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वीडियो: ब्लाग्स सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी हैं

4 टिप्पणियां
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यह पोस्ट डॉ. अनुराग के एक प्रश्न के उत्तर मे लिख रहा हूं.  वे पूछते हैं ब्लाग को सोश्यल नेटवर्क की तरह प्रयोग करने वालों को मेरा क्या संदेश है?

छोटा उत्तर है कि ब्लाग सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी है! खास तौर पे हिंदी ब्लाग.

उदाहरण के रूप में – यदि मै अमरीका में हूं, तो मेरे अमरीकी मित्र हिन्दी नही जानते समझते – वे मेर विचार कैसे जानेंगे – यदि दिलचस्पी हो. दूसरे यदि कोई छद्म नाम से लिखते हैं तो उनके निजी नेटवर्क और छद्मनाम वाला नेटवर्क अलग-अलग हुए. तीसरे सारे लोग ब्लाग पढने-लिखने मे रुचि रखते हों जरूरी नही है.

अब आपका नेट-प्रेजेन्स क्या है – आपका ब्लाग, आपकी ई-मेल, आपके चैट-अकाऊंट, यू-ट्य़ूब अकाऊंट, फ़्लिकर अकाऊंट, ट्विट्टर अकाऊंट, फ़ेसबुक अकाऊंट या आर्कुट अकाऊंट आदी – यानी वे तमाम संसाधन जो आप और आप जैसे दूसरे सदस्यता ले कर प्रयोग मे ला रहे हैं ताकि अपनी सामग्री दूसरों को दिखा सकें और दूसरों की देख सकें – दूसरों से मिल सकें और नये मित्र बना सकें. अमेजान पर आपने किसी उत्पाद का रीव्यू किया हो तो वो,डिलिशियस पर आपकी स्वादिष्ट कडियां, आपके स्टंबल्ड अपान पेजेस .. इन संसाधनो की कतार बहुत लंबी होती जानी है.. और अभी तो हैंड हेल्ड डिवाईसेज को मुख्यधारा मे आना  है! तो निश्चित ही आने वाले समय मे आपका ब्लाग आपने नेट-प्रेज़ेन्स का एक छोटा हिस्सा भर हो कर रह जाएगा. आप कोशिश कर सकते हैं कि अपने तमाम दूसरे तरीकों से उपलब्ध होने कि जानकारी अपने ब्लाग पर उपलब्ध करवा दें लेकिन वहां तक कोई पहुंचेगा क्या जरूरी है?

व्यव्हारिक रूप से हिन्दी चिट्ठे वालों का सोश्यल नेटवर्क ब्लाग-एग्रीगेटर्स पर बहुत हद तक निर्भर है और ब्लाग –एग्रीगेटर्स अपने ब्लाग-लिंक डाटाबेस पर… ये अच्छी स्थिती नही है, इन कुछ ब्लाग-लिंक डाटाबेसेज़ का स्थान एकाधिक फ़्रेंण्ड्‍‍स नेटवर्क्स को लेना होगा – क्यों? यदि कोई एग्रीगेटर तकनीकी अनुपलब्धता के चलते चालू नही है तो आपका नेटवर्क भी गया खड्डे में… तो इसका निदान और कैसे संभव है?

निकट भविष्य में सोश्यल नेटवर्क बनाने के तरीके और भी उन्नत हो जाएंगे – और आप आज जो काम स्वयं करते हैं वो अनुप्रयोग कर दिया करेंगे – जैसा कुछ हद तक फ़ेसबुक करता है – साझा मित्रों के मार्फ़त नए मित्र सुझाने का काम, लेकिन वो फ़ेसबुक तक ही सीमित है और अभी भी उसकी अपनी डाटाबेसेस पर निर्भरता है – जो निकट भविष्य में तो क्या आगे लंबे बनी रहनी है. आपके साथ एक बढिया और आसान वीडियो साझा करना चाहता हूं जिसकी मदद से आप देख सकेंगे कि सोश्यल नेटवर्क को कैसे आद्यतन रखा जा सकेगा और उन्नत किया जा सकेगा – हां पूरे बडे परिदृश्य में ब्लाग की भूमिका महत्वपूर्ण किन्तु सीमित होगी.

ये सब होगा फ़्रेंण्ड्‍‍स नेटवर्क (XFN) और फ़्रेंड-ऑफ़-ए-फ़्रेंड (FOAF) जैसी तकनीकों के माध्यम से. हवा मे कई सारे आईडिये उछाले गए हैं – जो बचेगा वही रचेगा! या बकौल फ़ुरसतिया – जब खिलेगा तब देखेंगे :)

(तकनीकी बात: संलग्न वीडियो XFN और FOAF के बारे मे है जिन पर गूगल मे सोश्यल ग्राफ़्स API बनाने केलिये भी कुछ काम किया गया है.)


  1. शुक्रिया….दरअसल मैंने कई लोगो को इसका इस्तेमाल सोशल नेट्वर्किंग की तरह करते देखा था ….इसलिए सोच रहा था की कही मै ही तो इसे दुरूपयोग नहीं कर रहा ….

  2. अच्छा विश्लेषण किया है.

  3. यह जानकारी पसन्द आई।

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