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वीडियो: अपने हिन्दी चिट्ठे के लिये चित्र कबाडने कि देसी ट्रिक्स
सीधे बात पर आते हैं. आपने अपने ब्लाग पर कोई मसौदा लिखा है अब आप चाहते हैं कि उसके मूड के साथ जाता हुआ चित्र भी चेप दें. कई बार मेरे चित्र चयन पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, इसलिये सोचा कि अपना तरीका सब से बांट लूं.
सबसे पहली बात: फ़ोटोशेयरिंग साईट्स मे क्रियेटिव कामन्स के तहत उपलब्ध चित्रों के अलावा जो चित्र हों उनकी हाटलिंकिंग ना करें. संभव है कि वहां पर स्पेसबाल [ब्लैंक] चित्र मिले.
तीन चार तरह के चित्र आपको आनलाईन मुहैया होते हैं –
१. वो चित्र जिन पर वाटरमार्क लगा है और उन्हे उपलब्ध करवाने वाला नही चाहता कि आप उसे खरीदे बिना अपने ब्लाग पर चेपें – ऐसे चित्र हमारे काम के नही हैं.
२. वो चित्र जो किसी और साईट पर प्रयोग किये जा रहे हैं – ना हाटलिंकिंग करें ना आप उन्हे उतार कर अपने आनलाईन स्टोरेज स्पेस मे चढा कर प्रयोग ना करें – वे किसी और कि संपत्ती होते हैं. (इसको चुराने का भी एक लीगल तरीका है वो फ़िर कभी
)
३. न्यूज साईट्स से चित्र लेने मे समस्या कम है, लेकिन मुद्दा वही है – हाटलिंकिंग ना करें.
४. फ़ोटोशेयरिंग साईट्स से चित्र कबाडना सबसे आसान है.
चित्र दो तरह के हो सकते है –
फ़ोटो या इल्युस्ट्रेशन यानी तस्वीर या रेखाचित्र. बस अपनी कोशिश हो की एक ही पोस्ट मे इनका घालमेल ना हो.
आज हम आसान तरीका देखते हैं
मान लीजिये मुझे दान पेटी का चित्र खोजना है –
हम चाहते हैं कि अच्छा हो की दानपेटी फ़न्नी दिखे
हम चाहते हैं कि अच्छा हो कि हिन्दी वाला कोई चित्र मिल जाए.
सबसे पहले क्रियेटिव कामन्स सर्च पर जाएं -
इस उदाहरण में हम फ़्लिकर की मदद लेंगे, देखते हैं कि किस्मत कितना साथ दे रही है, अन्यथा दूसरा तरीका लगाएंगे – [इस उदाहरण मे मुझे एक मिनट लगे] इसमे कयासबाजी का काम अधिक है! तो मैने कयास लगाया “India donate”.
बडा वीडियो देखने के लिये विडियो पर माऊस ले कर जाएं और फ़िर नीचे दाएं से फ़ुल-स्क्रीन का चय्न करें या यहां क्लिक करें
अगर इस तरह से काम का चित्र ना मिले तो क्या करेंगे? जानना चाहते हैं तो
- साईडबार मे प्रदर्शित शादी.काम के विज्ञापन पर क्लिक कर के (फ़िर से) शादी कर लें और हमे सूचित करें, या
- हमारे इधर के विज्ञापन पर क्लिक कर के सिटी बैंक मे अकाऊं खोलें और हमे सूचित करें, या
- सिंपली टिप्पणी कर के बताएं.


















ये हुई कुछ काम की पोस्ट !
कुछ समय पहले मैंने भी लिखा था कॉपीराइट के मसले पर लेकिन लोग बाग को फिर भी दिक्कत है, आसानी से फोकट के फोटू मिल जाते हैं लेकिन फिर भी दूसरे की वेबसाइट/ब्लॉग से मार कर ही अपने यहाँ छापना है और इतनी कर्टसी नहीं कि जिसकी वेबसाइट/ब्लॉग से ले रहे हैं कम से कम उससे पूछ तो लें, बिना पूछे ही मार लेते हैं और जबरिया “साभार” नीचे लगा देते हैं।
और तो और, बड़े-२ मीडिया हाऊसों, अखबारों में भी ऐसे बहुत से चिरकुट काम करते हैं जिनकी सोच यही है कि इंटरनेट पर मौजूद सब माल उनकी बपौती है, जब मर्ज़ी जहाँ मर्ज़ी से मार लो!!
फोटो मारने का घटिया काम अपन भी नियमीत करते है. अब लोगों की तरह गूगल से साभार (?)!! तो कैसे लिखें? तो आभार लेते-देते ही नहीं. फिर भी यह घटिया काम तो है ही. अब यह फ्लिकर वाला सही मामला लग रहा है. क्या यह बहती गंगा है? जब चाहा लोटा भर लिया?
JAI SHREE SHYAM