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चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार...

अच्छा लेखन सटीक शब्दों के चुनाव के बिना संभव नहीं है. वर्तनी की गलतियां अभ्यास से जाती हैं – चिट्ठाजगत में रमण कौल, आलोक जैसे वरिष्ठों ने इस पर काफ़ी जोर दिया है. यह कमी मुझ जैसे कई पुरानों मे भी है. वाक्य विन्यास चाहे जितना अच्छा हो, सही जगह, सही शब्द पिरोना एक कला है.

चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय
दिनांक: अक्टू. 9, 2009 | चिट्ठाकार:: eswami

असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें...

बात नये या पुराने चिट्ठाकार की नहीं है –...

असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें?
दिनांक: जुलाई 15, 2008 | चिट्ठाकार:: eswami