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अनाम के नाम
हिंदी चिट्ठाजगत से नए नए हस्ताक्षर जुड रहे हैं. एक अनाम भाई का अंतर्मन भी हिंदी-प्रेम में मुखर भया है – बधाई और स्वागत!
अनाम भाई ने पार पाईं वही शुरुआती दिक्कतें – “क्या लिखूं, कैसे (किस टूल की सहायता से) लिखूं! वही शुरुआती विस्मय – “इतने चिट्ठाकार, इतने समय से लिख रहे हैं हम कहां थे!”
इतना सब कुछ है लिखने को…परन्तु धीमा हिन्दी टंकण आडे आ जाता है। Input mode Hindi करके Microsoft On Screen Keyboard की सहायता लेकर लिख रहा हूं। बाकी सब इतना सब कुछ जाने कैसे लिख रहे हैं। फोनेटिक कीबोर्ड की सहायता लेना अच्छा नहीं लगता। हिंदी को अंगरेजी का गुलाम क्यों बनाएं। वैसे ईस्वामी जी को हग बनाने पर बधाई एवं साधुवाद।
शुक्रिया साहब!
दिलचस्प नजरिया है, “फ़ोनेटिक की बोर्ड की सहायता लेना अच्छा नही लगता, हिंदी को अंग्रेजी का गुलाम क्यों बनाएं?”
मैने और मुझसे पहले कई लोगों ने फ़ोनेटिक या ट्रांसलिटरेशन वाली जुगतें बनाई हैं – पता है क्यों?
क्योंकी हम बना सके!
क्योंकी हम अंग्रेजी की-बोर्ड की सहायता से भी मात्र १५० लाईन के आसान से कोड से एक-दम सही देवनागरी छाप सके और बिना कोई कुंजी-विन्यास सीखे – जब की उलट नही हो पाता मतलब आप इस तरीके से अंग्रेजी किसी और भाषा के की बोर्ड से नही लिख सकते – अंग्रेजी ध्वनीय आधार पर हिंदी या संस्कृत जैसे वैज्ञानिक नही है और सधी हुई नही है की आप आसान सी जुगत बना कर किसे और भाषा के कुंजी-पटल से लिख लो!
go = गो होता है गू नही और to = टु होता है टो नही – तो आप ये फ़ोनेटिक तरीका उलट दिशा मे चला ही नही सकते होते अगर चाहते भी!! यही है संस्कृत आधारित भाषाओं की खासियत – परम-चरम वैज्ञानिक हैं!
मुझे बस एक बात कहनी है, बात जरा टेढी है और अगर-मगर भरी है पर मुद्दे तक जाउंगा प्रयास रहेगा –
अगर दुनिया भर मे हिंदी जानने वाले और हिंदी बोलने वाले लोग तकनीकी और राजनैतिक तौर पर इतने सफ़ल होते की जो अंग्रेजी की-बोर्ड की संख्या और स्थान है वो हिंदी की बोर्ड का होता तो क्या होता?
तो अंग्रेजी वाले उलट फ़ोनेटिक जुगत बनाते ताकी जिन लोगों ने अंग्रेजी कीबोर्ड इस्तेमाल नही किए वो भी हिंदी वाले की बोर्ड की सहायता से अंग्रेजी लिख सकते – है ना – तो अगर वो ऐसा करना चाहते होते ना तो भी नही कर पाते! कारण उपर बता चुका हूं!
हम कर पा रहे हैं – जो अंग्रेजी मे लिखते थे उनको प्रारंभ में फ़ोनेटिक जुगतें जमती हैं आसान लगती हैं -क्योंकी वो यूं भी अंग्रेजी मे हिन्दी (ऐसे – angrejee me hindee) लिखते रहे हैं! ये तो हिंदी को कहीं से भी लिख सकने का बहुत बढिया तरीका है सो अंग्रेजी की सहायता से ही उसी से मुक्ति ही मिली ना! अब हमें दोनो लिपियों का ज्ञान है जो हिंदी लिखने के काम आता है उस की बोर्ड से जिसकी सहायता से हम अंग्रेजी मे काम कर रहे हैं -क्या बुरा है नए शुरु करने वालों के लिए!
आपके विचारो से सहमत या असहमत नहीं हूं – बस एक नुक्ते की बात आप तक पहुंचाना चाहा!



















स्वामी दादा,
इन्सक्रिप्ट की बोर्ड के बारे में आप की क्या राय है। ससुरा शुरु में बहुत तंग किया अब तो अचम्भा होता है कि कैसे लिख लेते हैं। कुछ अनाम बाबू वाली भावना ही थी कि तमाम मुश्किलों के बावजूद इन्स्क्रिप्ट सीखा। बाकी सीधी बात यह है कि हर आदमी को अपने आप को अपने तरीके से खुजाने की आजादी है। टोरवाल्ड बाबू को खाज हूई तो लिनक्स का जन्म हुआ स्वामी जी की खाज ने दुनिया को हग दिया।
मिर्ची सेठ
हां तो तगादा फिर से स्वामीजी से जो कि
पंकज को करना चाहिये था -वर्डप्रेस का
हग प्लग इन कहां है? कब बनेगा?
पंकज भाई और अनूप भाई,
कम कुंजियाँ दबा कर काम होता है तो क्या बुरा है! इसलिए इंस्क्रिप्ट लेखनी को भी इस टूल डाला जाना चाहिए ताकी जो एकाधिक विन्यास पर हाथ जमाना चाहे उसे कोई दिक्कत ना हो, कोई भी अपने किसी भी पसंदीदा विन्यास को प्रयोग करे.
इस विषय पर जल्दी ही अक्षरग्राम पर लिखना चाहता हूँ, वर्ड-प्रेस प्लग-इन बनाने के लिए जितनी तकनीकी जानकारी एकत्र करना है सब इन्टरनेट पर उपलब्ध है, मगर मेरा ही पीएचपी पर हाथ कच्चा है. हाँ कोई भी जानकार आगे आना चाहे, प्लग्-इन रैप्पर लिखना चाहे तो बाकी जुगत मै दिखा सकता हूँ कैसे की है – हर संभव सहायता के लिए हाजिर हूँ. अभी तक मैने व्यक्तिगत तौर पर हिंदी जानने वाले वर्ड्-प्रेस के किसी प्लग-इन लेखक से बात नही की है. करना चाहता हूँ! स्वयं-सेवी आगे आएंगे तो खुशी होगी! मुझे भी जल्दी कुछ नया सीखने मिलेगा! इसे बहु-भाषी और बहु-विन्यासी प्लग बनाएं या हर भाषा का एक प्लग, जैसे भी, साधन उपलब्ध होने चाहिए. वर्ड-प्रेस ही नही अन्य एप्लीकेशन्स के लिए भी!
अभी इस जुगत की कुछ कमजोरियाँ हैं जो बहुत बडी तो नही हैं पर उनको सुधारना है.
मेरे विचार मे प्लग इन बनाने का काम इस जुगत को बहु-विन्यासी बनाने के साथ-साथ भी किया जा सकता है.
समय का तकाजा है कि कम्प्यूटर पर हिन्दी लेखन सरल हो, सहज हो और बिना किसी अतिरिक्त ट्रेनिंग के सम्भव हो | तभी अधिकाधिक लोग इसे अंगीकार करेंगे | और जब बहुत सारे लोग , बहुत सारी सामग्री लिखना शुरू कर देगे तो फोनेटिक की-बोर्ड ( अँगरेजी के सहारे हिन्दी लिखने की वाध्यता ) अपने आप गायब हो जायेगी | शुरू करने के लिये और कम सामग्री टाइप करने वालों के लिये अभी तो फोनेटिक ट्रान्सलिटरेशन ही सबसे आसान तरीका दीख रहा है |
स्वामी महाराज की बात मे दम है कि अंगरेजी के सहारे हिन्दी का भला हो रहा हो तो ये भी स्वागत योग्य है |
अनुनाद
स्वामी जी,
अपने नाम आपके द्वारा इतना बड़ा कमेंट पाके धन्य हो गया मैं।
अभी एक बहुत ही बड़ा उत्तर लिखा, सबमिट दबाया..आवश्यक खाने भरें वाला सन्देश दिखा..ब्राउज़र का बैक बटन दबाते ही सब कुछ गुम हो गया…प्लीज़ इसके लिये कुछ कीजिये। फिर से लिखना पड़ेगा!!
इन शॉर्ट, अभी के लिये तो चलेगा फोनेटिक कीबोर्ड, पर एक मानक समाधान निकालना पडेगा| यह सत्य है कि फोनेटिक कीबोर्ड ने हिन्दी की सहायता ही की है| मेरा मतलब था कि निकट भविष्य में हमें एक (और सिर्फ एक) मानक समाधान निकालना पडेगा| सही कहा आपने कि कम कुन्जियाँ दबा कर काम होना चहिये|
पंकज जी आप इंस्क्रिट दारा ही लिखते है? कैसा महसूस कर रहे हैं| मुझे तो कई अक्षर ढूंढे नहीं मिल रहे थे सो मैं हिन्दी आई एम ई फोनेटिक की शरण में आ गया। आशा है कि मैं आप लोगो से कुछ सीखूंगा।
साधुवाद!
अनाम