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भारतीय लोग इतने बेवकूफ़ क्यों हैं?...

मैं एक अनिवासी भारतीय - या जैसे की तोहमत दी जाती है एक नान-रिलाएबल इंडियन हूं. लगभग एक दशक से भारत से बाहर हूं - हिंदी में ब्लाग लिखता हूं तो कहीं खालिस भारतीय ही हूंगा ना - इसीलिये बहुत दु:ख के साथ पूछना पड रहा है अपने भारत में रहने वाले भाईयों-बहनों से की आप(और हम) इतने बेवकूफ़ क्यों हैं?

भारतीय लोग इतने बेवकूफ़ क्यों हैं?
दिनांक: फर. 23, 2008 | चिट्ठाकार:: eswami

दरकती चुप्पी!

अगर किसी चीज पर ब्लाग लिखना नापसंद है तो वो...

दरकती चुप्पी!
दिनांक: सित. 2, 2005 | चिट्ठाकार:: eswami

कह तो दूँ …

प्रेम आंखों पर विश्वास की पट्टी बांधता है और इधर जनता की समझ पलक भी नही झपकती, कविता नही हो सकती.

दिनांक: फर. 21, 2005 | चिट्ठाकार:: eswami

शविता के टुकडे...

हाल ही में इन्टर्नेट पर कहीं-कहीं कविताओं के धूल-खाते फ़ोस्सिल मिले, जैसे किसि एन्टीक चीज की फोटो दिखी हो. जनता आज-कल पुराना माल फ़िर सजा रही है - पता नही किस उम्मीद में!

दिनांक: फर. 20, 2005 | चिट्ठाकार:: eswami

नाम में क्या है!...

अनूपजी का प्रतिक्षित परचा पढा और साथ ही...

दिनांक: फर. 3, 2005 | चिट्ठाकार:: eswami