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	<title>हिंदिनी&#187; theme</title>
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	<description>हिन्दी मे वेब-पत्रिका व ब्लाग समूह</description>
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		<title>क्या आपका ब्लॉग ‘ऑर्गेनिक’ है?</title>
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		<pubDate>Sat, 19 Jul 2008 02:07:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
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		<description><![CDATA[खुशी है की चिट्ठाकारी पर लिखे लेखों की प्रतिक्रिया में नए ब्लागर्स ई-मेल भेज रहे हैं, मिलते जुलते सवाल पूछ रहे हैं. पिछले लेख पर मिली मेल कहती है  &#8221; विषय के अनुरूप  मेरे ब्लाग की थीम चुनना एक चुनौती भरा काम लगता है, क्या करूं &#8211; विषय रोज बदल जाते हैं!&#8221; हर ब्लाग की एक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>खुशी है की चिट्ठाकारी पर लिखे लेखों की प्रतिक्रिया में नए ब्लागर्स ई-मेल भेज  रहे हैं, मिलते जुलते सवाल पूछ रहे हैं. पिछले लेख पर मिली मेल कहती है  &#8221; विषय के  अनुरूप  मेरे ब्लाग की थीम चुनना एक चुनौती भरा काम लगता है, क्या करूं &#8211; विषय रोज  बदल जाते हैं!&#8221;</p>
<p>हर ब्लाग की एक जलवायू होती है और कई मौसम होते है. फ़ोटोग्राफ़ी वाले ब्लाग पर  चाहे जो हो मुख्य खाका संकरा नहीं चलेगा &#8211; फ़ोटो अलग अलग हो सकती हैं &#8211; लैंडस्केप या  पोर्ट्रेट. ठीक वैसे ही किसी गंभीर कंपनी के व्यवसायिक ब्लाग पर कार्टून नहीं  चलेंगे. यह सहज-ज्ञान की बात है और निर्णय आसान है.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/217/1515379957_b32903e55f_m.jpg" alt="" width="240" height="191" />लेकिन किसी व्यक्तिगत ब्लाग की जलवायू और उसका मौसम ज्यादा परिवर्तनशील होता है  &#8211; आज मन किया लेख लिखें कल मन किया फ़ोटो दिखाएं तीसरे दिन कुछ और! भईये ये परेशानी  की नहीं खुशी की बात है! आपका ब्लॉग जीवंत है परिवर्तनशील है &#8211; ठीक आप ही की तरह और  अपने ब्लाग को एक जीवंत ऑर्गेनिक कृति बनाए रखना और साथ ही पठनीय भी &#8211; एक  जिम्मेदारी वाला काम तो है!  बहुत बडी बात है की आपका ब्लाग मात्र  आपके व्यक्तित्व  का एक ही पहलू दिखाने से अधिक कर रहा है तो तो भई मुद्दा दर-असल ये है की आपके ब्लाग के बदलते स्वरूप को झेल सकने की क्षमता  वाली थीम कैसी हो.  ऐसे में थीम का लचीलापन काफ़ी महत्व रखता  है और महत्व रखती हैं कुछ टिप्स -</p>
<p>१. सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात है की एकाधिक पोस्ट एक के नीचे एक दिखाने से  बचें. जब भी कोई पोस्ट लिखी गई थी &#8211; वो अपने आप में अलग थी लेकिन उन्हें पढने के  लिये की गई स्क्रोलिंग आंखों के आगे से एक औगढ और असंतुलित बिंब गुज़ारती है. अपने  ब्लाग पर आप को सब अच्छा लगता है .. लग रहा है विषयों, चित्रों और मूड का कोलाज बन  गया लेकिन ऐसा है नहीं &#8211; पाठक को कनेक्शन और स्पष्टता चाहिए. कुछ दिन बात बात समझ  में आने लगती है की कुछ गडबड है.</p>
<p>२. उपरोक्त वजह से, एक कडी पर एक लेख हो और वो तार्कित तरीके से दूसरे लेखों से  जुडा हुआ हो.. हर एक का मसौदा और मूड भिन्न होने पर भी खास फ़र्क नहीं पडेगा.</p>
<p>३. फ़्ल्यूइड थीम कब प्रयोग करें? फ़्ल्यूईड थीम अपने मुख्य बीच वाले बडे सेक्षन  का आकार ब्राऊजर की विंडो के आकार के हिसाब से खुद ब खुद जमा लेती है &#8211; इसका फ़ायदा  ये होता है की पाठक को अधिक नियंत्रण मिलता है. लेकिन जब आप इसका प्रयोग करें तो  लेख को लिख कर उसकी जमावट को छोटे और बडे विंडो और कम ज्यादा रिज़ाल्यूशन पर ज़रा चला  कर देख लें की लेख की जमाव्ट ठीक तो लग रही है &#8211; यह २ मिनट की मेहनत आपके सभी  पाठकों को खुश रख सकती है!</p>
<p>४. गर्मियों में सूती कपडे पहने जाते हैं और सर्दियों में गरम वस्त्र. उसी तरह  थीम का भी एक मौसम है और समय है. नये फ़ीचर्स आएंगे जो थीम को बदलने के लिये बाध्य  करेंगे लेकिन थीम आपके लेखन के मूड को प्रभावित ना करे यह ध्यान रहे. मसलन कोई गॉथ  थीम लगा कर आप  दिवाली का लेख नहीं लिख सकते &#8211; वो हार्ड-रॉक बैंड समूह के लिये ही  उचित है &#8211; इसलिये आम नीयम है की अगर अलग अलग विषयों पर लिखना है तो सेफ़ चलें .. ऐसी  थीम चुनने से बचें जो किसी खास बडे फ़ोटो वाले बैकग्राऊंड पर आधारित हो.</p>
<p>५. अगर आप एक ही थीम से जल्दी-जल्दी बोर हो जाते हैं तो मध्यम मार्ग चुनें &#8211; थीम  का खाका वही रखें लेकिन उसके कलर&#8211;कांबिनेशन की विविधता चुनने की सुविधा हो. आप भी  खुश और पाठक भी.</p>
<p>६.  अपना [चुराया हुआ] आईडिया है की  नवीनता बनाए रखने  का जिम्मा थीम के बजाए  चित्रों पर डालें लेकिन चित्रों का चुनाव और आकार युक्तिसंगत हो. उदाहरण के लिये  हिंदिनी पर हम फ़्लिकर से फूलों वाले फ़ोटो की फ़ीड ले कर दिखाते हैं &#8211; लेकिन हर फ़ीड  अलग अलग टैग्स पर आधारित हैं.  चूंकी फ़ोटो का आकार कभी नहीं बदलता दृष्यावली  संतुलित लगती है.</p>
<p>तो अब मामला जमा कुछ? <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<div id="crp_related"><h3>ये भी देखें:</h3><ul><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/177" rel="bookmark"><img width="50" height="50" src="http://hindini.com/hindini/wp-content/uploads/2009/09/Jo_Blogg_-_One_Hundred_-150x150.jpg" class="crp_thumb wp-post-image" alt="सौ या अधिक चिट्ठा-प्रविष्टियां लिख चुके नये चिट्ठाकारों के लिये" title="सौ या अधिक चिट्ठा-प्रविष्टियां लिख चुके नये चिट्ठाकारों के लिये" border="0" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/177" rel="bookmark" class="crp_title">सौ या अधिक चिट्ठा-प्रविष्टियां लिख चुके नये चिट्ठाकारों के लिये</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/160" rel="bookmark"><img src="http://z.about.com/d/interiordec/1/G/N/G/o1-color-compl-bluorj.jpg" alt="अपने ब्लॉग की थीम (टैंप्लेट) कैसे चुनें और संवारें?" title="अपने ब्लॉग की थीम (टैंप्लेट) कैसे चुनें और संवारें?" width="50" height="50" border="0" class="crp_thumb" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/160" rel="bookmark" class="crp_title">अपने ब्लॉग की थीम (टैंप्लेट) कैसे चुनें और संवारें?</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/179" rel="bookmark"><img width="50" height="50" src="http://hindini.com/hindini/wp-content/uploads/2009/09/hindi_trans_keyb_blue-150x150.jpg" class="crp_thumb wp-post-image" alt="हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!" title="हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!" border="0" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/179" rel="bookmark" class="crp_title">हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/153" rel="bookmark"><img src="http://farm4.static.flickr.com/3076/2627017076_7fc8aaa673_m.jpg" alt="स्पैमिंग पर शोध: ब्लॉगर्स पर ‘वियाग्रा’ के प्रभाव" title="स्पैमिंग पर शोध: ब्लॉगर्स पर ‘वियाग्रा’ के प्रभाव" width="50" height="50" border="0" class="crp_thumb" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/153" rel="bookmark" class="crp_title">स्पैमिंग पर शोध: ब्लॉगर्स पर ‘वियाग्रा’ के प्रभाव</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/158" rel="bookmark"><img src="http://farm1.static.flickr.com/63/152769885_384a5bb98d_m.jpg" alt="क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?" title="क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?" width="50" height="50" border="0" class="crp_thumb" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/158" rel="bookmark" class="crp_title">क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?</a></li></ul></div>]]></content:encoded>
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		<title>अपने ब्लॉग की थीम (टैंप्लेट) कैसे चुनें और संवारें?</title>
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		<pubDate>Thu, 17 Jul 2008 23:02:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
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		<description><![CDATA[इस लेख में आपको मिलेगी अपनी थीम या टैंप्लेट को दूसरों की थीम से तुलना करने की और उसे बेहतर करने की एक शानदार जुगत! थीम, स्टाईल, टैंप्लेट आदी नाम कई हैं पर काम एक ही है &#8211; आपके ब्लाग मसौदे का प्रस्तुतिकरण. मेरा एक मित्र दिल्ली शहर के एक बडे होटल का माना हुआ शेफ़ है. एक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>इस लेख में आपको मिलेगी अपनी थीम या टैंप्लेट को दूसरों की थीम से तुलना करने की  और उसे बेहतर करने की एक शानदार जुगत!</p>
<p>थीम, स्टाईल, टैंप्लेट आदी नाम कई हैं पर काम एक ही है &#8211; आपके ब्लाग मसौदे का  प्रस्तुतिकरण.</p>
<p>मेरा एक मित्र दिल्ली शहर के एक बडे होटल का माना हुआ शेफ़ है. एक बार उसने कहा  था की जब तुम खाना खाते हो तो उसे पांच अलग अलग तरीके से खाते हो - पहले आंखों से,  फ़िर नाक से, फ़िर ज़ुबान से फ़िर तन से फ़िर मन से. अगर एक भी विभाग कमजोर है तो अनुभव  अधूरा रह जाएगा और अगर इनका ताल-मेल और संतुलन नहीं है तो भी &#8211; ये विज्ञान कम कला  अधिक है!</p>
<p>ठीक वैसे ही आपके ब्लाग की थीम का हर पहलू पाठक के मन और मूड पर असर डालता है &#8211;  सीधे मुख्य और पहली पांच बातों पर आते हैं की अपने ब्लाग को स्वादिष्ट कैसे बनाएं -</p>
<p><img src="http://z.about.com/d/interiordec/1/G/N/G/o1-color-compl-bluorj.jpg" alt="" align="left" /> <strong>रंग का चुनाव:</strong> रंग व्यक्तित्व का आईना हैं &#8211; जैसे की  गुलाबी रंग स्त्रैण विषयों से जुडे ब्लाग्स पर अधिक प्रयोग किये जाते हैं.</p>
<p>अगर आप बनी बनाई थीम या टैंप्लेट का प्रयोग कर रहे हैं तो  मान के चलिये आपके  थीम डिजाईनर नें रंगों के तालमेल पर बहुत वैज्ञानिक सोच का प्रयोग किया है &#8211; ये  उस्तादों का काम है. मसलन, आंखों को चुभने वाले कठोर रंग या फ़ांट को पढने में अडचन  देने वाले रंगों से बचा गया है. <strong>आपकी फ़ांट का  डिफ़ाल्ट आकार</strong> भी कई चीजों पर निर्भर करता है. आपके अधिकतर पाठकों के  कंप्यूटर मानिटर का रिजाल्यूशन, उनका आयूवर्ग आदी सब सोचा समझा गया है.  अब  दारोमदार आपके चुनाव पर है &#8211; <strong>विषय के अनुरूप रंग और फ़ांट के सही आकार का  चुनाव करें और अपने पाठकों की राय जानें. </strong></p>
<p><strong><img class="alignright" style="float: right;" src="http://farm1.static.flickr.com/5/7881776_c8d6c18c8c_m.jpg" alt="" width="168" height="102" align="left" /></strong></p>
<p><strong> चित्रों का चुनाव:</strong> चित्र, उनका विषय,  आकार और स्थिती अपने  वजन की वजह से ध्यान, पठनीयता और मूड को प्रभावित करते हैं - कोशिश ये हो की मसौदे  को पूरी तवज्जो मिले.. इसलिये चित्रों का आपस में और लेख के साथ तालमेल और संतुलन  जरूरी है. आजकल चित्रों पर जोर अधिक है चूंकी वे भावों को प्रथम-दृष्टया अधिक आसानी से व्यक्त कर सकते हैं.</p>
<p>नोट: सही चित्रों का तालमेल बिठाना एक बार में हो संभव नहीं है और ये समय लेता है.</p>
<p><strong><img src="http://farm3.static.flickr.com/2002/2065531937_cd5168ce07_m.jpg" alt="" width="168" height="112" align="left" /> सरंचना और उपयोगिता:</strong> मानकों (standards) का औचित्य है, हर देश  में सडक के हिसाब से कार का स्टेयरिंग किसी एक बाजु होता है. इन्डिकेटर की और  ब्रेक/एक्सेलेटर की जगह तय है &#8211; ताकी गाडी चलाने का अनुभव खुशनुमा हो और सुरक्षित  भी. इसका भी एक विज्ञान है. ज्यादा कलाकारी भी भारी पड जाती है. ठीक वैसे  ही टेंप्लेट में नेविगेट करने वाली चीज़ें की स्थिती आपके ब्लाग नेविगेशन को -  एक पन्ने से दूसरे तक जाने के काम को सहज बनाए. इस विषय पर मेरा पिछला ब्लाग भी  पढें.</p>
<p><strong><img class="alignright" style="float: right;" src="http://farm1.static.flickr.com/11/17554898_dff2ef8074_m.jpg" alt="" width="168" height="126" align="left" /> व्यक्तिगत स्पर्श:</strong> मैंने एक ब्लाग देखा था जिसमें लेखक ने एक  कोना अपनी चार साल की बच्ची द्वारा बनाई गईं पेंटिंग्स के खिंचे चित्रों को सजाने  के लिये रख छोडा था. कोई भी अच्छा मानवीय आईडिया व्यक्तिगत ब्लाग की सुंदरता में तो  चार चांद लगा देता है. जाना-माना <a href="http://postsecret.com/">http://postsecret.com</a> तो इस का ओवर द टॉप (चरम)  उदाहरण है &#8211; साईट का रंग काला है ताकी चित्रों पर ही ध्यान हो &#8211; (शायद आम ब्लाग्स  में ये करना जघन्य अपराध सा हो). आपकी टैंप्लेट में ऐसी चीजों की सही और संतुलित  जगह जरूर हो &#8211; लेकिन  ऐसे फ़ीचर्स ब्लाग को सराबोर ना करें. मसलन एक के नीचे एक आज  का दोहा, आज का चुटकुला, आज का ये आज का वो .. ज्यादा हो जाता है.</p>
<p><strong>जुगत:</strong> तो अब तैयार हैं आप अपनी जुगत के लिये?  ये है <a href="http://www.microsoft.com/downloads/details.aspx?familyid=e59c3964-672d-4511-bb3e-2d5e1db91038&amp;displaylang=en" target="_blank">इन्टरनेट एक्स्प्लोरर डेवलपर टूल बार</a> &#8211; इसके लंबे नाम से डरिये  नहीं. अगर आप IE प्रयोग करते हैं तो इसे माईक्रोसाफ़्ट की साईट से डाऊनलोड कर के  इन्स्टाल कीजिये.</p>
<p>अब अपने IE ब्राऊजर में view-&gt; explorer bar -&gt; IE developer bar पर क्लिक  कीजिये. अपनी साईट खोलिये &#8211; आपके ब्राऊजर के निचले हिस्से में आपको दिखने लगेगी  आपकी साईट की सरंचना &#8211; टूल से खेलिये और जानिये अपने ब्लाग के नेविगेशन और  अंग-प्रत्यंगों के गुणों को और उसकी तुलना किसी मनपसंद सुंदर साईट से कर के अपनी  टैंप्लेट में क्या परिवर्तन करने/करवाने हैं ज्ञात कीजिये. काम होने पर डेवलपर बार  को फ़िर से मिन्यू में जा कर अन-चेक कर दीजिये&#8230;. और हां अपने अनुभव हमसे और दूसरों से बांटिये भीं</p>
<div id="crp_related"><h3>ये भी देखें:</h3><ul><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/179" rel="bookmark"><img width="50" height="50" src="http://hindini.com/hindini/wp-content/uploads/2009/09/hindi_trans_keyb_blue-150x150.jpg" class="crp_thumb wp-post-image" alt="हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!" title="हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!" border="0" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/179" rel="bookmark" class="crp_title">हिन्दी दिवस: अंग्रेजी कुंजीयों से हिन्दी लिखने की चुनौतियाँ व हिंग्लिश परिवर्तक की जरूरत!</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/158" rel="bookmark"><img src="http://farm1.static.flickr.com/63/152769885_384a5bb98d_m.jpg" alt="क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?" title="क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?" width="50" height="50" border="0" class="crp_thumb" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/158" rel="bookmark" class="crp_title">क्या आपको अपना ब्लागिंग प्लेटफ़ार्म बदलना चाहिये?</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/157" rel="bookmark"><img src="http://farm2.static.flickr.com/1160/1031185271_e0ebccf127_m.jpg" alt="असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें?" title="असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें?" width="50" height="50" border="0" class="crp_thumb" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/157" rel="bookmark" class="crp_title">असली चिट्ठाकारों का ध्यान कैसे खींचें?</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/212" rel="bookmark"><img width="50" height="50" src="http://hindini.com/hindini/wp-content/uploads/2009/10/shabd41-150x150.jpg" class="crp_thumb wp-post-image" alt="चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय" title="चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय" border="0" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/212" rel="bookmark" class="crp_title">चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय</a></li><li><a href="http://hindini.com/hindini/archives/149" rel="bookmark"><img src="http://farm3.static.flickr.com/2114/2280565166_bd2da4a9db.jpg?v=0" alt="भारतीय लोग इतने बेवकूफ़ क्यों हैं?" title="भारतीय लोग इतने बेवकूफ़ क्यों हैं?" width="50" height="50" border="0" class="crp_thumb" /></a> <a href="http://hindini.com/hindini/archives/149" rel="bookmark" class="crp_title">भारतीय लोग इतने बेवकूफ़ क्यों हैं?</a></li></ul></div>]]></content:encoded>
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