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	<title>हिंदिनी&#187; tips &amp; tricks</title>
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	<description>हिन्दी मे वेब-पत्रिका व ब्लाग समूह</description>
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		<title>सौ या अधिक चिट्ठा-प्रविष्टियां लिख चुके नये चिट्ठाकारों के लिये</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Sep 2009 22:23:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
				<category><![CDATA[ब्लॉगिंग और वेबजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[Blogging]]></category>
		<category><![CDATA[features]]></category>
		<category><![CDATA[tips & tricks]]></category>

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		<description><![CDATA[सौ या उस से अधिक चिट्ठा प्रविष्टियां लिखे चिट्ठाकारों ने कुछ महत्वपूर्ण परिस्थितियों का समाना जरूर कर लिया होगा – यह पोस्ट कुछ साझा समस्याओं और उनके निदान के बारे मे है –  आशा है कि इन्टरनेट पर नये सक्रिय हुए हिंदीभाषी मित्रों के किसी काम आएगी. (१) प्रश्न: मेरे अच्छे लेखों को कम टिप्पणियां क्यों मिलती हैं? प्रसंग: आप [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>सौ या उस से अधिक चिट्ठा प्रविष्टियां लिखे चिट्ठाकारों ने कुछ महत्वपूर्ण  परिस्थितियों का समाना जरूर कर लिया होगा – यह पोस्ट कुछ साझा समस्याओं और उनके  निदान के बारे मे है –  आशा है कि इन्टरनेट पर नये सक्रिय हुए हिंदीभाषी मित्रों के  किसी काम आएगी.</p>
<p>(१)</p>
<p>प्रश्न: मेरे अच्छे लेखों को कम टिप्पणियां क्यों मिलती हैं?</p>
<p>प्रसंग: आप किसी स्थापित चिट्ठाकार का चिट्ठा पढते हैं. लेख औसत लगता है और आप  देखते हैं कि इस गौण लेखन के बावजूद उनके यहां बहुत टिप्पणीप्रेम बरस रहा है. आपको  लगता है कि आपने उससे अच्छे जो लेख लिखे थे उन पर भी किसी ने ध्यान नही दिया था. या  कम से कम उस स्थापित चिट्ठाकार के इस वाले लेख से तो आप बेहतर ही लिख सकते थे. आप  शिकायत करना चाहते हैं पर कहें तो किससे? आप श्मशान वैराग्य कि स्थिती को प्राप्त  हो चुका महसूस करते हैं.</p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच:  सौ या अधिक लेख लिख चुकने के बाद आप टिप्पणियों का  मनोविज्ञान समझ चुके हैं. आप जानते हैं कि टिप्पणी विनिमय ने कई स्थापित  चिट्ठाकारों को स्थापित किया है. फ़िर भी आप इस लेन देन से परहेज करते हैं और संभव  है चाहे-अनचाहे इसे अजमा भी चुके हैं. हर पढे चिट्ठे पर “बढिया पोस्ट” “अच्छा  विचार” आदी करने का आपका मन नही होता.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm3.static.flickr.com/2182/2508000101_be0a7d6c3b.jpg" alt="" width="250" height="215" />ये भी जानिये: टिप्पणियों की संख्या से कोई स्थापित नही होता. प्रभावित करने की  क्षमता से स्थापित होता है. आपकी प्रभावित करने की क्षमता जैसे जैसे बढेगी  टिप्पणियों की संख्या अपने आप बढेगी और फ़िर ये ग्राफ़ एक पठार का सा रूप लेगा  &#8211;  टिप्पणियों की संख्या स्थिर हो जाएगी. लेकिन आपके पाठक स्थायी &#8211; एक दम पक्का जोड!.  आपके अच्छे लेखों  की संख्या महत्वपूर्ण है.</p>
<p>इसका यह अर्थ भी है कि अपने आप को तभी स्थापित मानें जब आपके पाठक आपसे किसी खास  पसंदीदा विषय पर लिखने कि मांग करें, पुराने लेखों का जिक्र हो और आपसे अपेक्षाएं  रखी जाएं.</p>
<p>दोहराव से बचते हुए अपनी विशिष्टता गढने का समय लें. अन्यथा अगर बहुधा लोग आपके  टिप्पणीदान का हिसाब बराबर करने मात्र “अच्छा है” “अच्छा है” कर रहे हैं तो आप  खुशफ़हमी में रहने के लिये स्वतंत्र हैं.</p>
<p>(२)</p>
<p>प्रश्न: जब ब्लागिंग स्वांत: सुखाय लिखने का माध्यम है तो इस पर हर वक्त इतना  विचार-विमर्श क्यों?</p>
<p>प्रसंग: आप एकाधिक एग्रीगेटर्स में पंजीबद्ध हैं और आए दिन चिट्ठाकारी के बारे  मे ही लिखे चिट्ठे पढ कर उकता चुके हैं. आपको आप पर थोपी जा रही इन  स्वयंभू फ़्रेंड-फ़िलासाफ़र्स-गाईड्स की फ़ौज से चिढ होने लगी हैं. पढने पर आपको लगता  है कि चिट्ठा लिखा ही गया था सबका ध्यान आकर्षित करने के लिये जबकी दी गई जानकारी  में कुछ खास नही था. आप तीखी प्रतिक्रिया जताना चाहते हैं लेकिन चुप रह जाते हैं.</p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: ऐसे प्रसंग चिट्ठाकारी से ही आपका मोह भंग कर सकते हैं.  इनको ले कर अधिक संवेदनशीलता दिखाने से बचें.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/163/343568210_c9f3c922bd.jpg" alt="" width="250" height="215" />ये भी जानिये: <strong>मेटा-ब्लॉगिंग </strong>और साधारण ब्लागिंग का फ़र्क  समझें – जैसे कि हिंदिनी/हिन्दिनी अब एक मेटाब्लाग है – ब्लागिंग के बारे में ब्लाग  और ई-स्वामी या फ़ुरसतिया व्यक्तिगत ब्लाग्स. व्यक्तिगत ब्लाग्स पर की गई  मेटाब्लागिंग अधिकतर ध्यानाकर्षणा और गैर तकनीकी ही होगी – कुछ अपवादों को छोड कर.  मेटाब्लाग्स की संख्या भी कम नहीं है – अत: अपनी पसंद के चुन लें. वैसे अगर आप यह लेख पढ रहे हैं तो आपका चुनाव सही है! <img src='http://hindini.com/hindini/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>दोहरी रणनीति का प्रयोग कर अपने आपको बचाएं. अपने चुने-चुनाए पसंदीदा  ब्लागर्स को किसी व्यक्तिगत एग्रीगेटर के माध्यम से फ़ीड जोड कर पढें और अच्छे नये  लेखकों को जानने पढने के लिये वेब आधारित एग्रीगेटर्स का सहारा लें – और बर्न-आऊट  से बचें, समय सीमा निर्धारित कर के चलें.</p>
<p>(३)</p>
<p>प्रश्न: ब्लागर्स ब्लाक का सत्य क्या है?</p>
<p>प्रसंग: आप स्वयं पाते हैं कि कई बार आपके पास लिखने के लिये अच्छा विषय नही है  लेकिन आप लिखना चाहते हैं. कई बार देखते हैं कि जनता “यूं ही” दे पोस्ट पे  पोस्ट ठेले जा रही है जबकि वे सनातन ब्लागर्स ब्लाक के मारे हुए लग रहे हैं. ऐसे  में आप क्या करें?</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/60/154832339_6ec7811348.jpg" alt="" width="250" height="215" /></p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: खुद पर लिखने की नियमितता थोपे जाने या दूसरों को लगातार  लिखता देख स्वयं कि सृजनशीलता पर शक करने कि वजह से चिट्ठाकार परेशान हो जाता है.</p>
<p>ये भी जानिये: आप स्वयं जानते हैं कि दो प्रकार के ब्लाक्स हैं – एक – लिखने का  मन है लेकिन सामग्री नही है और दो – लिखने की सामग्री है लेकिन लिखने का मन नही है.वैसे दोनो ही परिस्थितियां बहुत अच्छी हैं. ब्लागिंग से ब्रेक लें और एक पाठक  बनें या स्वयंसेवक – असक्रियाता से बचाव भी होगा और कई किस्म के काम हैं.</p>
<p>किसी विकी पेज का अनुवाद कर दें, तकनीकी व्यक्ति हैं तो श्रमदान कर दें. भाषा कि  उपलब्धता बढाएं. या कुछ और मनपसंद करें. लगातार लिखने का कोई दवाब स्वयं पर ना  थोपें.</p>
<p>दूसरी ओर, विचार आते ही बिना योजना बनाए लिखना – तली में आया गली में खाया  प्रवृत्ती है. हर प्रविष्ठी के प्रस्तुतिकरण की एक ५-१० मिनट की योजना, उसका  संयोजन आपको एक बेहतर ब्लागर बनाता है.</p>
<p>(४)</p>
<p>प्रश्न: बे~टिंग और ट्रालिंग से कैसे बचें और प्रतिक्रिया कब करें?</p>
<p>प्रसंग: सौ या अधिक लेख लिख कर और इस दौरान दूसरों को पढ कर अब आपकी नज़रें अब  इतनी विकसित हो चुकी हैं की आप सनसनीखेज, उकसानेवाले, मजेलेने वाले, चाबी-बाज,  काडीबाज्, ध्यानाकर्षणा (या ये भी संभव है कि व्यक्तिगत हो कर) लिखे गए शीर्षकों और  लेखों को सौ मील दूर से ताड लेते हैं और चिट्ठाकार की मंशा भी. आप देखते हैं कि  अन्य कई ब्लागर्स इस प्रकार के लेखन के लपेट में आ गए हैं – आप इस स्थिती को विधा  के लिये अच्छा नही मानते और अगर हिस्सा लिया तो आप भी उसी चक्र का हिस्सा बन जाएंगे  ये जानते समझते हैं. अब आप क्या करें समझ नही पा रहे. इससे आपका चिट्ठाकारी की  तरफ़ मोहभंग भी होता है.</p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: छोटे समूहों में, अच्छे चिट्ठाकारों में जुगुप्सा जगाने  वाले  ये बडे कारण हैं.</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm1.static.flickr.com/116/302040071_d3b75b30cb.jpg" alt="" width="250" height="215" />ये भी जानिये: तीन कारागर तरीके हैं – अपने व्यक्तित्व के हिसाब से चुनें -</p>
<p>पहला: नजर-अंदाज़ कर दें और आगे से उस चिट्ठाकार को पढना कतई बंद कर दें.</p>
<p>दूसरा: डरें बिल्कुल नहीं – मुखर हों. इस प्रकार कि हरकतों के खिलाफ़ आप अपनी  प्रतिक्रिया ससम्मान जता सकते हैं – आपके साहस की तारीफ़ ही होगी.  किसी और  चिट्ठाकार ने यदि पहले प्रतिक्रिया कर दी है तो आप अपनी सहमती भर जाहिर कर के अपना  पक्ष रख सकते हैं.</p>
<p>तीसरा: सही समय आने पर अपने विचार अपने चिट्ठे पर रखें. और सोची समझी रणनीति के  तहत संतुलित लिखें – मात्र भावुक हो कर नहीं.</p>
<p>(५)</p>
<p>प्रश्न: मेरे ब्लाग कि छबि का प्रबंधन कैसे करूं?</p>
<p>प्रसंग: चिट्ठा प्रारंभ करते समय आप प्रायोगिक मूड मे थे और अधिक उत्साह में भी.  फ़िर जैसे जैसे लिखा स्वयं की सोच में परिवर्तन भी आया और प्रस्तुतिकरण के तरीके में  भी. लेकिन तब तक आपके चिट्ठे की, लेखन की और आपकी छवि बन चुकी थी पाठकों के मन में.  वो वैसी नहीं जैसी आपने सोचा था, आप बदलाव लाना चाहते हैं – अब आप क्या करेंगे?</p>
<p><img class="alignleft" style="float: left;" src="http://farm3.static.flickr.com/2364/1709390794_24b426e6ea.jpg" alt="" width="250" height="215" /></p>
<p>कुछ जाने पहचाने सच: इस दौर से अधिकतर चिट्ठाकार गुज़रते हैं. ये नेचुलर  प्रोग्रेशन है.</p>
<p>कुछ शुरुआती तकनीकें:</p>
<p>१) नई केटेगरीज बनाएं और उनमें अधिक लिखें.</p>
<p>२) चिट्ठे का कलेवर बदलें और अपने ब्लागरोल्स में नए/अलग सदस्य जोडें.</p>
<p>३) HTML सीखें और बेहतर प्रस्तुतिकरण कि टिप्स व ट्रिक्स के बारे में जानें.</p>
<p>४) अपना डॉमेन नेम, पेड होस्टिंग आदे के विकल्पों पर भी विचार करें.</p>
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