7 responses to “चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय”

  1. दिनेशराय द्विवेदी

    ये सब करते आए हैं। अब तो आप ने कोड तैयार कर दिया है। करते ही रहेंगे।

  2. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'

    आभार मार्गदर्शन का.

  3. सिद्धार्थ जोशी

    जो लोग कहते हैं कि हिन्‍दी में शुद्धता की क्‍या जरूरत है उन्‍हें इस लेख का लिंक अवश्‍य दूंगा। और मैं भी बार बार यहां आकर पढ़ते रहने की कोशिश करूंगा। ताकि ट्रेक पर बना रह सकूं। ट्रेक तो चल जाएगा ? :)

  4. संगीता पुरी

    बहुत सही !!

  5. उन्मुक्त

    कुछ समय पहले हिन्दी चिट्ठजगत में गलत हिन्दी लिखने पर बात चली जो मेरी समझ से बाहर थी। यह सच है कि कभी कभी लिखने में गलती हो जाती है पर इसका मतलब नहीं गलत लिखा जाय।
    हांलाकि कि मैं दूसरी भाषा के शब्दों को, हिन्दी में स्वीकार करने का पक्षधर हूं।

  6. arvind mishra

    ई अध्यापकी कब से शुरू कर दिए ?

  7. सत्यजीत

    मैं भी कोशिश करता हूं कि मेरी भाषा हिंग्लिश नहीं बने. एनडीटीवी जैसे टेलीविजन चैनल बड़े ही शातिराना तरीके से हिंदी के शब्दों का बहिष्कार करते हैं और उसमें अंग्रेजी और ऊर्दू ठूसते हैं. पर उनका काम वो जाने. मैं अपना काम जानता हूं.

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