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नया iPhone 4 पाने की होड! एप्पल स्टोर...

तकनीकी प्रेम कहें या उपभोक्तावाद की पराकाष्ठा, कल शाम से अमरीका भर में एप्पल कंपनी के स्टोर्स के बाहर लोग कुर्सीयाँ जमाए बैठे थे. वे जल्दी से जल्दी आज लॉंच होने वाले आई-फ़ोन के नए चौथे संस्करण अपने हाथ में पा लेना चाहते हैं.

नया iPhone 4 पाने की होड! एप्पल स्टोर्स के बाहर बडे जमघट
दिनांक: जून 24, 2010 | चिट्ठाकार:: eswami

आपके काम पर ध्यान बढाने में मददगार सॉ...

आपके काम पर ध्यान बढाने मे मददगार जबरदस्त अनुप्रयोगों की एक सूची.

आपके काम पर ध्यान बढाने में मददगार सॉफ़्टवेयर्स (२०१० की सूची १)
दिनांक: जून 17, 2010 | चिट्ठाकार:: eswami

वीडियो: ब्लाग्स सोशियल नेटवर्किंग के ...

व्यव्हारिक रूप से हिन्दी चिट्ठे वालों का सोश्यल नेटवर्क ब्लाग-एग्रीगेटर्स पर बहुत हद तक निर्भर है और ब्लाग –एग्रीगेटर्स अपने ब्लाग-लिंक डाटाबेस पर… ये अच्छी स्थिती नही है, इन कुछ ब्लाग-लिंक डाटाबेसेज़ का स्थान एकाधिक फ़्रेंण्ड्‍‍स नेटवर्क्स को लेना होगा – क्यों? यदि कोई एग्रीगेटर तकनीकी अनुपलब्धता के चलते चालू नही है तो आपका नेटवर्क भी गया खड्डे में… तो इसका निदान और कैसे संभव है?

वीडियो: ब्लाग्स सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी हैं
दिनांक: अक्टू. 10, 2009 | चिट्ठाकार:: eswami

एग्रीगेटर्स के जमाने में पाठकों को आत...

कोई भी तकनीक तभी सफ़ल होती है जब वो अंतत: जीवन के किसी मानवीय फ़लक को छू ले. और यह जुगत ठीक यही करती है.

एग्रीगेटर्स के जमाने में पाठकों को आत्मीय स्पर्श दें!
दिनांक: अक्टू. 9, 2009 | चिट्ठाकार:: eswami

चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार...

अच्छा लेखन सटीक शब्दों के चुनाव के बिना संभव नहीं है. वर्तनी की गलतियां अभ्यास से जाती हैं – चिट्ठाजगत में रमण कौल, आलोक जैसे वरिष्ठों ने इस पर काफ़ी जोर दिया है. यह कमी मुझ जैसे कई पुरानों मे भी है. वाक्य विन्यास चाहे जितना अच्छा हो, सही जगह, सही शब्द पिरोना एक कला है.

चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय
दिनांक: अक्टू. 9, 2009 | चिट्ठाकार:: eswami

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