरता और विषय अच्छी तरह समझ में आया।
मेरे ब्लाग और उसके ध्येय के बारे में क्या सोचते हैं ? क्या करना चाहिए ? ब्लाग तो मेरे लिए शब्दों पर अनिवार्यतः लिखने का माध्यम भर है, इसीलिए यहां हूं । वैसे शायद इतना नियमित ढंग से शायद नहीं लिख पाता । आपके-हमारे कानपुरिया मित्र प्रियवर राजीव टंडन जी ने भी बीते साल कुछ विकी वगैरह का सुझाव दिया था। पर बात तकनीकी तौर पर पल्ले नहीं पड़ी थी। कृपया हमें अलग से ई मेल के ज़रिये ज्ञान दें कि हमारी मेहनत किसी काम की है भी या नहीं ?
“. सिल्वरलाईट जैसी प्रदर्शन तकनीक के चलते आने वाले समय में .NET आधारित टूल्स ब्लागिंग की विधा में क्रांति लाएंगे……”
सहमति