लेख

दरकती चुप्पी!

अगर किसी चीज पर ब्लाग लिखना नापसंद है तो वो हैं गंभीर मुद्दे. मुझे कठिन विषयों से परेशानी नही होती पर दुनिया के हालात और इंसान की करतूतों से जन्मी खबरों पर लिखना मतलब अपना समय बर्बाद करना. मेरे लिखने से ना कोई सुधरेगा और ना कुछ बदलेगा. ये दुनिया ऐसे ही चलेगी. किसी को [...]

कह तो दूँ …

प्रेम आंखों पर विश्वास की पट्टी बांधता है और इधर जनता की समझ पलक भी नही झपकती, कविता नही हो सकती.

शविता के टुकडे

हाल ही में इन्टर्नेट पर कहीं-कहीं कविताओं के धूल-खाते फ़ोस्सिल मिले, जैसे किसि एन्टीक चीज की फोटो दिखी हो. जनता आज-कल पुराना माल फ़िर सजा रही है – पता नही किस उम्मीद में!

नाम में क्या है!

अनूपजी का प्रतिक्षित परचा पढा और साथ ही जीतेन्द्रजी का काम-सूत्र बार वाला आईडिया चोरी हो जाने कि खबर – दिमाग मे दोनो उत्तम सुराओं का काकटेल हो गया!
दिन भर दफ़्तर में मूड बना रहा. अनूपजी हिंदिनी नाम रखे जाने पर बोले – ” भाई नाम तो गणेशजी की तरह ही [...]

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