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हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!
इस लेख में मै प्रयास करुंगा कि तकनीकी/गैर तकनीकी और प्रदाता/प्रयोक्ता जैसे भिन्न दृष्टीकोणों में संतुलन बिठा कर हिन्दी चिट्ठाकारों को कुछ काम की जानकारी दे सकूं.
“यदि आपको लगता है कि समस्या का हल आसान है तो आप उसे समझे ही नही”
हिन्दी चिट्ठाकारी को बढावा देने के शुरुआती दिनो मे हम इस प्रकार के लेख लिखते थे कि “अब आपके कंप्यूटर से हिंदी मे लिखना बहुत ही आसान”. आपने थोडा प्रयास किया और देखा कि यह सचमुच ही आसान है.
आपको यह आसान क्यों लगा? अधिकतर प्रयोगकर्ताओं ने हिंदी में लिखने के लिये ट्रांसलिटरेशन का सहारा लिया. आपको हिंदी और अंग्रेजी के हिज्जों की जानकारी थी और आप ये जानते थे कि “t+h” से “थ” बनेगा. फ़िर भी आपको थोडा प्रयास ही क्यों ना करना पडा हो, आप जल्दी सीख गए.
वैसे आसान की परिभाषा क्या है?
आसान का अर्थ ये है कि आप अंग्रेजी के कीबोर्ड से हिंदी में सहजज्ञ हो कर लिख सकें. यह सहजज्ञ या इन्ट्यूटिव हो कर किसी मशीन का प्रयोग कर पाना आपके काम को आसान बनाता है. वहीं एक इंजीनियर के लिये, किसी अनुप्रयोग को सहजज्ञ बनाना सबसे बडी चुनौती होती है – उसकी सफ़लता और असफ़लता का मपदंण्ड यह सहजज्ञ होना ही है. ट्रांसलिटरेशन ने आपको यह सजज्ञता प्रदान की, यदि आप फ़ोनेटिक तरीके से शब्द को सोच सकें.
हाल ही में अंकुर गुप्ता ने अपने ब्लाग पर ट्रांसलिटरेशन टूल बरह का प्रयोग करने वालों की सहायता करने के लिये एक लेख लिखा था.
लेख अच्छा था लेकिन टिप्पणी मे मैने उनसे पूछा था कि ट्रांसलिटरेशन तकनीक से ‘अइयइया’ कैसे लिखेंगे? आप अगर बरह या कोई और ट्रांसलिटरेशन टूल प्रयोग करते हैं तो कर देखिए, समझ मे आ जाएगा कि ये सीधा संभव क्यों नही है! साथ ही इससे पहले की इंस्क्रिप्ट के हिमायती ये कहें कि ट्रांसलिटरेशन मे अधिक कुंजिया दबनी होती हैं, इन्स्क्रिप्ट तेज है और उसमें ये बहुत आसान है तो मै उनसे कहूंगा – फ़िलहाल आगे पढें!
जब कोई साईकल चलाना शुरु करता है तो कुछ समय उसे संतुलित करवाने के लिये साईड व्हील्स की जरूरत पडती है, देरसवेर यही बच्चा हर प्रकार का वाहन चलाने लायक हो जाता है. ट्रांसलिटरेशन वही है और मुझ जैसे ‘राईट ब्रेण्ड’ लोग जो फ़ोनेटिकली सोचने मे माहिर हैं उनके लिये तो एकदम मुफ़ीद है ये – मुझे कुंजीयां याद रखने मे बहुत कोफ़्त होती है यही वजह है कि लिनक्स के जिस महान vi एडिटर के नाम पे लोग दिवाने हो जाते हैं मुझे कतई नापसंद है! यदि मुझे कहा जाता कि हिन्दी लिखने के लिये इन्स्क्रिप्ट सीखना ही होगी तो मै कभी का राम-राम कर चुकता.
ट्रांसलिटरेशन जगत में इस ‘अइयइया’ पर दोबारा आते हैं.
गूगल और क्विल्ल्पैड[जो तथाकथित आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजैंस तार्किकता से लैस होने का दम भरता है] दोनो कि दरिद्रता एक झटके मे उजागर हो जाती है जब आप गूगल पर कोई गडबडझाला शब्द लिखने की कोशिश करते हैं या टेस्टिंग के लिये ही सही, क्विल-पैड पर कोई गाली!
१. गूगल ट्रांसलिटरेशन लेज़ी ट्रांसलिटरेशन करता है – पहले आप पूरा शब्द लिख लो फ़िर वह अपने कोश मे से उसके अनुरूप शब्द व उसके विकल्प दिखाने की कोशिश करता है – यदी शब्द उनके कोश मे नही है तो वो लटक गया समझो! लेजी ट्रांसलिटरेशन में, टूल अपनी तरफ़ से तो सहायता ही करने कि कोशिश करता है, ऐसा करने की वजह है कि आपको शिफ़्ट की का प्रयोग ना करना पडे और आप द और

ड के लिये d ही दबा कर काम कर लो.
२. क्विल-पैड और भी श्याणा बनने का प्रयास करता है, वो आप क्या लिखने वाले हो ये जानने को उद्यत दिखता है और इस प्रक्रिया मे आपका ध्यान बंटाता रहता है अंतत: लिस्ट में बहुधा गलत शब्द ही रखता है. यदी सही शब्द होगा भी तो उसे चुनना कष्टप्रद है.
इन दोनो से बिना कई बार खीजे “अइयइया” लिखवा पाना असंभव है! फ़िर भी ये दोनो टूल अपने-अपने तरीके से प्रयास करते हुए बडे क्यूट लगते हैं.
३. ऐसे में क्विक ट्रांसलिटरेशन करने वाले बरह की जीत सुनिश्चित लगती है जो हर दबाई गई कुंजी को त्वरित ही हिंदी में बदलता है. लेकिन रुकिये! “अइयइया करूं मैं क्या सुकू सुकू.. खो गया दिल मेरा सुकू सुकू” [गाना सुना है कभी ये वाला?] रफ़ी साहब ऐयैया नही गाते “अइयइया” गाते हैं. लिखते हैं तो यहां भी “अइयइया” कि बजाय ऐयैया हो जाता है. यह जुगत अपने आप में बहुत कठिन काम कर रही होती है – मुझे इसलिये पता है की मैने ऐसी जुगत को दो अलग अलग तरीको से सफ़लता से कोड किया है, तीसरे को खारिज कर के अब सही चौथे तरीके का आईडिया कुलबुला रहा है. मुझे मालूम था यही होगा जब अब स्वरों को जोड कर मात्रा बनाओगे – कोई ना कोई ऐसा शब्द पूरे तर्क की वाट लगा देगा. इसलिये मैने अपने घरेलू टूल में दो-दो कुंजियां दूसरे क्रम पर आने वाली मात्राओं को दी थीं! चलिये ये भी बता दू कि बरह मे “अ इ य इ या” लिखिये और स्पेसेज़ हटा दीजिये ये तरीका है. फ़िर से अगर इन्स्क्रिप्ट-प्रेमी ज्यादा खुश हो रहे हैं .. तो मै कहूंगा शान्ती.. शान्ती!
तो क्या करें? रातों रात इन्स्क्रिप्ट सीखने लग पडें? और मै तो सीखना चाहता ही नहीं – क्यों सीखूं?? क्यों ना कंप्यूटर को सिखाऊँ – लेकिन अभी उसमे वक्त है! अभी इन टूल्स को और निखरना, सुधरना, संवरना है!
इन्स्क्रिप्ट की सबसे बडी खासियत है तीव्रता और इसकी सबसे बडी कमजोरी है “शिफ़्ट” कुंजी, कौन सा अक्षर कहां है ये तो खैर थोडे अभ्यास से याद हो जाएगा लेकिन शिफ़्ट कुंजी पर आप ५०% अक्षरों को दिखाने के लिये निर्भर हैं, अगर किसी टूल में इसके साथ त्वरित वर्तनी जांचक मिले तो ये रेस मे सबसे आगे हो! हां शुरुआती लर्निंग-कर्व धीमा होगा.
गूगल और क्विल्लपैड इस शिफ़्ट कुंजी पर निर्भरता खत्म करने कि और आपके लिये त्वरित वर्तनी जांचक का काम करने कि कोशिशों में और वक्त बरबाद करते हैं. कभी सफ़ल होते हैं कभी असफ़ल.
बरह एकदम आसान शुरुआत देता है लेकिन मात्राओं के लिये आपको अधिक कुंजियां दबाने होती हैं – शिफ़्ट की से यहां भी पूरी निजात नही मिलती. यदि आप तेजी से टाईपिंग कर सकते हैं और धडा-धड फ़ोनेटिक तरीके से सोच सकते हैं तो ये ठीक है.
जब तक वो हो, अनुभवी चिट्ठाकारों को यह बताने का समय आ गया है कि फ़ोनेटिक और इंस्क्रिप्ट शैली से लिखने में किन तकनीकों का प्रयोग होना चाहिए.
अब ये देखें की एक आदर्श इन्डिक भाषा के टूल मे क्या क्या होना चाहिए?
१. वो एकदम मुफ़्त हो और हवा की तरह से हरवक्त तरोताजा[अपडेटेड] मुहैया हो. देसी आदमी ऐसी वाहियात चीजों पे पैसा खर्च नही करता – वैसे फ़ोकट की मिले तो धन्यवाद भी नहीं करता.
२. वो टूल रिच टेक्स्ट एडिटिंग करता हो, तमाम युनिकोड फ़ाण्ट्स से सुसज्जित हो.
३. वो बहुभाषी और बहु-कुंजीपटल वाला हो.
४. ट्रांसलिटरेशन की कुंजियों को री-प्रोग्राम करने की सुविधा देता हो जैसे अं की मात्रा विन्डोज़ आई.एम.ई में ^ से लगती है और बरह मे M से तो आवश्यकता पडने पर लोग उसे अपने तरीके से सेट कर सकें.
५. हिन्दी वर्तनी की जांच करता हो.
६. अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश की सुविधा भी देता हो और हिंग्लिश घुसेड परिवर्तक हो!
७. आनलाईन, ऑफ़लाईन चले. प्लग-इन्स बन सकें.
हिंग्लिश घुसेड परिवर्तक मतलब क्या?
एक आम भारतीय प्रयोक्ता हिंग्लिश मे सोचता है. मतलब क्या? मतलब ये कि आप एक ही वाक्य को तीन तरीके से लिख सकते हैं – जैसे कि
आप सोचते कैसे हैं – मेरी train late थी और घुसने पर पाया कि मेरी berth पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी. [पहला late अंग्रेजी वाला दूसरा लेट हिंदी वाला अलग अलग हैं]
आप लिखते क्या हैं – मेरी ट्रेन लेट थी और घुसने पर पाया कि मेरी बर्थ पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी [पहला लेट अंग्रेजी का है दूसरा लेट हिंदी का लेकिन इनका और बर्थ (यानी जन्म था या शायिका?) का मतलब निकालना आप पाठक पर छोड देते हैं]
आपको लिखना क्या चाहिये था- मेरी ट्रेन विलम्ब से थी और घुसने पर पाया कि मेरी शायिका पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी. [ट्रेन के लिये लौहपथगामिनी लिखना ओवर हो जाएगा – पापुलर चलेगा]
तो टूल को बहुत समझदार होना चाहिए वो आपका हिंदी असिस्टेंट हो यानी एक समझदार हिंग्लिश घुसेड परिवर्तक का काम भी करे -
आपको टाईप कैसे करना पडे- मेरी ट्रेन =late थी और घुसने पर पाया कि मेरी =berth पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी.
और टूल क्या दिखा दे – मेरी ट्रेन विलम्ब से थी और घुसने पर पाया कि मेरी शायिका पर एक भैंस जैसी महिला लेट गई थी.
यानी टूल ने =late के स्थान पर विलम्ब से और =berth के स्थान पर शायिका लिख दिया – जरूरत पडे तो वो किसी शब्द विशेष के विकल्प भी दिखा दे. ये हुई रीयल कलाकारी! ये आपको जबरदस्ती ज्ञान बघारने वाले हिंग्लिशिये ब्लागर्स की खिचडी भाषा से बचाने का काम भी करेगा.
२००९ में मात्र ट्रांसलिटरेशन vs इन्स्क्रिप्ट में उलझे रहना कल्पनाशीलता की घोर कमी होगी! मै ऐसा टूल बना सकता हूं लेकिन समय कि कमी है – यदी कुछ प्रोग्रामर्स साथ जुडें तो मै ऐसे किसी प्रोजेक्ट पर काम जरूर करना चाहूंगा. ऐसी सुविधा होने से आप इतना तेज लिख सकेंगे और बढिया हिन्दी कि बाकी बहस अर्थहीन हो जाएगी. वैसे इस आईडिये पर मेरा कोई कॉपीराईट नही है (ये मोह भी छोडा) – लेकिन मै ऐसी सुविधाएं देखना जरूर चाहता हूं! पाठकों के विचार भी जानना चाहूंगा.



















पसीना पोंछ लूँ,
फिर पुन: पढ़ूँगा !
आप से पूरी तरह सहमत हूँ।
मैं ने हिन्दी टाइपिंग के लिए आरंभ से ही आईएमई रेमिंग्टन को अपनाया। लेकिन उन दिनों कई ब्राऊजर उसे सही नहीं दिखाते थे। परेशान हो कर इन्स्क्रिप्ट के टूल तलाशे। आसान टाइपिंग ट्यूटर की मदद से सप्ताह भर में सीखी और एक माह में गति में आ गया। मेरे लिए तो सब से आसान वही था। मुझे अंग्रेजी भी बहुत टाइप करनी होती है। हिज्जों का चक्कर रहता है। अब ठीक हूँ, अंग्रेजी में सोचो अंग्रेजी टाइप करो और हिन्दी में सोचो हिन्दी टाइप करो। इन्स्क्रिप्ट में हिन्दी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी में शिफ्ट होना बहुत आसान है। देवनागरी में रोमन घुसेड़नी हो तब भी।
फिर वही बात कहूँगा। यदि लक्ष्य एक हो तो लोग अलग अलग रास्तों से उस की तरफ चल पड़ते हैं पर आखरी पड़ाव के बाद सब एक सड़क पर होते हैं।
सही विचार है, पूर्णतः सहमत.
शुभकामनाएँ कि लोग जुड़ें और यह परियोजना अमली जामा पहनें.
सहमत हूं आपसे .. सोंच अच्छी है .. परियोजना की सफलता के लिए शुभकामनाएं .. ब्लाग जगत में कल से ही हिन्दी के प्रति सबो की जागरूकता को देखकर अच्छा लग रहा है .. हिन्दी दिवस की बधाई और शुभकामनाएं !!
फ़िलहाल तो बारहा में कोई दिक्कत नहीं है. ऐसा कुछ भी नहीं जो इसमें नहीं लिखा जा सके. दिक्कत हो तो हेल्प फ़ाइल मदद कर देती है.
आपका विचार तो स्वागतयोग्य है. चुनौतियों का सामना कर पायेंगे, यकीन है.
इंग्लिश घुसेड़ने का काम मुश्किल होगा.
=late का अनुवाद हमेशा विलम्ब होगा तो दिक्कत होगी.
“मुझे डर है कहीं मैं late ना हो जाऊं”
बन जाएगा
“मुझे डर है कहीं मैं विलम्ब ना हो जाऊं.”
क्या कीजियेगा?
@घोस्ट बस्टर – आपने गूगल का ‘I am feeling lucky’ बटन तो देखा ही होगा.
प्रयोक्ता पर छोडा जा सकता है कि वो automatic replacement चाहता है का कि सूची देखना.
पिछले साल जब मैं हिंदी ब्लागिंग से परिचित हुआ तो पहले पहल मुझे अजीब सा लगा ये जानकर कि हिंदी यहां हिंदी टाइप करने के लिए गूगल ट्रांसलिटरेशन व क्विलपैड से काम चलाया जाता है. जबकि मैं MS DOS के ज़माने से ‘अक्षर’ प्रयोग करते हुए रेमिंगटन हिंदी कीबोर्ड का अभ्यस्त हो चुका था. फिर आया लीप जिसमें हिंदी डिक्शनरी भी है. मैं उसका मोह छोड़ नही पा रहा था. कारण वही अइयइया… बिना कोई फालतू ‘की’ दबाए या याददाश्त का पोंहचा दाबे.
कैफ़े हिंदी वालों का भगवान भला करे कि इसी बीच टहला टहली करते उनका साफ़्टवेयर मिल गया. अब मेरी पौवारा है. कुछ कुछ कमियां हैं…पर मुफ़्त में उनकी जान लूंगा क्या !
मुझे पता है हिंदी कीबोर्ड के भी दिन बहुरेंगे. हमारे जैसे बहुत से सनकी
हैं यहां.
अइअइया… एतना गड़बड़झाला! बरह से तो काम चल रहा है….पर परफ़ेक्शन=:) तो होना ही है। इस प्रयास में आप सफ़ल हों और फिर हम फ़ालो करेंगे॥
देवनागरी लिखने का एक अच्छा माध्यम लोगो को मिला है