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गंदा है पर धंधा है ये

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फ़ोकट के साफ़्टवेयर प्रयोग तो होते ही रहे हैं फ़िर इन्टरनेट पर जितना मुफ़्त का चंदन बंटा है जनता ने घिस घिस कर मला है. आम आदमी की ओन-लाईन मुफ़्तखोरी का रोग शुरु हुआ फ़ोकट के ई-मेल खातों से, किसी ने शिकायत नही की फ़िर बात फ़ोकट की होस्टिंग, फ़ोकट के कनेक्शन से होती हूई एक बहुत ही जानदार तकनीक तक पहुंची.
बात कर रहा हूं सिरे से सिरे जोड कर (peer-to-peer) संगीत के वायरस जैसे प्रसार करने वाले साफ़्टवेयर – नेपस्टर और आडियोगेलेक्सी, कज़ा पर हुए बवाल की – चहूं ओर मुफ़्त का संगीत बहने लगा! करोडपति संगीत कंपनियां घाटा खाते खाते खुन्नस खाने लगीं और अपने बाहूबल का प्रयोग कर टोपा हुआ संगीत बंटवाने वाले साईट्स बंद करवाने लगीं. फ़िर अगला निशाना संगीत बांटने वालों को बनाया जाने लगा.

http://zeropaid.com और http://slashdot.com पर इन रिकार्डिंग कंपनियों से खुन्नस खाने वालों के तो अलग आन-लाईन समाज तक बन गए! वजह है खराब संगीत उन्चे दामों मे बेचा जाना और peer-to-peer साफ़्टवेयर लिखने वाले दिवार पर उभरती इबारत भांप चुके थे.

सो हुआ भी वही और खबर बन गई, संगीत के धंधे में बिचौलिये ही मलाई खाते हैं – कलाकार और श्रोता दोनो मूर्ख बनाए जाते हैं – एक एलबम मे १-२ ठीक ठाक गाने बाकी कचरा और हर सीडी पर उन्चे दामो की लूट खसोट! तो धंधा तो मजे का है – अब पाईरेसी (मुफ़्त मे टोपा गया माल) , सीरे जोडने वाले मुफ़्त जुगत बंद करवाने के बाद ये कंपनियां अपनी आन-लाईन दुकाने उसी तकनीक को प्रयोग कर के शुरु कर रही हैं जो टोप कर बांटने के काम आती रही है. ये तकनीक वेब-साईट पर संगीत बेचने से भी ज्यादा असरदार है! इन्टरनेट पर peer-to-peer पैसा ले कर संगीत वितरण करने का फ़ायदा ये की सीडी बनाने और दूकानो तक पहुंचाने का खर्चा भी बच जाएगा. ipod जैसे हार्डवेयर उत्पाद बनाने वालों की तो बन आई है. पर अब तो संगीत peer-to-peer बंटेगा पर अनुमति से और इस का असर itunes, walmart, music match etc. दूसरी आन-लाईन संगीत बेचने वाली साईट्स पर भी पडेगा. ये खबर बहुत दूरगामी परिवर्तन का संदेशा लाई है – मगर डाल-डाल पात पात में साफ़्टवेयर बनाने वाले आगे रहेंगे तो कडी ये रही पर इस समाचार पर अपने विचार –

आज पाडकास्टिंग जैसी विधियां उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग कोई भी ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा कर रहा है, जिनकी मदद से आज भी संगीत पहले से भी आराम से फ़ोकट में बह रहा है और mp3 का लेन देन करने वाले ब्लाग्स ६३% बढे हैं. peer-to-peer से ये ज्यादा घातक तकनीक है – वितरण के मामले में क्योंकी ज्यादा सुरक्षित है.

तो हासिल-ए-पेल ये, की जिसको पाईरेसी करने का सलीका है उसे कोई रोक नही सकता – जिस तिकडमी को मुफ़्त का माल मिलने लगे वो खीसा ढीला नही करना चाहता. वहीं कई श्रोताओं का यह कहना है की संगीत पर पैसा कलाकार के प्रति सम्मान होने पर जरूर खर्च किया जाता है क्योंकी ऐसा संगीत हमेशा सहेजा जाता है – नया हो या पुराना.

  1. हमारे एक आदरणीय अधिकारी कहा करते थे-मनुष्य मष्तिष्क बड़ा उर्वर होता है.तू डाल-डाल तो मैं पात-पात हमेशा से होता रहा है,होता रहेगा.

  2. Mitul ने कहा:

    Great to see you your blog. Good work keep it up.

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