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एग्रीगेटर्स के जमाने में पाठकों को आत्मीय स्पर्श दें!

10 टिप्पणियां
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मुल्लाजी आएं तो ‘सलाम वालिकुम’

पंडिज्जी आएं तो ‘राधे-कृष्ण’

और कोई दोस्त यार आए तो – ‘क्या चल रहा है भई!’

हमारे सलाम-नमस्ते व्यक्ति को देख कर बदलते रहते हैं.

इसी तर्ज पर वर्डप्रेस वालों के लिये आया है एक नया प्लग-इन! कोई भी तकनीक तभी सफ़ल होती है जब वो अंतत: जीवन के किसी मानवीय फ़लक को छू ले. और वेब-तकनीक का ये आसान अनुप्रोग ठीक यही करता है.

प्लग-इन का नाम है रेफ़रर-डिटेक्टर [referer detector] – पोस्ट लिखते समय हम इसे हिंदिनी पर प्रयोग कर रहे हैं.

जब कोई ब्लागवाणी/चिट्ठाजगत या किसी और परिचित स्थान से साईट पर आता है तो उसे जहां से वह कडी पर चटका लगा कर आया है उसी के अनुसार संदेश मिलता है. यह संदेश और भी व्यक्तिगत किया जा सकता है [ संदेश यदि आप किसी एग्रीगेटर से आए हैं तो, इस पोस्ट के नीचे दिखाई देगा]

इस जुगत की कुछ खासियतें इस प्रकार हैं -

१. एजेक्स आधारित

२. स्वागत संदेश को बदलने का विकल्प

३. भौगोलिक आधार पर अलग-अलग संदेश दिखाने की सुविधा

४. कौन कहां से आया इसका लेखा जोखा रकने वाला एडमिन पेज

५. पहले से दिए गए ज्यों के त्यों प्रयोग मे लाए जा सकने वाले स्वागत संदेश.

पाठकों से प्रश्न है कि क्या ऐसे अनुप्रयोग सचमुच आपके जाल-भ्रमण अनुभव में कोई फ़र्क पैदा करते हैं? या मात्र एक चमत्कृत कर देने का उपक्रम ही जान पडते हैं [कि अरे इसे कैसे पता मैं कहां से चटका लगा कर आया?]


  1. ARE VAAH SWAMEE JEE !!

    achha laga !!

    blogspot ke liye koi aisa jugaad?

    bhaugolik aadhaar par to IP address gadbad karte hain ….. pahle maine bhee lagaya tha .
    vah jaipur vaale ko delhi batata tha.

  2. eswami ने कहा:

    प्रवीणजी,
    ये लीजिये आपके काम की कडी – अब इसका हिंदीकरण कर के ब्लागस्पाट का प्रयोग करने वाले अन्य का भला भी कर दीजियेगा.
    http://classictutorials.com/2009/10/06/greet-box-for-blogger-v2-0-is-live/

  3. दिल को छु गया!

    आज कल ई-ज्ञान बाँट रहे हो, फुर्सत मिलने लगी है क्या? वैसे शुभ संकेत ही है.

  4. सीधे आने वालों के लिए कोई संदेश नहीं!! :(

  5. eswami ने कहा:

    @संजय,
    आज चेक कर रहा था कि एक दिन मे दो पोस्ट करो तो कितने अधिक पैसे बनते हैं विज्ञापन की कमाई से- तो उत्तर है २० पैसे! :) सीधे आने वालों के लिये संदेश डालना है अभी!

  6. हम तो वर्डप्रेस के बारे में अभी ज्यादा नहीं जानते, फ़िर भी यह जुगत देखकर अच्छा लगा… ब्लॉगस्पॉट पर है क्या यह सुविधा?

  7. Abhi to kuch nahi keh sakte :”जाल-भ्रमण अनुभव में कोई फ़र्क पैदा करते हैं? ” ke baare main haan par, “एक चमत्कृत कर देने का उपक्रम” to wakai hai !!

  8. फ़िलहाल तो हमने ऐसा जुगाड़ किया है की सीधे आना पड़े … वैसे .ब्लॉग को सोशल नेट वर्क की तरह इस्तेमाल करने वालो के लिए आपका क्या सन्देश है ?

  9. amit ने कहा:

    पाठकों से प्रश्न है कि क्या ऐसे अनुप्रयोग सचमुच आपके जाल-भ्रमण अनुभव में कोई फ़र्क पैदा करते हैं?

    कर भी सकते हैं और नहीं भी, यह तो ऐसे जुगाड़ को कार्यान्वित करने वाले के ऊपर है। कैसा फ़र्क पैदा करते हैं यह भी उसी पर निर्भर करता है। :)

उल्लेख

  1. वीडियो: ब्लाग्स सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी हैं - [...] एक प्रश्न के उत्तर मे लिख रहा हूं.  वे पूछते हैं ब्लाग को सोश्यल नेटवर्क की तरह प्रयोग [...]

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