खुशी हो रही ये देख कर की हिंदी ब्लागर्स नये अनुप्रयोगों और जुगतों को अपनाने में बिल्कुल झिझक नहीं रहे – पिछली पोस्ट में एप्चर के बारे में बताने के बाद जैसी अप्रत्याशित प्रतिक्रियाएं मिलीं हैं – दिल बाग-बाग हुआ है. आज की पोस्ट है एक और धांसू साईट के बारे में! इसकी भी एक मजेदार कहानी है – दर-असल ये साईट तो बनी थी किसी और काम के लिये लेकिन जुगाडू जनता नें इसे दूसरे ही कामों के लिये प्रयोग करना शुरु कर दिया, फ़ायदा हुआ और जैसा की होना चाहिये इस आईडिये का प्रसाद बंटने लगा.
हम यहां इस साईट के दोनो गुणों की बात करेंगे – एक ब्लागर के और एक पाठक के दृष्टीकोण से!
पहले बात करते हैं की एक ब्लागर होने के नाते आपको अपने लेखन के बारे में क्या जानना चाहिए और अपने लेखों को आंकने का तरीका क्या हो?
कोई लेख जिस पर ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं जरूरी नहीं है की अच्छा लेख हो.
कोई लेख जिस को लोग गूगल से खोजते हुए पहुंचे जरूरी नहीं है की अच्छा लेख हो.
कोई लेख जिस पर सबसे अधिक रेटिंग मिली – हां ये एक बहुत अच्छा, मानवीय तरीका है पसंद किये गये जानने का.
कोई विषय जिस पर उपरोक्त तीनों आधार पर अच्छे परिणाम और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुए हों -निश्चित रूप से चाहे एक अच्छा विषय ना हो पर लोकप्रिय विषय जरूर हो सकता है. जनता की रुचि का पैमाना भी. ये मेरे जैसे ब्लागर्स के लिये बहुत काम की जानकारी होती है जिनके ब्लाग्स एकाधिक विषयों पर होते हैं.
हम दूसरी पसंदीदा साईट्स को भी इन्हीं पैमानों पर तौलें तो पता लगा सकते हैं की कौन से विषय अभी अधिक लोकप्रिय हैं और अपना ट्रैफ़िक बढानें में उनका चतुराईपूर्ण प्रयोग कर सकते हैं. इसका ये मतलब नहीं है की हमारी पढनीयता को ठोस बढावा मिलेगा लेकिन एक शुरुआती आधार जरूर मिल सकता है जिससे कोशिश कर, नये पाठकों को हम अपना लंबे समय का ग्राहक बना सकते हैं - भई जो हमारी फ़ीड ग्रहण करे वो ग्राहक ही हुआ ना! और ग्राहक भगवान होता है.
ये तो था ब्लागर का दृष्टीकोण – अब एक पाठक के नज़रिये से देखें तो सारे ब्लागर्स अपनी अपनी रेहडी सजा के बैठे हैं- कहां किसके माल में दम है ये कैसे पता करें? हिंदी ब्लाग जगत के ब्लागवाणी, चिट्ठाजगत, नारद जैसे एग्रीगेटर्स सांख्यिक और मानवीय पसंद के भिन्न भिन्न पहलूओं पर छांट कर पोस्ट दिखाते हैं. टैग क्लाऊड की मदद से लोकप्रिय विषयों के बारे में बताते हैं - लेकिन वो हमारी व्यक्तिगत पसंद के विषयों से नंबरवार मिलते जुलते हों जरूरी नहीं.
एक पाठक के लिये रुचि के आधार पर पहले तीन प्रकार के ब्लाग्स यूं हो सकते हैं – कविता, हास्य, राजनीति
दूसरे के हिसाब से हो सकता है – तकनीक,राजनीति,खेल… लेकिन एक ट्विस्ट ये है की दूसरे ब्लागर को सिर्फ़ सुपरहिट हास्य वाला लेख ही पढने में रुचि है!
हां अब ऐसी जरूरत के लिये हमें एक खास किस्म के सहयोगी की जरूरत होगी जो हमारी पसंद के हिसाब का माल छांट के बता दे.
aideRSS वो वेबसाईट है जो उपरोक्त दोनो कामों को आसान बनाती है – एक ब्लागर और एक पाठक के लिये! एक ब्लागर अपने और दूसरों के ब्लाग्स के हिट होने के ट्रैंड देख सकता है, पाठक वर्ग की रुचि के बारे में जान सकता है और अपने लेखन में सुधार ला सकता है! साथ ही अपने काम के फ़िल्टर सेट कर के सिर्फ़ खास और चुनिंदा पोस्ट्स को पढ कर अपने समय का सदुपयोग और अपनी उत्पादकता बढा सकता है. चलिये जी ये लीजिये एक अच्छा वीडियों तो यहीं बांच लीजिये!
aideRSS के फ़ायरफ़ाक्स एक्स्टेंशन और गूगल रीडर के साथ काम करने के अनुप्रयोग उपलब्ध हैं. आगे की पूरी जानकारी के लिये आप सीधे aideRSS की साईट पर जाईये, उसे आज़माईये और हमेशा की तरह अपने अनुभव हमसे बांटिये जरूर!






इसे भी आजमा कर देखते हैं |गूगल रीडर में जुटता है तो उसीमें आजमायेंगे |हांलाकि ‘एप्चर’का पंच्चर अभी दुरुस्त नहीं हुआ|आप जुगाड देकर बाग – बाग हों , हम पाकर गार्डन-गार्डन हो रिए हैं |
कुछ ऐसे ही फिल्टर करने का आप्शन देने वाली एक ओर साईट है, फीडरिंस जिसके बारे में मैने बहुत पहले एक पोस्ट लिखी थी, उसे यहाँ पढ़ सकते हैं
ये भी सही लग रही है, उपयोग करके देखना पड़ेगा।।
बहुत अच्छी जानकारी दी……. प्रयोग कर देखती हूं।
@तरुण, मुझे aideRSS की अच्छी बात ये लगी की यह आपको बेस्ट/गुड/ऑल/ग्रेट पोस्ट्स चुनने की सुविधा देता है और फ़ीड जोडने के बाद समय के साथ यह पुराना डाटा याद रखता जाता है – जिसे आप अपने ब्लाग पर भी परोस सकते हो .. इन्होंने काफ़ी अच्छी सुविधाएं देने की कोशिश की है.
@अफ़लातूनजी, एप्चर का पंचर तरुण दुरुस्त कर के दे सकते हैं – उन्होंने ब्लागर पर कभी-कभी आने वाली समस्या का निदान निकाला है और अपने ब्लाग पर डाला भी है. हिंदिनी पर हर कहीं मस्त चल रहा है.
स्वामीजी, इससे तब भी पता नही चल सकता। क्योंकि ये किसी पोस्ट के अच्छे बुरे होने का गणित उसमें मिली टिप्पणियों, और हिट को जोड़ के लगाती है। यानि की अगर मुझे 5 टिप्पणियाँ मिलती है तो इसकी गुणवत्ता की गणित के 3 आप्शन बनते हैं -
१. मैं उन में से किसी का जवाब नही देता
२. पांचों टिप्पणियों का जवाब एक टिप्पणी में दे देता हूँ यानि कुल टिप्पणियाँ 6
३. पांचों टिप्पणियों का जवाब अलग अलग टिप्पणी में देता हूँ यानि कुल टिप्पणियाँ 10
अब लेख वही है लेकिन ये मेरे तीसरे आप्शन के तरीका उपयोग में लाने पर सबसे अच्छा बतायेगा, दूसरे पर उससे कम और पहले पर सबसे कम।
किसी लेख की गुणवत्ता नापना कठिन है लेकिन हाँ लोकप्रियता जरूर नापी जा सकती है जो कि दूसरे तरीकों से भी पता चल ही जाती है। लेकिन कुल मिलाकर अपने ब्लोग को analyze करके बीच बीच में देख कर आइडिया लगाया जा सकता है।
@तरुण, सही कह रहे हो! होगा वही जो होता आया है सांख्यिकी के आधार पर “ओम शान्ती ओम” जैसी पोस्ट “शतरंज के खिलाडी” से ज्यादा व्यवसाय कर लेगी. इसी लिये del.icio.us और digg का बोलबाला है!
एक बार इस पर गया था, लेकिन ज्यादा छान-बीन नहीं किया। आज आपने इसकी इतनी विशेषताएँ बताईं तो ट्राय मारता हूँ। बहुत शुक्रिया
मगर, मेरे ब्लाग पर तो पिछले चार महीनों से है, स्वामी !
हम भी ट्राय मारते है…
हम्म… अभी तो नहीं पर कुछ दिनों में जरूर देखा जायेगा.